Monday, September 14, 2026
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JDU में बगावत पर सख्त एक्शन: 11 नेता पार्टी से निष्कासित, बढ़ी हलचल

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले जनता दल (यूनाइटेड) ने बागी नेताओं पर सख्ती दिखाते हुए 11 नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इनमें पूर्व मंत्री शैलेश कुमार, पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह, पूर्व विधान पार्षद संजय प्रसाद, रणविजय सिंह, सुदर्शन कुमार और अमर कुमार सिंह जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इसके अलावा, महुआ विधानसभा क्षेत्र से पूर्व उम्मीदवार आस्मां परवीन, लव कुमार, आशा सुमन, दिव्यांशु भारद्वाज और विवेक शुक्ला को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। प्रदेश महासचिव चंदन कुमार सिंह की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि इन नेताओं ने पार्टी की विचारधारा, अनुशासन और संगठनात्मक आचरण के खिलाफ जाकर कार्य किया है, जिसके चलते इन्हें प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया।

यह कार्रवाई टिकट वितरण में नाराजगी के बाद कई नेताओं के निर्दलीय चुनाव लड़ने के फैसले के बाद की गई है। JDU ने कहा कि ये नेता पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार कर रहे थे, जो अनुशासनहीनता का प्रतीक है। निष्कासन पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि अगर ये नेता पार्टी के खिलाफ गतिविधियां जारी रखेंगे, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। JDU के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा, “चुनावी समर में अनुशासन सर्वोपरि है। बागियों को पार्टी ने कई मौके दिए, लेकिन उन्होंने NDA के हितों को नुकसान पहुंचाया। अब वे निर्दलीय लड़ें या कहीं और, लेकिन JDU का समर्थन नहीं मिलेगा।”

निष्कासित नेताओं की सूची: टिकट कटने से बगावत

– पूर्व मंत्री शैलेश कुमार: रोहतास जिले के प्रभावशाली नेता, जिन्हें दिनारा सीट से टिकट न मिलने पर निर्दलीय उम्मीदवार बनने का ऐलान किया था।

– पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह: महुआ क्षेत्र से नाराजगी, जहां पार्टी ने नया चेहरा उतारा।

– पूर्व विधान पार्षद संजय प्रसाद: पटना जिले से, पार्टी के सीट बंटवारे पर असंतोष।

– रणविजय सिंह, सुदर्शन कुमार, अमर कुमार सिंह: ये पूर्व विधान पार्षद और स्थानीय नेता हैं, जो गोपालपुर और नरकटियागंज जैसी सीटों पर बगावत कर रहे थे।

– आस्मां परवीन, लव कुमार, आशा सुमन, दिव्यांशु भारद्वाज, विवेक शुक्ला: महुआ से पूर्व उम्मीदवार, जो टिकट न मिलने पर जनता की अदालत में उतर आए।

ये नेता मुख्य रूप से रोहतास, पटना, वैशाली और सीमांचल जिलों से हैं, जहां बगावत ने NDA के समीकरण को उलझा दिया है। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि (23 अक्टूबर) के बाद कई बागियों ने पर्चा दाखिल कर लिया, जिससे कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला हो गया। JDU का यह एक्शन NDA के अन्य घटकों—BJP और LJP (रा.)—के साथ समन्वय में लिया गया है, ताकि वोटों का बंटवारा न हो।

चुनावी समीकरण पर असर: बागावत ने बढ़ाई NDA की चिंता

बिहार चुनाव के पहले चरण (6 नवंबर) की 121 सीटों पर नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जहां 1,314 उम्मीदवार मैदान में हैं। बागियों की वजह से दिनारा, महुआ, गोपालपुर और पटना साहिब जैसी सीटों पर NDA की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ये बागी वोटों को 5-10% तक काट सकते हैं, जो महागठबंधन को फायदा पहुंचा सकता है। BJP ने भी अपने कुछ बागियों पर कार्रवाई की है, लेकिन JDU का यह कदम सबसे सख्त माना जा रहा है। महागठबंधन ने इसे ‘NDA का आंतरिक कलह’ बताते हुए कहा कि जनता सुशासन की बजाय बगावत देख रही है।

नीतीश कुमार ने हाल ही में कहा था, “चुनाव में अनुशासन जरूरी है। बागी नेता पार्टी के लिए खतरा हैं।” यह निष्कासन NDA की एकजुटता दिखाने का प्रयास है, लेकिन क्या यह वोटरों को प्रभावित करेगा? चुनावी घमासान जारी है।

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