बेघर हुए कांग्रेस के ये बड़े नेता, आरोप लगाते हुए कहा- नोटिस नहीं दिया और सामान बाहर फेंक दिया
दिल्ली के पंडारा पार्क स्थित सरकारी बंगले से जबरन बेदखली की घटना ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद उदित राज ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिना किसी पूर्व नोटिस के उनके परिवार का सारा सामान सड़क पर फेंक दिया गया। उदित राज ने इसे ‘मोदी सरकार का अत्याचार’ और ‘जाति आधारित उत्पीड़न’ करार दिया है, जबकि मामला अदालत में विचाराधीन है। यह विवाद न केवल व्यक्तिगत अन्याय का प्रतीक है, बल्कि दलित नेताओं के खिलाफ भेदभाव की बहस को हवा दे रहा है।
घटना गुरुवार (24 अक्टूबर) दोपहर करीब 2 बजे पंडारा पार्क के C-I/38 स्थित टाइप-VIB बंगले पर हुई। यह बंगला उदित राज की पत्नी और पूर्व आईआरएस अधिकारी सीमा राज के नाम पर आवंटित था। हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मिनिस्ट्री के डायरेक्टोरेट ऑफ एस्टेट्स (DoE) के 15-20 अधिकारियों ने पुलिस बल के साथ पहुंचकर घर का सारा सामान—फर्नीचर, किताबें, दस्तावेज और 35 साल पुरानी यादें—बाहर सड़क पर पटक दिया। उदित राज ने ANI को बताया, “नोटिस नहीं दिया गया। परसों एक अधिकारी ने मौखिक रूप से कहा था, लेकिन लिखित कुछ नहीं। अचानक ये लोग आए और फेंकना शुरू कर दिया। मामला पटियाला हाउस कोर्ट में है, अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को है। यह अदालत की अवमानना है।” सीमा राज ने पीटीआई से कहा, “हमें एक महीने का समय दे दिया होता तो हम खुद खाली कर देते। किराया मार्केट रेट पर देने को तैयार थे, लेकिन इतना जल्दबाजी क्यों?”
उदित राज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो पोस्ट कर अपनी बेबसी बयां की। उन्होंने लिखा, “जो मनुवाद से ईमानदारी से लड़ता है, उसे हर सितम सहना पड़ता है। कथित दलित-पिछड़े नेता आरएसएस-बीजेपी से लड़ने का ढोंग करते हैं, लेकिन अंदरूनी मिले रहते हैं।” उन्होंने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर पर भी निशाना साधा, “उनके भेजे अधिकारी सामान फेंक रहे हैं। यह दलित होने की सजा है। संविधान कहां है?” उदित राज ने कानूनी लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया और सरकार से जांच की मांग की।
प्रशासन का पक्ष अलग है। DoE के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि बंगला 2019 में रिटायरमेंट के बाद अवैध कब्जे में था। 16 जून 2025 को नोटिस जारी किया गया था, और 23 जून को सीमा राज पेश हुईं। पब्लिक प्रिमायसेस (PP) एक्ट के तहत बेदखली की कार्रवाई वैध है। अधिकारी ने कहा, “कोई जबरदस्ती नहीं हुई। मौखिक चेतावनी दी गई थी, और कोर्ट में अपील लंबित होने पर भी प्रक्रिया पूरी हुई।” लेकिन उदित राज का दावा है कि लिखित नोटिस नहीं मिला, और कोर्ट ने स्टे का आदेश दिया था।
यह बंगला उदित राज का राजनीतिक मुख्यालय भी था, जहां से वे दलित अधिकारों पर सक्रिय थे। 2014-2019 तक भाजपा सांसद रह चुके उदित राज 2019 में टिकट न मिलने पर कांग्रेस में शामिल हो गए। विपक्ष ने इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बताया। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, “बीजेपी दलितों को दबाने पर तुली है।” वहीं, भाजपा ने चुप्पी साध रखी है।
घटना के बाद उदित राज का परिवार सड़क पर ही सामान संभाल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि PP एक्ट के तहत बेदखली वैध है, लेकिन कोर्ट लंबित मामले में प्रक्रिया पर सवाल उठा सकती है। क्या 28 अक्टूबर की सुनवाई से न्याय मिलेगा, या यह विवाद सियासी रंग ले लेगा?
