उत्तरकाशी में हल्के झटके: 3.6 तीव्रता का भूकंप, कोई नुकसान नहीं, लेकिन सतर्कता बरतें
उत्तरकाशी में हल्के झटके: 3.6 तीव्रता का भूकंप, कोई नुकसान नहीं, लेकिन सतर्कता बरतें
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में मंगलवार शाम को हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.6 दर्ज की गई। यह घटना क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता को फिर से याद दिलाती है, जहां 1991 के विनाशकारी भूकंप की यादें अभी ताजा हैं। सौभाग्य से, कम तीव्रता के कारण कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
भूकंप का केंद्र उत्तरकाशी के पास 31.15 उत्तरी अक्षांश और 77.99 पूर्वी देशांतर पर स्थित था। यह झटका जमीन के अंदर महज 5 किलोमीटर की गहराई से आया, जिसके कारण हल्के कंपन महसूस हुए। NCS की रिपोर्ट के मुताबिक, भूकंप ठीक शाम 7 बजकर 30 मिनट 10 सेकंड (IST) पर आया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कुछ इलाकों में घरों की खिड़कियां हिलीं और लोग सड़कों पर निकल आए। गंगोत्री, यमुनोत्री और उत्तरकाशी शहर के आसपास के गांवों में झटके ज्यादा महसूस हुए, लेकिन डर के अलावा कोई हादसा नहीं। जिला प्रशासन ने तुरंत कंट्रोल रूम सक्रिय कर लिया और राहत टीमों को अलर्ट किया।
उत्तरकाशी हिमालय की गोद में बसा एक भूकंप प्रोन क्षेत्र है, जो जोशीमठ से लेकर गंगोत्री तक फैला है। 1991 में यहां 6.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे। हाल के वर्षों में भी छोटे-मोटे झटके आम हैं—जनवरी 2025 में ही 3.5 और 2.7 तीव्रता के दो भूकंप आए थे, जिनमें भी कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालय क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेटों की गति के कारण ऐसे हल्के भूकंप सामान्य हैं, लेकिन ये बड़े भूकंपों के पूर्वसंकेत भी हो सकते हैं। भूवैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार ने कहा, “3.6 तीव्रता का भूकंप हल्का है, लेकिन भूकंपरोधी भवनों का निर्माण और जागरूकता जरूरी है।”
जिला मजिस्ट्रेट डाॅ. आशीष चौहान ने कहा, “हमारी टीमें सतर्क हैं। लोगों से अपील है कि झटके महसूस होने पर ड्रॉप, कवर एंड होल्ड ऑन का पालन करें। हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क करें।” राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने भी अलर्ट जारी किया है, जिसमें भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सावधानी बरतने को कहा गया। पर्यटन सीजन शुरू होने के बीच गंगोत्री धाम और चार धाम यात्रा मार्ग पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
यह घटना जलवायु परिवर्तन और भू-संरचना के बदलाव के बीच उत्तराखंड की चुनौतियों को उजागर करती है। एनजीओ और स्थानीय समुदाय भूकंप जागरूकता शिविर चला रहे हैं, जहां लोगों को सुरक्षित रहने के टिप्स सिखाए जा रहे। फिलहाल, NCS लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। हिमालय की गोद में बसे उत्तरकाशीवासी फिर हिम्मत दिखा रहे हैं, लेकिन प्रकृति के कोप से बचाव के लिए मजबूत कदम उठाने की जरूरत है।
