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पुलिस सिस्टम की पोल खोलने वाली आत्महत्याएं: शारीरिक शोषण, गैंगस्टर्स और रिश्वतखोरी का खौफनाक चेहरा

पुलिस सिस्टम की पोल खोलने वाली आत्महत्याएं: शारीरिक शोषण, गैंगस्टर्स और रिश्वतखोरी का खौफनाक चेहरा

हरियाणा पुलिस के दो वरिष्ठ अधिकारियों की आत्महत्याओं ने न केवल विभाग को हिलाकर रख दिया है, बल्कि पूरे सिस्टम की गंदगी को उजागर कर दिया है। एक तरफ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की गोली से हुई मौत, दूसरी तरफ एएसआई संदीप लाठर का सुसाइड—दोनों मामलों में शारीरिक शोषण, गैंगस्टर्स के साथ साठगांठ, रिश्वतखोरी और विभागीय दबाव की कहानी सामने आ रही है। सुसाइड नोट्स और FIRs से खुलासा हुआ कि पुलिस महकमा भ्रष्टाचार के दलदल में धंस चुका है, जहां अफसरों को जिंदा जलाने वाले सिस्टम की पोल खुल गई। यह घटनाक्रम राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की जांच का विषय बन चुका है, और हरियाणा सरकार पर दबाव बढ़ रहा है।

वाई. पूरन कुमार: रिश्वत और गैंगस्टर्स का दबाव

हरियाणा के 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार (59) ने 8 अक्टूबर को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित अपने आवास पर कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली। घटनास्थल से मिले 8 पन्नों के सुसाइड नोट और वसीयत में उन्होंने अपने करियर की कई समस्याओं का जिक्र किया। नोट में 10 वरिष्ठ अधिकारियों के नाम उल्लेखित हैं, जिन पर रिश्वतखोरी, गैंगस्टर्स को संरक्षण, और विभागीय साजिश का आरोप लगाया। पूरन कुमार रोहतक रेंज के IGP थे, लेकिन 29 सितंबर को उन्हें पुलिस ट्रेनिंग सेंटर (PTC) करनाल में ट्रांसफर कर दिया गया, जिसे ‘पनिशमेंट पोस्टिंग’ माना जाता है।

ट्रांसफर के महज 9 दिन बाद यह कदम उठाया। सुसाइड से ठीक पहले, रोहतक में शराब ठेकेदार प्रवीण बंसल ने पूरन कुमार के PSO (पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर) हेड कांस्टेबल सुशील पर 2.5 लाख रुपये मासिक रिश्वत मांगने का आरोप लगाया। FIR में पूरन कुमार का नाम भी आया, जो शराब माफिया और गैंगस्टर्स के साथ कथित साठगांठ का संकेत देता है। सुशील को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन पूरन कुमार ने 24 घंटे के अंदर सुसाइड कर लिया। उनकी पत्नी, IAS अमनीत कौर, ने कहा, “ट्रांसफर और FIR ने उन्हें तोड़ दिया। वे सिस्टम की भ्रष्टाचार से जूझ रहे थे।” पुलिस ने नोट को जब्त कर जांच शुरू की, लेकिन परिवार ने डिजिटल सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया।

संदीप लाठर: शोषण और रिश्वतखोरी का शिकार

दूसरी घटना रोहतक के ASI संदीप लाठर (45) की है, जिन्होंने 12 अक्टूबर को अपनी सर्विस रिवॉल्वर से गोली मारकर सुसाइड कर लिया। लाठर रोहतक सिटी थाने में तैनात थे और पूरन कुमार के PSO रह चुके थे। उनके सुसाइड नोट में सीनियर अधिकारियों पर शारीरिक शोषण, जबरन वसूली, और महिला अफसरों के साथ गलत व्यवहार का आरोप लगाया। लाठर ने लिखा, “रिश्वत न देने पर मारपीट और मानसिक प्रताड़ना सहनी पड़ रही थी। गैंगस्टर्स के दबाव में हम जैसे जूनियर अफसर फंस जाते हैं।” यह नोट पूरन कुमार केस से जुड़ता दिख रहा, क्योंकि दोनों रोहतक रेंज से ताल्लुक रखते थे।

लाठर के परिवार ने बताया कि वे रिश्वतखोरी के जाल में फंस गए थे, जहां सीनियर अफसर गैंगस्टर्स से कनेक्शन के लिए जूनियरों को ब्लैकमेल करते थे। रोहतक पुलिस ने नोट के आधार पर FIR दर्ज की, लेकिन जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। पूर्व सहकर्मी ने कहा, “संदीप सिस्टम की गंदगी से तंग आ चुके थे। शोषण और दबाव ने उन्हें तोड़ दिया।”

सिस्टम की पोल: भ्रष्टाचार का जाल

दोनों मामलों ने हरियाणा पुलिस सिस्टम की काली सच्चाई उजागर कर दी। शराब माफिया, गैंगस्टर्स, और रिश्वतखोरी का नेटवर्क इतना जटिल है कि अफसर खुद अपनी जान लेने को मजबूर हो रहे। NHRC ने हरियाणा DGP को नोटिस जारी कर रिपोर्ट मांगी। CM नायब सिंह सैनी ने शोक व्यक्त किया, लेकिन विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा, “पुलिस महकमा भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया। सुधार जरूरी।” BJP ने जांच का वादा किया।

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांसफर पॉलिसी, रिश्वत का दबाव, और गैंगस्टर्स की घुसपैठ ने सिस्टम को खोखला कर दिया। पुलिस सुधारों की मांग तेज हो गई। फिलहाल, जांच जारी है, लेकिन ये आत्महत्याएं सिस्टम की पोल खोलने वाली चेतावनी हैं। क्या सुधार होंगे, या यह सिलसिला जारी रहेगा? समय बताएगा।

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