दिल्ली में सांसों पर मंडराया संकट: आनंद विहार में AQI 500 के पार, हवा जहरीली हो गई
दिल्ली में सांसों पर मंडराया संकट: आनंद विहार में AQI 500 के पार, हवा जहरीली हो गई
राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का कहर एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। सतह पर घनी स्मॉग की चादर बिछ गई है और सांस लेना दूभर हो गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का समग्र एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) शनिवार सुबह 261 तक पहुंच गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। लेकिन पूर्वी दिल्ली का आनंद विहार इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां AQI 576 तक दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ या ‘हैजर्डस’ स्तर को पार कर चुका है। यह आंकड़ा 500 से कहीं ज्यादा है, जिससे यहां की हवा सांसों के लिए घातक साबित हो रही है।
आनंद विहार, जो पहले से ही एक प्रदूषण हॉटस्पॉट के रूप में कुख्यात है, रेलवे स्टेशन, अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (ISBT), औद्योगिक सड़कों और भारी ट्रैफिक का केंद्र होने के कारण सबसे ज्यादा पीड़ित है। विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क से उठने वाली धूल, पड़ोसी उत्तर प्रदेश से आने वाले औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्य और वाहनों के धुएं ने यहां की स्थिति को और बिगाड़ दिया है। दीवाली के बाद से प्रदूषण में वृद्धि हुई है—20 अक्टूबर को AQI 404 था, 23 अक्टूबर को 410 और अब 576 तक पहुंच गया। अन्य इलाकों में भी हालात चिंताजनक हैं: वजीरपुर (363), जहांगirpुरी (407), बवाना (423) और अशोक विहार (389) में AQI ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ स्तर पर है। एनसीआर में गाजियाबाद (370), नोएडा (332) और गुरुग्राम (312) भी प्रभावित हैं।
सीपीसीबी के डेटा के मुताबिक, पीएम10 का स्तर आनंद विहार में 576 तक पहुंचा, जबकि पीएम2.5 263 पर है। नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) 21, सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) 7 और ओजोन (O3) 11 पर स्थिर है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ‘गंभीर’ AQI (401+) पर बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा रोगियों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। सांस संबंधी बीमारियां, आंखों में जलन और त्वचा की समस्याएं बढ़ सकती हैं। डॉक्टरों ने मास्क पहनने, एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करने और हाइड्रेटेड रहने की हिदायत दी है।
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत स्टेज-II लागू कर दिया है। इसमें डीजल जनरेटर सेट्स पर प्रतिबंध, निर्माण कार्यों पर रोक, 10 साल से पुराने वाहनों पर पाबंदी और एंटी-स्मॉग गन्स का इस्तेमाल शामिल है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि 2,000 टीमें मैदान में हैं और 70 अतिरिक्त एंटी-स्मॉग गन्स, वाटर स्प्रिंकलर्स तथा 1,440 किमी सड़कों पर सफाई का काम तेज कर दिया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 29 अक्टूबर को क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) के जरिए राहत की तैयारी पूरी होने की घोषणा की है। केंद्रीय एयर क्वालिटी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम (EWS) के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ के बीच रह सकता है।
ट्रांसपोर्ट उत्सर्जन 15.7% योगदान दे रहा है, जबकि पराली जलाने और मौसमी कारकों ने मुश्किल बढ़ा दी है। एनजीओ और विशेषज्ञों ने दीर्घकालिक समाधान के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, ग्रीन बेल्ट और सख्त मॉनिटरिंग की मांग की है। दिल्ली की यह विषैली हवा न केवल निवासियों की सेहत पर संकट है, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रही है। क्या कृत्रिम वर्षा से मिलेगी राहत?
