राजनीति

चुनावी वादों पर बिहारवासी किसे वोट देंगे? विकास vs वादों की जंग

चुनावी वादों पर बिहारवासी किसे वोट देंगे? विकास vs वादों की जंग

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की धूम में वोटरों का फोकस अब वादों पर है। 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होने वाले मतदान से पहले NDA (बीजेपी-जेडीयू), महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-वाम) और जन सुराज पार्टी (प्रशांत किशोर) के बीच वादों की होड़ लगी है। युवा बेरोजगारी, प्रवासन, महिलाओं की सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर वादे तो खूब हो रहे हैं, लेकिन सर्वे बताते हैं कि बिहारवासी प्रदर्शन और यथार्थवाद को तरजीह दे रहे हैं। हालिया मैट्रिज-IANS पोल में NDA को 150-160 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि महागठबंधन को 70-85। क्या वोट वादों पर पड़ेगा या काम पर? आइए, समझें वोटर सेंटिमेंट।

NDA की रणनीति ‘डबल इंजन’ पर टिकी है। सीएम नीतीश कुमार ने मौजूदा योजनाओं को हाईलाइट किया है—महिला रोजगार योजना के तहत 1.21 करोड़ महिलाओं को 10,000 रुपये, विधवाओं/वृद्धों के लिए पेंशन तीन गुना, भूमिहीनों को जमीन और TRE-4 के तहत शिक्षक भर्ती। अमित शाह ने कहा, “हमने 20 साल में विकास किया, विपक्ष के ‘लॉफ्टी’ वादे झूठे हैं।” वोटरों में NDA का 40-49% समर्थन है, खासकर 55+ उम्र वालों में 68%। युवा प्रवासियों को INS विक्रांत जैसी राष्ट्रीय उपलब्धियां प्रभावित कर रही हैं। एक सर्वे में 54% ने SIR (वोटर लिस्ट रिवीजन) को ‘अच्छा कदम’ कहा, जो NDA को फायदा पहुंचा रहा है।

महागठबंधन तेजस्वी यादव की अगुवाई में युवाओं को ललचा रहा है। वादे हैं—प्रति परिवार एक सरकारी नौकरी (2.5 करोड़ नौकरियां), जीविका दीदियों को 30,000 रुपये मासिक वेतन, 10 लाख नौकरियां, 200 यूनिट मुफ्त बिजली और कर्ज माफी। लेकिन विश्वास की कमी साफ है—61% वोटर RJD के 10 लाख नौकरी वादे पर ‘बिल्कुल भरोसा नहीं’ करते। तेजस्वी ने कहा, “वोट चोरी रोकेंगे, वक्फ एक्ट फेंक देंगे।” कांग्रेस ने बेरोजगारी और प्रवासन पर फोकस किया, लेकिन 38% समर्थन के साथ वे पीछे हैं। वाम दलों ने 21 लाख एकड़ जमीन वितरण और 65% आरक्षण का वादा किया, लेकिन ग्रामीण वोटरों में इसका असर कम दिख रहा।

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने 100 दिनों में 7 वादे किए—10 लाख नौकरियां, 25 लाख स्वास्थ्य कवर, 1,500 रुपये पेंशन, मुफ्त शिक्षा, कम ब्याज लोन और शराबबंदी हटाना। किशोर बोले, “छठ मनाने आए प्रवासी कभी बाहर न जाएं।” C-Voter सर्वे में तेजस्वी टॉप पर हैं, लेकिन किशोर दूसरे, नीतीश तीसरे। युवा वोटरों में JSP को 13% समर्थन मिला, लेकिन फंडिंग पर सवाल हैं। एक यूजर ने ट्वीट किया, “वादे तो सब कर रहे, लेकिन NDA के पास रिकॉर्ड है।”

वोटर सेंटिमेंट सर्वे से साफ है—युवा बेरोजगारी (9.8% दर) और प्रवासन से तंग हैं, लेकिन NDA के मौजूदा काम (जैसे 2.35 लाख करोड़ कर्ज के बावजूद इंफ्रास्ट्रक्चर) को प्राथमिकता दे रहे। महिलाओं में NDA का फायदा, क्योंकि 10,000 रुपये का लाभ तुरंत मिला। X पर पोस्ट्स दिखाते हैं कि स्विंग वोटर ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ और मोदी फैक्टर से प्रभावित हैं। विपक्ष के वादों को ‘अवास्तविक’ कहा जा रहा, जैसे 20 लाख नौकरियां बिना बजट के। ECI ने 17 उपायों से पारदर्शिता बढ़ाई, लेकिन SIR पर विवाद बरकरार।

विशेषज्ञ कहते हैं, जाति गतिशीलता के साथ विकास मुद्दे फैसला करेंगे। C-Voter में NDA को 40% वोट शेयर, लेकिन युवा संशयवादी हैं। बिहारवासी शायद वादों से ज्यादा काम पर वोट देंगे—NDA की स्थिरता या तेजस्वी की नई ऊर्जा? 14 नवंबर को रिजल्ट तय करेगा। लोकतंत्र में वोट ही जवाब है!

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