‘यह SIR नहीं, पिछले दरवाजे से NRC’: बिहार चुनाव से पहले EC और केंद्र पर ममता बनर्जी का तीखा हमला
‘यह SIR नहीं, पिछले दरवाजे से NRC’: बिहार चुनाव से पहले EC और केंद्र पर ममता बनर्जी का तीखा हमला
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिहार में चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को “पिछले दरवाजे से NRC लागू करने की साजिश” करार देते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग (EC) पर तीखा हमला बोला है। बुधवार को झाड़ग्राम में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, “यह SIR नहीं, बल्कि NRC का नया रूप है। आयोग बीजेपी का एजेंट बन गया है, जो मुसलमानों और प्रवासी वोटरों के नाम काटने की कोशिश कर रहा है।” यह बयान बिहार चुनाव 2025 से ठीक पहले आया है, जब EC ने SIR को सभी राज्यों में लागू करने का ऐलान किया है। ममता ने इसे “लोकतंत्र पर हमला” बताते हुए सभी दलों से विरोध करने की अपील की।
ममता का हमला: SIR को NRC से जोड़ा
ममता बनर्जी ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग बिना राजनीतिक दलों से चर्चा किए एकतरफा फैसले ले रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया गरीबों, मुसलमानों और बंगाली भाषी प्रवासियों को निशाना बना रही है। “चुनाव आयोग को लगता है कि चुनी हुई सरकारें और दल उनके बंधुआ मजदूर हैं। वे बीजेपी के इशारों पर नाच रहे हैं। बंगाल को बिहार समझने की कोशिश मत करो,” ममता ने कहा।
उन्होंने EC को चेतावनी दी: “आयोग BJP का लॉलीपॉप मत बनिए। सिर्फ आधार कार्ड को पहचान पत्र मानना गलत है—वोटर आईडी को भी शामिल किया जाना चाहिए।” ममता ने आरोप लगाया कि केंद्र त्योहारों के दौरान यह प्रक्रिया चला रहा है ताकि विरोध न हो। बिहार में SIR से 3.66 लाख नाम कटने का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “यह NRC से भी खतरनाक है। बंगाल में इसे लागू नहीं होने देंगे।”
पृष्ठभूमि: बिहार SIR विवाद
EC ने जून 2025 में बिहार में SIR की घोषणा की, जो मतदाता सूची को अपडेट करने का दावा करती है। लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह डुप्लीकेट और अयोग्य नाम हटाने के बहाने अल्पसंख्यकों को बाहर करने की साजिश है। बिहार में 65 लाख नाम कटे, जिनमें 23 लाख महिलाएं और मुस्लिम बहुल इलाके शामिल। ममता ने इसे “बैकडोर NRC” बताया, जो असम मॉडल की तरह पूरे देश में फैल सकता है।
EC ने सभी राज्यों में SIR की तैयारी शुरू करने का निर्देश दिया है, लेकिन बंगाल में TMC ने विरोध जताया। ममता ने कहा, “EC ने बंगाल को दो पत्र भेजे, लेकिन हम इसे लागू नहीं होने देंगे।”
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
– BJP का पलटवार: BJP नेता अमित मालवीय ने कहा, “ममता जी NRC से डरती हैं क्योंकि उनके वोटर ‘घुसपैठिए’ हैं। EC पारदर्शिता ला रहा है।”
– सपा का समर्थन: अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, “ममता दीदी सही कह रही हैं। SIR से लोकतंत्र खतरे में है।”
– कांग्रेस: पार्टी ने EC से बातचीत की मांग की, लेकिन ममता के साथ खुलकर खड़े नहीं हुए।
विशेषज्ञों का कहना है कि ममता का यह हमला बंगाल 2026 चुनाव से पहले मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने की रणनीति है। लेकिन EC ने इसे “तकनीकी प्रक्रिया” बताते हुए खारिज किया।
