ऑपरेशन ब्लू स्टार गलती थी, इंदिरा को कीमत चुकानी पड़ी… पी चिदंबरम का बड़ा बयान
ऑपरेशन ब्लू स्टार गलती थी, इंदिरा को कीमत चुकानी पड़ी… पी चिदंबरम का बड़ा बयान
1984 के विवादास्पद ऑपरेशन ब्लू स्टार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने “गलत तरीका” करार देते हुए शनिवार को एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि स्वर्ण मंदिर को आतंकवादियों से मुक्त कराने के लिए सेना की कार्रवाई गलत थी और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस गलती की कीमत अपनी जान देकर चुकाई। चिदंबरम ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल इंदिरा गांधी का नहीं, बल्कि सेना, पुलिस, खुफिया एजेंसियों और सिविल सर्विसेज का सामूहिक फैसला था। “इंदिरा गांधी को अकेले दोष नहीं दिया जा सकता,” उन्होंने जोर देकर कहा।
यह बयान खुषवंत सिंह लिटरेचर फेस्टिवल 2025 के दौरान आया, जहां चिदंबरम पत्रकार हरिंदर बाजवा की किताब ‘They Will Shoot You, Madam: My Life Through Conflict’ पर चर्चा का संचालन कर रहे थे। बाजवा ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के फैसले पर इंदिरा गांधी के हवाले से सवाल उठाया, तो चिदंबरम ने सहमति जताई। उन्होंने कहा, “सेना के किसी अधिकारी का अपमान नहीं कर रहा, लेकिन स्वर्ण मंदिर को वापस लेने का वह गलत तरीका था। कुछ साल बाद हमने सही तरीका दिखाया—सेना को बाहर रखकर। ब्लू स्टार गलत था, और मैं सहमत हूं कि श्रीमती गांधी ने उस गलती के लिए अपनी जान से कीमत चुकाई।”
ऑपरेशन ब्लू स्टार जून 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में संचालित हुआ था। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्देश पर भारतीय सेना ने खालिस्तानी अलगाववादियों के नेता जरनैल सिंह भिंडरांवाले और उनके सशस्त्र समर्थकों को खदेड़ने के लिए कार्रवाई की। 1 से 8 जून तक चले इस अभियान में सैनिकों और नागरिकों समेत सैकड़ों लोग मारे गए। भिंडरांवाले समेत कई उग्रवादी मारे गए, लेकिन मंदिर को भारी नुकसान पहुंचा। इस घटना ने सिख समुदाय में गहरा आक्रोश पैदा किया। मात्र चार महीने बाद, 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की उनके सिख बॉडीगार्ड बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने हत्या कर दी, जो ब्लू स्टार का प्रत्यक्ष परिणाम मानी जाती है। हत्या के बाद देशभर में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे, जिसमें हजारों सिख मारे गए।
चिदंबरम ने ऑपरेशन ब्लैक थंडर (1988) का उदाहरण दिया, जिसमें दिल्ली के हरि मंदिर में उग्रवादियों को बिना सेना के भगाया गया। उन्होंने कहा, “ब्लू स्टार सेना, पुलिस, इंटेलिजेंस और सिविल सर्विसेज का सामूहिक निर्णय था। केवल इंदिरा पर दोषारोपण उचित नहीं।” वर्तमान पंजाब पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि खालिस्तान की मांग लगभग समाप्त हो चुकी है। अब राज्य की मुख्य समस्या आर्थिक संकट है, जिससे अवैध प्रवासन बढ़ रहा है। “मेरी पंजाब यात्राओं से लगता है कि अलगाववाद की पुकार दम तोड़ चुकी है। असली मुद्दा अर्थव्यवस्था का है,” चिदंबरम ने कहा।
यह बयान राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ रहा है। भाजपा ने कांग्रेस पर फिर से पुराने घाव कुरेदने का आरोप लगाया। भाजपा नेता संबित पात्रा ने ट्वीट किया, “चिदंबरम का बयान कांग्रेस की दोहरी चाल उजागर करता है। वे ब्लू स्टार को गलती मानते हैं, लेकिन सिख दंगों पर चुप्पी साधे रहते हैं।” वहीं, शिरोमणि अकाली दल ने चिदंबरम की बात का स्वागत किया, लेकिन कहा कि कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए। अकाली दल नेता सुखबिंदर सिंह सुक्खी ने कहा, “यह स्वीकारोक्ति देर आई, लेकिन सही है। सिख समुदाय को न्याय मिलना चाहिए।”
कांग्रेस ने चिदंबरम के बयान को ऐतिहासिक संदर्भ में रखा। पार्टी प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा, “यह बयान सच्चाई का आईना है। कांग्रेस हमेशा से गलतियों से सीखती आई है।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान पंजाब चुनावों से पहले सिख वोट बैंक को लक्षित कर सकता है। चिदंबरम का यह बयान 1984 के दर्द को फिर से जिंदा कर रहा है, जो आज भी सिख समुदाय के लिए संवेदनशील मुद्दा है। क्या यह कांग्रेस की पुनर्विचार की शुरुआत है? समय ही बताएगा।
