अखिलेश-आजम मुलाकात के बाद नेताओं के बयान: ‘आजम सपा की नींव, हम एकजुट हैं’ – अखिलेश; ‘अखिलेश का अधिकार मुझ पर, लेकिन परिवार से शिकायत’ – आजम
अखिलेश-आजम मुलाकात के बाद नेताओं के बयान: ‘आजम सपा की नींव, हम एकजुट हैं’ – अखिलेश; ‘अखिलेश का अधिकार मुझ पर, लेकिन परिवार से शिकायत’ – आजम
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और वरिष्ठ नेता आजम खान की रामपुर में 23 महीने बाद हुई मुलाकात ने उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है। बुधवार को जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में करीब एक घंटे की अकेले में मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने बयान दिए, जो पार्टी की एकजुटता को दर्शाते हैं, लेकिन आजम की बातों में नाराजगी के सुर भी झलके। यह मुलाकात सपा के लिए 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति और मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
अखिलेश यादव का बयान
लखनऊ लौटते समय अखिलेश ने बरेली में मीडिया से कहा:
“आजम खान जी समाजवादी पार्टी की नींव हैं। वे हमारे अभिभावक हैं, और उनकी सलाह हमेशा पार्टी के हित में होती है। जेल में बिताए 23 महीनों ने उन्हें और मजबूत बनाया है। यह मुलाकात हमारी एकजुटता का प्रतीक है। हम 2027 में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और मजबूत करेंगे। आजम जी का अनुभव और रोहिलखंड में उनका प्रभाव हमें नई ताकत देगा। समाजवादी लोग कभी हार नहीं मानते।”
अखिलेश ने यह भी जोड़ा कि “पार्टी में कोई मतभेद नहीं है। हम सब मिलकर यूपी में सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।”
आजम खान का बयान
मुलाकात के बाद आजम खान ने अपने निवास पर पत्रकारों से बात की, लेकिन उनके बयान में सपा नेतृत्व के प्रति हल्की नाराजगी झलकी। उन्होंने कहा:
“अखिलेश का मुझ पर अधिकार है, वे मेरे नेता हैं। मुलायम सिंह जी ने मुझे जिम्मेदारी दी थी, और मैं समाजवादी हूं, सपा के साथ ही रहूंगा। लेकिन परिवार की बातें कमरे में होती हैं। जेल में 23 महीने तक मेरी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला को परेशान किया गया। ईद पर मेरी पत्नी अकेली रो रही थीं, किसी ने फोन तक नहीं किया। मैंने अखिलेश से सिर्फ यही कहा कि परिवार को भी देखा जाए।”
आजम ने BSP में शामिल होने की अफवाहों को खारिज करते हुए कहा, “हम बिकाऊ नहीं हैं। चरित्र और वफादारी ही हमारी पहचान है। सपा हमारा घर है, और हम इसे मजबूत करेंगे।”
बयानों के मायने
– अखिलेश का जोर: अखिलेश ने आजम को “अभिभावक” और “नींव” बताकर उनकी नाराजगी को शांत करने की कोशिश की। यह 2027 में रोहिलखंड के मुस्लिम वोटों को एकजुट रखने की रणनीति है, खासकर मायावती की 9 अक्टूबर की रैली से पहले।
– आजम की नाराजगी: आजम ने सपा के साथ वफादारी जताई, लेकिन जेल के दौरान पार्टी नेतृत्व की चुप्पी पर दुख जाहिर किया। उनकी शर्त (अकेले में मुलाकात) और बयान से साफ है कि वे चाहते हैं कि परिवार को भी तवज्जो मिले।
– सियासी प्रभाव: यह बयान सपा की एकता का संदेश देता है, लेकिन आजम की नाराजगी से आंतरिक खींचतान की आशंका बनी हुई है। BJP ने इसे “नौटंकी” बताया, जबकि BSP ने सपा पर “मुस्लिम वोटों की सियासत” का आरोप लगाया।
