जिंदगी बचाने का एक ही रास्ता था, लेकिन दरवाजा न खुला: जैसलमेर बस हादसे में 20 यात्री जिंदा जले, आग की लपटों में फंसे परिवारों की दिल दहलाने वाली कहानियां
जिंदगी बचाने का एक ही रास्ता था, लेकिन दरवाजा न खुला: जैसलमेर बस हादसे में 20 यात्री जिंदा जले, आग की लपटों में फंसे परिवारों की दिल दहलाने वाली कहानियां
राजस्थान के जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर मंगलवार दोपहर एक प्राइवेट एसी स्लीपर बस में लगी भीषण आग ने 20 यात्रियों की जिंदगी छीन ली। बस में सवार 57 यात्रियों में से कई परिवारों के साथ थे, और आग लगते ही दरवाजा न खुलने से वे लपटों में फंस गए। “दरवाजा खोल दो, बच्चे फंस गए!” की चीखें आसमान छू रही थीं, लेकिन शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई आग ने महज मिनटों में सब कुछ राख कर दिया। यह हादसा सड़क सुरक्षा और वाहनों की तकनीकी खामियों पर सवाल खड़े कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त कर मृतकों के परिजनों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता का ऐलान किया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी जिला मुख्यालय पहुंचकर हालात का जायजा लिया।
घटना दोपहर करीब 3:30 बजे थईयात गांव के पास हुई। जैसलमेर से जोधपुर जा रही प्राइवेट बस, जिसमें ज्यादातर परिवार और पर्यटक सवार थे, महज 20 किलोमीटर दूर पहुंची ही थी कि उसके पिछले हिस्से से धुआं निकलने लगा। चालक ने तुरंत बस रोकी, लेकिन अगले ही पल इंजन से चिंगारी निकली और आग ने पूरे वाहन को घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शी रमेश स्वामी ने बताया, “बस के अंदर चीखें गूंज रही थीं। एक मां अपने दो बच्चों को खिड़की से बाहर धकेल रही थी, लेकिन दरवाजा लॉक था। लोहे की सलाखें तोड़ने की कोशिश में हाथ जल गए।” बस में सवार एक परिवार—जोधपुर के रहने वाले राजेश मीणा, उनकी पत्नी और दो बेटियां—सब जिंदा जल गए। राजेश की बेटी ने फोन पर आखिरी कॉल की: “पापा, दरवाजा नहीं खुल रहा… आग बहुत तेज है।” यह कॉल परिवार के लिए अंतिम विदाई बन गई।
आग की लपटें इतनी तेज थीं कि कई यात्री खिड़कियां तोड़कर कूदे, लेकिन 20 लोग अंदर ही फंस गए। आर्मी बेस के जवानों ने सबसे पहले बचाव किया। एक जवान ने कहा, “हमने 10-12 लोगों को बाहर निकाला, लेकिन बस का पिछला हिस्सा जल चुका था। दरवाजा गर्मी से पिघल गया था।” 16 घायलों को जैसलमेर के जवाहर अस्पताल पहुंचाया गया, जिनमें से 8 की हालत गंभीर है। इन्हें जोधपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। अस्पताल में चीखें और रोने की आवाजें गूंज रही हैं। एक घायल यात्री, जोधपुर की रहने वाली रीता ने बताया, “मैं ऊपरी बर्थ पर सो रही थी। नीचे चीखें सुनकर कूदी, लेकिन मेरी बहन अंदर फंस गई। दरवाजा खोलने के लिए हम सब लटक रहे थे, लेकिन आग ने सब कुछ निगल लिया।”
प्रारंभिक जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट या इंजन ओवरहीटिंग बताया जा रहा है। बस पुरानी थी, और दरवाजे के लॉक सिस्टम में खराबी थी। पुलिस ने चालक और परिचालक को हिरासत में ले लिया। एसपी जैसलमेर हरिराम ने कहा, “बस की फिटनेस चेक होगी। यात्रियों के नाम की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट भी हो सकता है।” मुख्यमंत्री शर्मा ने हेलिकॉप्टर से जिला पहुंचकर घायलों से मुलाकात की। उन्होंने कहा, “यह हृदयविदारक है। घायलों का इलाज मुफ्त होगा, और परिवारों को हर संभव मदद।” पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने भी शोक व्यक्त किया।
यह हादसा राजस्थान में सड़क सुरक्षा पर बहस छेड़ रहा है। पिछले साल 500 से ज्यादा बस हादसे हुए, जिनमें 300 मौतें। विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी बसों की जांच जरूरी। पीएम मोदी ने ट्वीट कर शोक जताया, “जैसलमेर हादसे से व्यथित हूं। मृतकों के परिजनों को 2 लाख, घायलों को 50 हजार।” फिलहाल, रेस्क्यू पूरा हो गया, लेकिन परिवारों का दर्द कम होने वाला नहीं। हाईवे पर ट्रैफिक सामान्य हो गया, लेकिन थईयात गांव में शोक का साया है। सड़कें सुरक्षित हों, ऐसी प्रार्थना।
