योगी आदित्यनाथ का तीखा प्रहार: ‘भारतीय संस्कृति का अपमान करने वालों को कभी धर्मनिरपेक्ष कहा जाता था’
योगी आदित्यनाथ का तीखा प्रहार: ‘भारतीय संस्कृति का अपमान करने वालों को कभी धर्मनिरपेक्ष कहा जाता था’
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को ‘विकृत धर्मनिरपेक्षता’ पर सीधी चोट की। झांसी में विद्या भारती उत्कृष्ट विद्यालयों के वार्षिक अधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद कुछ लोगों ने धर्मनिरपेक्षता के अर्थ को तोड़-मरोड़ दिया, और भारतीय परंपराओं, संस्कृति और मूल्यों का मजाक उड़ाने वालों को ही “सच्चे धर्मनिरपेक्ष” का तमगा दे दिया। योगी ने इसे देश में अलगाववाद और अतिवाद फैलाने वाली मानसिकता बताया, जो आजादी के बाद की सबसे बड़ी भूल है।
योगी का पूरा बयान
झांसी के सर्किट हाउस में आयोजित कार्यक्रम में योगी ने कहा, “स्वतंत्रता के बाद कुछ लोगों ने धर्मनिरपेक्षता के अर्थ को विकृत कर दिया। उन्होंने भारतीय परंपराओं का अपमान करने वालों को ही ‘सच्चा धर्मनिरपेक्ष’ कहा। यह मानसिकता देश में अलगाववाद और अतिवाद को जन्म देती है। आज हम कहते हैं कि भारतीय संस्कृति का अपमान करने वालों को कभी धर्मनिरपेक्ष कहा जाता था।” उन्होंने विद्या भारती की 25,000 से अधिक शाखाओं की सराहना की, जो 1947 के बाद सरकार की नाकामी को पूरा करने वाली संस्था है। योगी ने कहा कि यह संस्था भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा देती है, जो पीढ़ियों को प्रेरित करती है।
कार्यक्रम में योगी ने बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “झांसी और ओझा की धरती भगवान राम की भक्ति के लिए जानी जाती है। यह वही भूमि है जहां से संत तुलसीदास हुए। रानी लक्ष्मीबाई ने 1858 में अंग्रेजों से लड़कर शहादत दी, और झांसी के ध्यानचंद ने हॉकी में भारत को गौरवान्वित किया।” उन्होंने विद्या भारती को “भारतीय संस्कृति का रखवाला” बताते हुए कहा कि यह संस्था सरस्वती शिशु मंदिर (1952 में गोरखपुर से शुरू) ने सरकार की कमी पूरी की।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और प्रतिक्रिया
यह बयान ऐसे समय आया है जब यूपी में धार्मिक टिप्पणियों पर विवाद बढ़ रहा है। योगी ने हाल ही में महर्षि वाल्मीकि जयंती पर कहा था कि “भगवान राम का अपमान करने वाले वाल्मीकि का भी अपमान करते हैं।” विपक्ष ने योगी के बयान को “सांप्रदायिक ध्रुवीकरण” का हथियार बताया। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा, “धर्मनिरपेक्षता संविधान की आत्मा है, इसे विकृत करने का प्रयास देश को बांटेगा।” AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया, “योगी जी की ‘विकृत धर्मनिरपेक्षता’ मुसलमानों को निशाना बनाने का बहाना है।”
BJP ने योगी के बयान का समर्थन किया। प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा, “योगी जी ने सच्चाई कही। विकृत धर्मनिरपेक्षता ने भारतीय संस्कृति को कमजोर किया, अब हम इसे मजबूत कर रहे हैं।” विद्या भारती के महामंत्री राम कृष्ण रावत ने कहा, “यह संस्था 25,000 केंद्रों से लाखों बच्चों को भारतीय मूल्यों की शिक्षा दे रही है।”
सांस्कृतिक संदर्भ
योगी ने बुंदेलखंड को “राम भक्ति की भूमि” बताते हुए तुलसीदास, रानी लक्ष्मीबाई और ध्यानचंद का जिक्र किया। कार्यक्रम में रामायण पाठ, सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजन हुए। यूपी सरकार ने वाल्मीकि जयंती पर राज्यव्यापी आयोजन किया, जिसमें सभी वाल्मीकि मंदिरों पर कार्यक्रम हुए।
यह बयान 2027 यूपी चुनाव से पहले सपा-BSP के मुस्लिम वोट बैंक पर BJP की रणनीति को मजबूत करने का प्रयास लगता है। विशेषज्ञों का कहना है कि योगी का यह रुख “सांस्कृतिक राष्ट्रवाद” को बढ़ावा दे रहा है।
