Tuesday, June 30, 2026
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‘पत्नी पति को लट्टू की तरह न नचाए’: सुप्रीम कोर्ट की वैवाहिक विवाद में तल्ख टिप्पणी, बच्चों के हित को दी प्राथमिकता

‘पत्नी पति को लट्टू की तरह न नचाए’: सुप्रीम कोर्ट की वैवाहिक विवाद में तल्ख टिप्पणी, बच्चों के हित को दी प्राथमिकता

सुप्रीम कोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद की सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पत्नी को अपने पति को “लट्टू की तरह नचाने” की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने यह टिप्पणी एक सरकारी दंपत्ति के सेपरेशन केस में की, जिसमें पति-पत्नी के बीच बच्चों की कस्टडी और रहन-सहन को लेकर तनाव था। कोर्ट ने दोनों पक्षों से अहंकार छोड़कर बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देने की सलाह दी। यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जहां लोग इसे अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं।

मामला दिल्ली में रेलवे में कार्यरत पति और पटना में रिजर्व बैंक में नौकरी करने वाली पत्नी का है। इस दंपत्ति की शादी 2018 में हुई थी, और उनके दो बच्चे हैं—5 साल की बेटी और 3 साल का बेटा। दोनों 2023 से अलग रह रहे हैं। पति का कहना है कि वह ससुराल में रहना नहीं चाहता, जबकि पत्नी और उसके परिवार ने पति के खिलाफ कई मुकदमे दायर किए हैं। कोर्ट में सुनवाई के दौरान पति-पत्नी के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें पत्नी पर पति को नियंत्रित करने का आरोप लगा। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “पत्नी को यह रवैया नहीं अपनाना चाहिए कि वह पति को लट्टू की तरह घुमाए। वैवाहिक रिश्ते में दोनों को बराबरी और सम्मान देना होगा।”

कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि पारिवारिक कलह का सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों को होता है। बेंच ने कहा, “पति-पत्नी अपने अहं को किनारे रखें और बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को प्राथमिकता दें।” कोर्ट ने दोनों को मध्यस्थता (mediation) का रास्ता अपनाने की सलाह दी और बच्चों की कस्टडी के लिए संयुक्त योजना बनाने को कहा। जजों ने पति-पत्नी को समझाया कि अलगाव से बच्चों का भविष्य दांव पर नहीं लगना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी, जिसमें मध्यस्थता की प्रगति पर चर्चा होगी।

यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। कुछ यूजर्स ने कोर्ट के बयान को “पितृसत्तात्मक” करार दिया, जबकि अन्य ने इसे “वास्तविक और संतुलित” बताया। एक X यूजर ने लिखा, “सुप्रीम कोर्ट ने सही कहा, रिश्तों में नियंत्रण नहीं, सहयोग चाहिए।” वहीं, कुछ ने इसे “स्त्री-विरोधी” बताकर निंदा की। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला वैवाहिक विवादों में बच्चों की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल के वर्षों में वैवाहिक मामलों में संतुलित रुख अपनाया है। 2024 में भी कोर्ट ने एक तलाक केस में कहा था कि “रिश्ते बचाने की कोशिश पहले होनी चाहिए।” इस मामले में कोर्ट का जोर मध्यस्थता और बच्चों के हित पर रहा। क्या यह टिप्पणी वैवाहिक रिश्तों में नए दिशानिर्देश देगी? अगली सुनवाई इसका जवाब देगी।

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