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बच्चों के लिए कफ सिरप चुनते समय सावधानी: हर खांसी की दवा एक जैसी नहीं! इन 5 बातों का रखें ध्यान

बच्चों के लिए कफ सिरप चुनते समय सावधानी: हर खांसी की दवा एक जैसी नहीं! इन 5 बातों का रखें ध्यान

मध्य प्रदेश और राजस्थान में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और माता-पिता सतर्क हो गए हैं। बच्चों को खांसी-जुकाम होने पर कफ सिरप देना आम बात है, लेकिन हर दवा हर बच्चे के लिए सुरक्षित नहीं होती। हाल की घटनाओं, जैसे छिंदवाड़ा और बैतूल में 16 बच्चों की किडनी फेलियर से मौत, ने दवा की गुणवत्ता और सही इस्तेमाल पर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के लिए कफ सिरप चुनते समय सावधानी बरतना जरूरी है। यहां 5 महत्वपूर्ण बातें हैं, जिन्हें ध्यान में रखना चाहिए ताकि बच्चे सुरक्षित रहें।

1. डॉक्टर की सलाह के बिना कफ सिरप न दें

– क्यों जरूरी: हर खांसी का कारण अलग होता है—वायरल, बैक्टीरियल, एलर्जी या अस्थमा। बिना जांच के सिरप देना खतरनाक हो सकता है। मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ सिरप की मिलावट (डायएथिलीन ग्लाइकॉल) से बच्चों की किडनी डैमेज हुई।

– क्या करें: बाल रोग विशेषज्ञ (पेडियाट्रिशियन) से परामर्श लें। सही डोज और सिरप की अवधि (3-5 दिन) का पालन करें। बिना प्रिस्क्रिप्शन के केमिस्ट से दवा न लें।

2. सिरप की सामग्री (Ingredients) चेक करें

– क्यों जरूरी: कुछ सिरप में डेक्सट्रोमेथोरफैन, कोडीन या अल्कोहल होता है, जो बच्चों के लिए हानिकारक है। 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ये प्रतिबंधित हैं। मिलावटी सिरप में जहरीले रसायन (DEG/EG) हो सकते हैं।

– क्या करें: लेबल पर एक्टिव इंग्रेडिएंट्स और एक्सपायरी डेट चेक करें। CDSCO द्वारा अप्रूव्ड ब्रांड्स जैसे Crocin DS, Benadryl (बच्चों के लिए) या होमियोपैथिक सिरप चुनें। संदिग्ध सिरप (जैसे कोल्ड्रिफ) से बचें।

3. उम्र के हिसाब से सही डोज और सिरप चुनें

– क्यों जरूरी: 2 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप देना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि उनके फेफड़े और किडनी पूरी तरह विकसित नहीं होते। गलत डोज से साइड इफेक्ट्स जैसे उल्टी, चक्कर या बेहोशी हो सकती है।

– क्या करें: 2-6 साल के बच्चों के लिए पेडियाट्रिक सिरप (जैसे Tixylix) और 6-12 साल के लिए जूनियर सिरप चुनें। ड्रॉपर या मेजरिंग कप से सटीक डोज दें। सामान्य डोज: 2.5-5ml, दिन में 2-3 बार (डॉक्टर के निर्देशानुसार)।

4. साइड इफेक्ट्स पर नजर रखें

– क्यों जरूरी: कुछ सिरप से नींद, पेट खराब, एलर्जी या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। मध्य प्रदेश के मामलों में बच्चों को उल्टी और कमजोरी के बाद किडनी फेलियर हुआ।

– क्या करें: सिरप देने के बाद बच्चे को 24-48 घंटे मॉनिटर करें। अगर उल्टी, दस्त, सुस्ती या सांस की तकलीफ दिखे, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। आपातकाल में 104 (हेल्थ हेल्पलाइन) पर कॉल करें।

5. गुणवत्ता और स्टोरेज पर ध्यान दें

– क्यों जरूरी: मिलावटी या एक्सपायर्ड सिरप जानलेवा हो सकते हैं। अनुचित स्टोरेज से दवा की प्रभावशीलता कम हो सकती है। बैतूल मामले में सिरप की खराब गुणवत्ता सामने आई।

– क्या करें: विश्वसनीय मेडिकल स्टोर से खरीदें। CDSCO की वेबसाइट पर बैन/सस्पेंडेड दवाओं की लिस्ट चेक करें। सिरप को ठंडी, सूखी जगह (25°C से कम) पर रखें। खुलने के बाद 30 दिन में इस्तेमाल करें।

अतिरिक्त सलाह:

– वैकल्पिक उपाय: खांसी-जुकाम में शहद (1 साल से ऊपर के बच्चों के लिए), भाप, या गुनगुना पानी दें। ये प्राकृतिक उपाय सुरक्षित हैं।

– अलर्ट रहें: CERT-In ने हाल ही में नकली दवाओं के ऑनलाइन घोटालों की चेतावनी दी है। Flipkart/Amazon जैसे प्लेटफॉर्म्स से दवाएं न खरीदें।

– जागरूकता: मध्य प्रदेश में 16 मौतों के बाद सरकार ने कोल्ड्रिफ और नेक्स्ट्रो-डीएस पर बैन लगाया। ऐसी दवाओं से बचें।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की जान बचाने के लिए माता-पिता को जागरूक होना होगा। “हर खांसी की दवा एक जैसी नहीं होती। बिना डॉक्टर की सलाह और सिरप की जांच के उसे देना जोखिम भरा है।”

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