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केदारनाथ का 9 घंटे का सफर अब 36 मिनटों में: हाईटेक रोपवे से बदलेगी यात्रा, PM मोदी की मंजूरी के बाद अडानी को मिला ठेका

केदारनाथ का 9 घंटे का सफर अब 36 मिनटों में: हाईटेक रोपवे से बदलेगी यात्रा, PM मोदी की मंजूरी के बाद अडानी को मिला ठेका

उत्तराखंड के चार धामों में सबसे कठिन माने जाने वाले केदारनाथ धाम तक का 16 किलोमीटर का पैदल ट्रेक अब इतिहास बनने जा रहा है। केंद्र सरकार ने सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक 12.9 किलोमीटर लंबे हाईटेक रोपवे प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है, जो 9 घंटे के कष्टमय सफर को महज 36 मिनटों में पूरा कर देगा। यह दुनिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित सबसे लंबा रोपवे होगा, जो 11,500 फीट की ऊंचाई पर बनेगा। मार्च 2025 में कैबिनेट की मंजूरी के बाद सितंबर में अडानी एंटरप्राइजेज को 4,081 करोड़ रुपये का ठेका मिला, और अब निर्माण कार्य तेजी से शुरू होने की उम्मीद है। यह प्रोजेक्ट न केवल तीर्थयात्रियों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि पर्यटन को दोगुना करने और स्थानीय रोजगार बढ़ाने का माध्यम भी बनेगा.

केदारनाथ धाम, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, हर साल अप्रैल-मई से अक्टूबर-नवंबर तक 20 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। वर्तमान में सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक वाहन, फिर 16 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई—जो पैदल, घोड़े, डोली या हेलीकॉप्टर से पूरी होती है—श्रद्धालुओं के लिए जोखिम भरा है। 2013 की आपदा के बाद से यह यात्रा और चुनौतीपूर्ण हो गई। रोपवे प्रोजेक्ट इस समस्या का स्थायी समाधान है। यह सोनप्रयाग से सीधा केदारनाथ धाम तक चलेगा, जिसमें गौरीकुंड को भी कवर किया जाएगा।

प्रोजेक्ट की सबसे खास बात है इसका हाईटेक ट्राई-केबल डिटैचेबल गोंडोला (3S) सिस्टम, जो यूरोपियन टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इसकी क्षमता 1,800 यात्री प्रति घंटा प्रति दिशा (PPHPD) है, यानी रोजाना 18,000 श्रद्धालु आसानी से सफर कर सकेंगे। गोंडोला कैबिन में एयर कंडीशंड, हीटिंग सिस्टम और इमरजेंसी सुविधाएं होंगी, जो सभी मौसमों में काम करेगा। यूनियन कैबिनेट कमिटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने मार्च में 6,811 करोड़ रुपये की लागत से दो रोपवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी—केदारनाथ (4,081 करोड़) और हेमकुंड साहिब (2,730 करोड़)—जो नेशनल रोपवेज डेवलपमेंट प्रोग्राम ‘पर्वतमाला परियोजना’ का हिस्सा हैं।

अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने कहा, “यह रोपवे सिर्फ इंजीनियरिंग का चमत्कार नहीं, बल्कि आस्था और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का पुल है। हम लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित और तेज बनाएंगे।” प्रोजेक्ट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर बनेगा, जहां अडानी 42% राजस्व शेयर करेगा। निर्माण कार्य 6 साल में पूरा होगा, और 35 साल के कॉन्सेशन पीरियड में ऑपरेट होगा। उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा, “यह प्रोजेक्ट केदारनाथ यात्रा को दुनिया की सबसे आसान तीर्थयात्रा बना देगा। पर्यटकों की संख्या 10 गुना बढ़ सकती है।”

यह प्रोजेक्ट पर्यावरण के अनुकूल भी है। NBWL (नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ) ने जून 2022 में मंजूरी दी, जिसमें वन क्षेत्र में न्यूनतम कटाई और वन्यजीव सुरक्षा के प्रावधान हैं। हेमकुंड साहिब रोपवे भी इसी तरह गोविंदघाट से हेमकुंड तक 12.4 किलोमीटर का होगा, जो 42 मिनट में यात्रा पूरी करेगा। PM मोदी ने नवंबर 2021 में केदारनाथ दर्शन के दौरान इसकी नींव रखी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को 5,000 करोड़ रुपये सालाना का बूस्ट देगा।

श्रद्धालुओं में उत्साह है। एक यात्री ने कहा, “पहले घोड़े पर चढ़ना जोखिम भरा था, अब रोपवे से हिमालय की खूबसूरती का मजा ले सकेंगे।” हालांकि, कुछ पर्यावरणविदों ने ऊंचाई पर निर्माण की चुनौतियों पर सवाल उठाए हैं। सरकार ने आश्वासन दिया कि सेफ्टी और इको-फ्रेंडली डिजाइन पर फोकस रहेगा। यह प्रोजेक्ट केदारनाथ को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई ऊंचाई देगा।

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