IPS पूरन कुमार सुसाइड केस: DGP सहित 13 अफसरों पर FIR, नोट में जातिगत उत्पीड़न के गंभीर आरोप
हरियाणा कैडर के वरिष्ठ IPS अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या के मामले में नया मोड़ आ गया है। चंडीगढ़ पुलिस ने उनकी पत्नी आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार की शिकायत पर हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर समेत 13 अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सुसाइड नोट में कुमार ने जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और प्रशासनिक साजिश के गंभीर आरोप लगाए थे, जो अब जांच का केंद्र बिंदु बन गए हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने भी मामले का संज्ञान लिया है और सात दिनों में एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है।
पूरन कुमार (52 वर्ष), 2001 बैच के IPS अधिकारी, ने 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित अपने आवास में सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली थी। घटनास्थल से मिले 8-9 पेज के “फाइनल नोट” में उन्होंने 13 अधिकारियों (10 IPS और 3-4 IAS, कुछ रिटायर्ड) के नाम लिए, जिनमें डीजीपी कपूर, रोहतक एसपी नरेंद्र बिजरनिया, पूर्व डीजीपी और अन्य सीनियर अफसर शामिल हैं। नोट में उन्होंने 2020 से चली आ रही जातिगत भेदभाव, पोस्टिंग में पक्षपात, ACR में अनियमितताएं, आधिकारिक आवास से वंचित रखना, अनावश्यक नोटिस और झूठे केसों के जरिए उत्पीड़न का जिक्र किया।
सुसाइड नोट की मुख्य बातें
– जातिगत भेदभाव: कुमार ने दावा किया कि एससी अधिकारी होने के कारण उन्हें प्रमोशन में देरी, इंक्रीमेंट कटौती और “दंडात्मक पोस्टिंग” का शिकार बनाया गया। उन्होंने 1991-2005 बैच के अधिकारियों की कथित अनियमित प्रमोशन का आरोप लगाया।
– उत्पीड़न की घटनाएं: अगस्त 2020 में शाहजादपुर थाने पर “अनावश्यक नोटिस” से शुरू हुई परेशानी, अप्रैल 2024 में डायल-112 प्रोजेक्ट में भेदभावपूर्ण वाहन आवंटन, नवंबर 2023 में आधिकारिक वाहन छीनना। एक पूर्व एसीएस ने उनकी अर्जेंट लीव रिजेक्ट की, जिससे पिता के अंतिम दर्शन तक न हो सके।
– हालिया साजिश: 6 अक्टूबर को रोहतक के अर्बन एस्टेट थाने में उनके गनमैन सुशील कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार की एफआईआर (नंबर 0319/2025) दर्ज हुई, जिसमें कुमार को फंसाने की कोशिश बताई गई। कुमार ने नोट में डीजीपी कपूर पर बिजरनिया को उकसाने का आरोप लगाया।
– वसीयत: नोट के साथ वसीयत भी थी, जिसमें सारी संपत्ति पत्नी को सौंपी गई। उन्होंने अफसरों के खिलाफ एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग की।
अमनीत कुमार, जो जापान में आधिकारिक यात्रा पर थीं, ने 8 अक्टूबर को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 थाने में चार पेज की शिकायत दर्ज कराई। इसमें उन्होंने बीएनएस की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर की मांग की। उन्होंने कहा, “मेरा पति अखंड ईमानदारी और सार्वजनिक सेवा का प्रतीक था। डीजीपी कपूर के इशारे पर झूठी एफआईआर दर्ज कर साजिश रची गई, जिससे वह टूट गए।” उन्होंने सीएम नायब सिंह सैनी को भी पत्र लिखा, जिसमें सभी नामित अफसरों की निलंबन, गिरफ्तारी और परिवार को सुरक्षा की मांग की।
पुलिस और आयोग की कार्रवाई
चंडीगढ़ पुलिस ने अमनीत की शिकायत पर डीजीपी कपूर, एसपी बिजरनिया समेत 13 के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, लेकिन अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई। डीजीपी सागर प्रीत हुड्डा ने जांच जारी रहने की पुष्टि की। रोहतक एसपी बिजरनिया ने सफाई दी, “एफआईआर में कुमार का नाम नहीं था, सबूत मजबूत हैं।” एनसीएससी ने चंडीगढ़ के चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी को नोटिस जारी किया, जिसमें आरोपी, एफआईआर डिटेल्स, गिरफ्तारी और मुआवजे की जानकारी मांगी। आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत जांच शुरू की है।
कुमार के सहकर्मी उन्हें ईमानदार और सुधारवादी अधिकारी बताते हैं, जिन्होंने जातिगत भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। यह मामला हरियाणा पुलिस में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और पक्षपात पर सवाल खड़े कर रहा है। अमनीत ने पोस्टमॉर्टम में देरी की, ताकि सभी आरोपी पर कार्रवाई हो। विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीआई जांच की मांग तेज हो सकती है।
