FSSAI का नया आदेश: खाने-पीने के उत्पादों पर ‘ORS’ लेबल लगाने से पहले WHO की मंजूरी अनिवार्य
FSSAI का नया आदेश: खाने-पीने के उत्पादों पर ‘ORS’ लेबल लगाने से पहले WHO की मंजूरी अनिवार्य
खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया, जिसमें किसी भी खाद्य या पेय पदार्थ पर ‘ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन’ (ORS) का लेबल लगाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से फॉर्मूला की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है। यह कदम उपभोक्ताओं को भ्रामक उत्पादों से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है, क्योंकि कई कंपनियां चीनी युक्त पेय को ORS के नाम से बेच रही थीं, जो वास्तविक चिकित्सकीय ORS से अलग हैं। FSSAI ने 2022 और 2024 के पुराने आदेशों को रद्द कर दिया, जिसमें ORS शब्द को ब्रांड नाम में इस्तेमाल करने की छूट दी गई थी।
FSSAI के नियामक अनुपालन विभाग की निदेशक स्वीटी बेहेरा ने 14 अक्टूबर 2025 को जारी एडवाइजरी में कहा कि ORS शब्द का उपयोग फल-आधारित, गैर-कार्बोनेटेड या रेडी-टू-ड्रिंक पेयों में भ्रामक है। यह खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के उल्लंघन के समान है। निर्देश के अनुसार, केवल WHO-अनुशंसित फॉर्मूला वाले उत्पाद ही ORS लेबल लगा सकते हैं, जिसमें ग्लूकोज की मात्रा 100 मिलीलीटर प्रति 1.35 ग्राम तक सीमित हो। वर्तमान में बाजार में बिकने वाले कई पेयों में चीनी 8-12 ग्राम प्रति 100 मिलीलीटर होती है, जो डिहाइड्रेशन के इलाज के लिए हानिकारक है।
यह निर्देश हैदराबाद की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सिवरंजनी संतोष की 8 वर्षों की मुहिम का परिणाम है। उन्होंने सोशल मीडिया और अदालत के माध्यम से फर्जी ORS ब्रांड्स के खिलाफ आवाज उठाई। डॉ. संतोष ने कहा, “यह जनता की जीत है। अब फार्मेसी, अस्पताल और स्कूलों में केवल 4-ग्राम और 20-ग्राम के WHO-अनुमोदित ORS पैकेट ही उपलब्ध होंगे।” FSSAI ने सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों (FBOs) को तुरंत उत्पादों से ORS शब्द हटाने और विज्ञापनों को सुधारने का आदेश दिया है। उल्लंघन पर खाद्य सुरक्षा और मानक (लेबलिंग और डिस्प्ले) विनियम, 2020 और विज्ञापन दावे विनियम, 2018 के तहत जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम डिहाइड्रेशन से जुड़ी बीमारियों, खासकर बच्चों में, को रोकने में मदद करेगा। बाजार अनुसंधान फर्म Pharmarack के अनुसार, ORS सेगमेंट का टर्नओवर पिछले 12 महीनों में 1,232 करोड़ रुपये रहा। FSSAI ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि फर्जी उत्पाद देखने पर t.co/FSSAI या ऐप पर शिकायत करें। यह निर्णय अन्य स्वास्थ्य दावों जैसे ‘इम्यूनिटी बूस्टर’ पर भी सख्ती का संकेत देता है।
