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फरहान अख्तर की फिल्म ‘120 बहादुर’ पर अहीर समाज का विरोध, गुरुग्राम में हाईवे पर मार्च

फरहान अख्तर की फिल्म ‘120 बहादुर’ पर अहीर समाज का विरोध, गुरुग्राम में हाईवे पर मार्च

फरहान अख्तर की आगामी फिल्म ‘120 बहादुर’ ने अब सियासी और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। रविवार को सैकड़ों अहीर (यादव) समुदाय के सदस्यों ने गुरुग्राम के खेरकी दौला टोल प्लाजा से दिल्ली बॉर्डर तक हाईवे पर मार्च निकालकर फिल्म के टाइटल में बदलाव की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने तिरंगा थामे नारे लगाए, बाइक और ट्रैक्टरों पर बैनर लहराए और ‘जय यादव जय माधव’ तथा ‘अहीर रेजिमेंट हमारा हक है’ जैसे नारे गूंजाए। संयुक्त अहीर रेजिमेंट मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस मार्च ने NH-48 पर 1 किलोमीटर लंबा जाम लगा दिया, जिसे ट्रैफिक पुलिस ने कंट्रोल करने में खासी मशक्कत की।

फिल्म 1962 के भारत-चीन युद्ध पर आधारित है, जो लद्दाख के रेजांग ला की लड़ाई को दर्शाती है। इसमें फरहान अख्तर मेजर शैतान सिंह भाटी का किरदार निभा रहे हैं, जिन्होंने चार्ली कंपनी, 13 कुमाऊं रेजिमेंट के 120 सैनिकों का नेतृत्व किया था। इनमें से अधिकांश अहीर समुदाय से थे, जिन्होंने चीनी सेना के खिलाफ वीरतापूर्वक लड़ाई लड़ी और अपनी जान गंवा दी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि फिल्म का टाइटल ‘120 बहादुर’ अहीर सैनिकों के बलिदान को नजरअंदाज करता है। वे मांग कर रहे हैं कि इसे ‘120 वीर अहीर’ नाम दिया जाए, ताकि समुदाय की वीरता को सम्मान मिले। मोर्चा के सदस्य अरुण यादव ने कहा, “हमारे पूर्वजों ने देश के लिए कुर्बानी दी, लेकिन फिल्म में फोकस केवल चौहान समुदाय पर है। शहीदों का नाम फिल्म में हो और अंत में श्रद्धांजलि दी जाए।”

यह पहला मौका नहीं है जब अहीर समुदाय ने विरोध जताया। 21 सितंबर को खेरकी दौला टोल पर धरना दिया गया था, जिसके बाद फरहान ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “वे लड़ने गए लड़के थे, लेकिन अदम्य साहस और बलिदान से किंवदंतियां बन गए। ‘120 बहादुर’ चार्ली कंपनी के वीर अहीर सैनिकों को सलाम करती है।” लेकिन प्रदर्शनकारी इससे संतुष्ट नहीं। वकील सुबे सिंह यादव ने चेतावनी दी, “अगर नाम न बदला गया तो हरियाणा में फिल्म की रिलीज रोकेंगे। सीएम नायब सिंह सैनी से मिलकर राज्य स्तर पर बैन की मांग करेंगे। सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल कर रहे हैं।”

फिल्म का निर्देशन रजनीश ‘राजी’ घई ने किया है और इसे एक्सेल एंटरटेनमेंट के रितेश सिद्धवानी, फरहान अख्तर और अमित चंद्रा के ट्रिगर हैपी स्टूडियोज ने प्रोड्यूस किया है। रिलीज 21 नवंबर को रेजांग ला की 63वीं वर्षगांठ पर होनी है। इसमें राशी खन्ना स्पेशल अपीयरेंस में हैं। मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत परम वीर चक्र मिला था, और उनके नेतृत्व में 120 सैनिकों ने 1300 चीनी सैनिकों का मुकाबला किया। अहीर समुदाय का दावा है कि यह बलिदान ‘अहीर रेजिमेंट’ की मांग को मजबूत करता है, जो सेना में अलग रेजिमेंट की पुरानी मांग है।

प्रदर्शन ने सोशल मीडिया पर भी हंगामा मचा दिया। #Rename120BahadurTo120VeerAhir ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग अहीर सैनिकों की वीरता की कहानियां शेयर कर रहे हैं। कुछ यूजर्स ने फिल्ममेकर्स की सराहना की, लेकिन ज्यादातर समुदाय के समर्थन में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद फिल्म की प्रमोशन को फायदा पहुंचा सकता है, लेकिन अगर अनदेखा किया गया तो बॉयकॉट का खतरा है। हरियाणा में अहीर समुदाय की मजबूत पकड़ को देखते हुए राजनीतिक दबाव भी बढ़ सकता है।

मोर्चा ने 26 अक्टूबर को बड़ा आंदोलन की चेतावनी दी थी, जो अब साकार हो गया। पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन सुनिश्चित किया, लेकिन ट्रैफिक डायवर्जन से यात्रियों को परेशानी हुई। फरहान और प्रोड्यूसर्स की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह विवाद न केवल फिल्म उद्योग बल्कि ऐतिहासिक स्मृति को भी उजागर कर रहा है। अहीर वीरों का सम्मान हो, यही सबकी कामना है।

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