आज शाम ये रहेगा संध्या अर्घ्य का मुहूर्त, नोट कर लें सूर्य को जल चढ़ाने के नियम
आज शाम ये रहेगा संध्या अर्घ्य का मुहूर्त, नोट कर लें सूर्य को जल चढ़ाने के नियम
छठ महापर्व की धूम पूरे देश में छाई हुई है। कार्तिक शुक्ल षष्ठी के पावन अवसर पर आज छठ पूजा का तीसरा दिन है, जब लाखों व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे। यह पर्व सूर्यदेव और छठी माता की आराधना से जुड़ा है, जो परिवार की सुख-समृद्धि और संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है। इस बार छठ की शुरुआत 25 अक्टूबर को नहाय-खाय से हुई, कल 26 अक्टूबर को खरना मनाया गया और आज संध्या अर्घ्य का विशेष महत्व है। कल 28 अक्टूबर को उषा अर्घ्य के साथ व्रत का समापन होगा।
पंचांग के अनुसार, आज का संध्या अर्घ्य का शुभ मुहूर्त शाम 5:10 बजे से 5:48 बजे तक रहेगा। यह समय दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे प्रमुख क्षेत्रों के लिए सामान्यतः लागू है, हालांकि स्थानीय सूर्यास्त के आधार पर थोड़ा बदलाव हो सकता है। उदाहरण के लिए, पटना में सूर्यास्त शाम 5:13 बजे, गया में 5:11 बजे और भागलपुर में 5:04 बजे होगा। व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को नदी, तालाब या घाट पर एकत्र होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी। यदि घाट जाना संभव न हो, तो घर की छत पर कुंड बनाकर भी पूजा की जा सकती है।
सूर्य को जल चढ़ाने के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि गलत विधि से पूजा का फल अधूरा रह जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्यदेव को अर्घ्य पूर्व दिशा की ओर मुख करके दें। तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरें, उसमें लाल चंदन, कमल गट्टा या अर्घ्य पत्र (रूखे पत्ते) डालें। सूर्योदय के समय (सुबह 6:15 से 6:45 बजे तक) या अस्तकाल में जल अर्पित करें। जल चढ़ाते हुए दोनों हाथों से लोटा सिर से 8 इंच ऊपर रखें और ‘ॐ घृणिघृणिसूर्याय नमः’ या ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का 7 बार जाप करें। जल सूर्य को दिखाते हुए धीरे-धीरे गिराएं, ताकि यह सूर्य की किरणों में विलीन हो। अर्घ्य के बाद बचे जल को मस्तक पर लगाएं और आसन पर तीन परिक्रमा करें। गुड़ या फल चढ़ाना शुभ माना जाता है। भूलकर भी कांच या स्टील के बर्तन का उपयोग न करें।
यह परंपरा न केवल शारीरिक शुद्धि बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी प्रदान करती है। छठ पूजा में पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी छिपा है, क्योंकि व्रती प्राकृतिक जल स्रोतों का सम्मान करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित सूर्य अर्घ्य से कुंडली के दोष दूर होते हैं, स्वास्थ्य लाभ मिलता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस पावन अवसर पर सभी व्रतियों को छठी माता का आशीर्वाद प्राप्त हो, यही कामना है।
