आधी सदी से बंद था बांके बिहारी मंदिर का तोषखाना, ताला खुला तो मिले कीमती आभूषण और रहस्यमयी दस्तावेज
आधी सदी से बंद था बांके बिहारी मंदिर का तोषखाना, ताला खुला तो मिले कीमती आभूषण और रहस्यमयी दस्तावेज
मथुरा: वृंदावन के प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में शनिवार दोपहर एक ऐतिहासिक क्षण घटित हुआ। लगभग 54 वर्षों से बंद पड़े तोषखाने (खजाना कक्ष) का ताला सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी की निगरानी में खोला गया। मंदिर के गर्भगृह के बगल स्थित इस कमरे को 1971 से सील रखा गया था, और अब इसके अंदर कीमती आभूषण, सोने-चांदी के गहने, रजत हिंडोला और मंदिर की अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और इन्वेंटरी तैयार की गई, जो मंदिर प्रबंधन के लिए नया अध्याय खोलेगी।
कमरा खोलने का फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लिया गया था, जो 2002 और 2004 में प्रयासों के बावजूद सफल न होने के बाद अब साकार हुआ। दोपहर 1 बजे मंदिर बंद होने के बाद कमेटी ने ताला तोड़ा। अंदर मिली वस्तुओं में 18वीं शताब्दी के ग्वालियर रियासत और विंध्याचल राजपरिवार द्वारा दान किए गए सोने-चांदी के आभूषण प्रमुख थे। सेवायत आचार्य प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया, “यह तोषखाना ठाकुर जी के आसन के नीचे है। पहले चढ़ावे के आभूषण यहीं रखे जाते थे। 1916 और 1926 में चोरियां होने के बाद इसे सील किया गया था।” एक छोटे होल से दान-पत्र डाले जाते थे, लेकिन अब सब कुछ बैंक में जमा होने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि, कमेटी ने पुष्टि की कि अंदर कई अप्रत्याशित वस्तुएं मिलीं, जिनमें रजत हिंडोला और पुराने दस्तावेज शामिल हैं।मंदिर समिति के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने कहा, “अब यहां कुछ नहीं बचा, लेकिन जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आएगी।” सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ की तैनाती की गई है।
यह घटना मंदिर के इतिहास को नई रोशनी देगी। भक्तों का मानना है कि इससे ठाकुर जी की कृपा बढ़ेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इन्वेंटरी को पारदर्शी बनाने का निर्देश दिया है।
