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नोबेल शांति पुरस्कार: राजनीति को प्राथमिकता, डोनाल्ड ट्रंप को न मिलने पर अमेरिका की पहली प्रतिक्रिया–MAGA का गुस्सा, ‘रैंडम वुमन’ का तंज

नोबेल शांति पुरस्कार: राजनीति को प्राथमिकता, डोनाल्ड ट्रंप को न मिलने पर अमेरिका की पहली प्रतिक्रिया – MAGA का गुस्सा, ‘रैंडम वुमन’ का तंज

नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी की घोषणा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लंबे समय से चले आ रहे नोबेल शांति पुरस्कार के सपनों पर पानी फेर दिया। वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को यह सम्मान मिलने के बाद अमेरिका की पहली प्रतिक्रिया राजनीतिक गुस्से और निराशा से भरी रही। MAGA (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) समर्थकों ने तुरंत सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया, विजेता को “कुछ रैंडम व्यक्ति जो कोई जानता भी नहीं” करार देते हुए ट्रंप की उम्मीदों पर सवाल उठाए। व्हाइट हाउस से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन ट्रंप के करीबी सर्कल में यह झटका साफ महसूस हुआ, जहां गाजा युद्धविराम और अन्य डिप्लोमेसी प्रयासों को नोबेल का दावा माना जा रहा था।

ट्रंप ने घोषणा से ठीक पहले ओवल ऑफिस में रिपोर्टर्स से कहा था, “मैंने जो हासिल किया है, वो कोई नहीं कर सका।” लेकिन कमेटी ने साफ कर दिया कि नामांकन की समयसीमा फरवरी में बंद हो चुकी थी, और ट्रंप के अधिकांश ‘उपलब्धियां’ उसके बाद की हैं। नॉर्वे में तो राजनीतिक हलकों में ट्रंप की प्रतिक्रिया का अंदेशा जताया जा रहा था, जहां कहा गया कि “ट्रंप को स्वतंत्रता का सम्मान समझाना मुश्किल है।” यह पुरस्कार ट्रंप की नोबेल लॉबिंग को राजनीति का रंग देता है, जबकि मचाडो को “लोकतंत्र की लौ जलाए रखने” के लिए चुना गया।

अमेरिका की पहली प्रतिक्रियाएं: गुस्सा और तंज

– MAGA का सोशल मीडिया तूफान: घोषणा के तुरंत बाद X (पूर्व ट्विटर) पर ट्रंप समर्थकों ने मचाडो को “रैंडम वुमन” कहा, जो “कहीं छिपी हुई” हैं। एक प्रमुख MAGA अकाउंट ने लिखा, “ट्रंप ने शांति लाई, लेकिन नोबेल ने राजनीति चुनी।” न्यूजवीक के अनुसार, यह गुस्सा ट्रंप की गाजा डील के बाद की उम्मीदों से उपजा।

– व्हाइट हाउस की चुप्पी: व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी ने कहा, “राष्ट्रपति का फोकस अमेरिकी हितों पर है, पुरस्कारों पर नहीं।” लेकिन बैकग्राउंड में सलाहकारों ने इसे “नॉर्वे की राजनीति” बताया।

– ट्रंप का अप्रत्यक्ष तंज: ट्रंप ने तुरंत कोई पोस्ट नहीं किया, लेकिन उनके करीबी ने ट्रुथ सोशल पर कहा, “ट्रंप को ओबामा जैसा पुरस्कार 10 सेकंड में मिल जाता, लेकिन कमेटी ने इंतजार कर लिया।” (ट्रंप ने पहले ओबामा के 2009 पुरस्कार पर तंज कसा था।)

मचाडो को पुरस्कार: लोकतंत्र की जीत

नोबेल कमेटी ने मचाडो को वेनेजुएला में “तानाशाही से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण संक्रमण” के लिए चुना। कमेटी चेयरमैन जॉरगेन वाटने फ्राइडनेस ने कहा, “मचाडो ने नागरिक साहस की मिसाल कायम की।” मचाडो, जो निकोलस मादुरो के खिलाफ भूमिगत जीवन जी रही हैं, ने वीडियो में भावुक होकर कहा, “यह वेनेजुएला के लोगों की जीत है।” 2024 चुनाव में उन्हें उम्मीदवारी से रोका गया था, लेकिन उन्होंने लाखों को सड़कों पर उतारा।

ट्रंप की लॉबिंग: शांति से ज्यादा राजनीति?

ट्रंप ने महीनों से नोबेल का दावा किया, जिसमें इजरायल-हमास युद्धविराम और यूक्रेन डील शामिल हैं। इजरायल के पीएम नेतन्याहू और पाकिस्तान ने नामांकन किया, लेकिन समयसीमा के बाद। विशेषज्ञों ने कहा कि ट्रंप का “बॉम्बास्टिक” अंदाज नोबेल की ‘सहयोग’ वाली भावना से मेल नहीं खाता। PBS के अनुसार, “ट्रंप क्लाइमेट चेंज को नकारते हैं, जो नोबेल के लिए बड़ा माइनस है।”

अमेरिका में डेमोक्रेट्स ने इसे “ट्रंप की अहंकारी राजनीति का अंत” कहा, जबकि रिपब्लिकन्स ने चुप्पी साधी। नोबेल पुरस्कार 10 दिसंबर को ओस्लो में दिया जाएगा। यह घटना अमेरिकी विदेश नीति को नई बहस दे रही है – क्या शांति पुरस्कार राजनीति का शिकार हो गया?

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