अन्तर्राष्ट्रीय

पाकिस्तान में लगेगा आंतिकयों का मेला, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली रैली

मई 2025 में भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से बुरी तरह प्रभावित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) अब अपनी ताकत फिर से दिखाने की कोशिश में जुटा है। पाकिस्तान के लाहौर में 2 नवंबर को मीनार-ए-पाकिस्तान मैदान पर होने वाली इस विशाल रैली की तैयारियां जोरों पर हैं। भारतीय सेना के मिसाइल हमलों में LeT के मुख्यालय मुरीदके (लाहौर के पास) को भारी नुकसान पहुंचा था, जहां 100 से अधिक आतंकी मारे गए थे। यह रैली उसी ऑपरेशन के जवाब में शक्ति प्रदर्शन का प्रयास माना जा रहा है, जिसमें हाफिज अब्दुल रऊफ और पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी जैसे वॉन्टेड आतंकी प्रमुख भूमिका निभाएंगे।

ऑपरेशन सिंदूर, जो 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में LeT की सहयोगी TRF के आतंकी हमले (26 पर्यटकों की हत्या) के जवाब में शुरू हुआ था, भारत की नई सैन्य रणनीति का प्रतीक बना। भारतीय वायुसेना, थलसेना और नौसेना ने ब्रह्मोस, आकाश मिसाइलों और लूटरिंग म्यूनिशन्स से पाकिस्तान और PoK में LeT, JeM और HuM के 9 ठिकानों को निशाना बनाया। मुरीदके में LeT का मार्काज-ए-तैयबा (जिसमें स्कूल, कॉलेज और क्लिनिक शामिल थे) ध्वस्त हो गया। पाकिस्तान ने दावा किया कि 5 नागरिक मारे गए, लेकिन भारत ने कहा कि केवल आतंकी ढांचे को नुकसान पहुंचा। इस ऑपरेशन ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत को पहली बार 1971 के बाद सीधे निशाना बनाया, जहां लाहौर एयरपोर्ट पर भी ड्रोन हमले हुए।

अब LeT की रैली की तैयारियां गुप्त रूप से चल रही हैं। संगठन के प्रचार सामग्री में रऊफ (26/11 मुंबई हमले का आरोपी) और कसूरी (पहलगाम प्लानर) की तस्वीरें प्रमुख हैं। रैली में हजारों कार्यकर्ता जुटेंगे, जहां ‘कश्मीर की आजादी’ और ‘भारत विरोधी’ नारों के साथ भड़काऊ भाषण दिए जाएंगे। पाकिस्तानी सेना (ISI) के समर्थन से यह आयोजन हो रहा है, जो LeT को TTP के खिलाफ काउंटरवेट के रूप में इस्तेमाल कर रही है। लाहौर पुलिस ने सुरक्षा के लिए 2,000 जवान तैनात किए हैं, लेकिन प्रदर्शनकारियों को तिरंगा-जैसे पाकिस्तानी झंडे और बैनर ले जाने की छूट दी गई है। LeT ने कहा कि यह ‘जिहाद का संकल्प’ रैली होगी, जिसमें नए भर्ती अभियान भी चलेगा।

हालांकि, 24 अक्टूबर को सुरक्षा कारणों से रैली स्थगित होने की खबरें आईं, लेकिन LeT ने इसे खारिज करते हुए तैयारियां जारी रखने की बात कही। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान की ‘ओपन डिफायंस’ है, जो वैश्विक निंदा के बावजूद UN-प्रॉक्स्क्राइब्ड संगठन को बढ़ावा दे रही है। भारत ने इसे ‘आतंकवाद को बढ़ावा’ बताते हुए कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर का संदेश साफ था—आतंक के खिलाफ कोई छिपने की जगह नहीं।” अंतरराष्ट्रीय मीडिया जैसे अल जजीरा ने इसे ‘भारत-पाक तनाव का नया दौर’ करार दिया।

यह रैली न केवल LeT की बहाली का संकेत है, बल्कि भारत के लिए सतर्कता का सबक। यदि रैली हुई तो सोशल मीडिया पर #BoycottLeTRally ट्रेंड कर सकता है। पाकिस्तान की यह चाल कश्मीर मुद्दे को भुनाने की कोशिश लगती है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि भारत अब रक्षात्मक नहीं, आक्रामक रुख अपनाएगा।

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