करवा चौथ 2025: आज है व्रत, भूलकर भी न करें ये गलतियां
करवा चौथ 2025: आज है व्रत, भूलकर भी न करें ये गलतियां
करवा चौथ का पवित्र व्रत आज, 10 अक्टूबर को देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखती हैं। इस साल चांद निकलने का समय रात 8:05 बजे (दिल्ली) के आसपास है, और व्रत का पारण रात 8:30 बजे के बाद होगा। ज्योतिषियों के अनुसार, इस बार करवा चौथ का व्रत विशेष शुभ है, क्योंकि चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। हालांकि, व्रत के दौरान कुछ गलतियां आपकी पूजा को प्रभावित कर सकती हैं। जानिए वो 6 गलतियां, जो भूलकर भी नहीं करनी चाहिए:
1. सुबह जल्दी न उठना: करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से शुरू होता है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त (4:30-5:30 AM) में उठकर स्नान और सरगी ग्रहण करना जरूरी है। देर से उठने से व्रत का पुण्य प्रभाव कम हो सकता है।
2. काले या सफेद कपड़े पहनना: इस दिन लाल, पीले, हरे जैसे शुभ रंगों के कपड़े पहनें। काले या सफेद कपड़े अशुभ माने जाते हैं और व्रत के फल को कमजोर कर सकते हैं।
3. नमक का सेवन: सरगी में नमक से बनी चीजें खाने से बचें। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नमक व्रत की शुद्धता को प्रभावित करता है। मीठी चीजें जैसे खीर या फल खाएं।
4. पूजा में लापरवाही: चंद्र दर्शन और करवा माता की पूजा में सही विधि-विधान जरूरी है। चांद को अर्घ्य देने के लिए छलनी का उपयोग करें और पति के पैर छूकर आशीर्वाद लें। गलत पूजा से व्रत अधूरा माना जाता है।
5. नकारात्मक विचार: व्रत के दौरान मन को शांत और सकारात्मक रखें। पति या परिवार के साथ वाद-विवाद से बचें। क्रोध या नकारात्मकता व्रत के उद्देश्य को कमजोर करती है।
6. चंद्र दर्शन से पहले पारण: चांद देखे बिना व्रत तोड़ना सबसे बड़ी गलती है। इससे व्रत का फल नष्ट हो सकता है। चंद्र दर्शन के बाद ही पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोलें।
ज्योतिषी पंडित रमेश शर्मा के अनुसार, “करवा चौथ का व्रत निष्ठा और श्रद्धा का प्रतीक है। छोटी-सी गलती से बचने के लिए नियमों का पालन करें और पूजा में मन लगाएं।” देशभर में महिलाएं आज सुबह से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना कर रही हैं, और बाजारों में मेहंदी, सजावट और पूजा सामग्री की रौनक है। दिल्ली, मुंबई, लखनऊ जैसे शहरों में चांद देखने के लिए विशेष आयोजन किए गए हैं।
नोट: चांद निकलने का समय आपके शहर के हिसाब से अलग हो सकता है। स्थानीय पंचांग देखें और व्रत का पारण सही समय पर करें।
