पौड़ी जिला अस्पताल में मोबाइल टॉर्च की रोशनी में इलाज: बिजली गुल, जनरेटर फेल; स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल, विपक्ष का सरकार पर हमला
पौड़ी जिला अस्पताल में मोबाइल टॉर्च की रोशनी में इलाज: बिजली गुल, जनरेटर फेल; स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल, विपक्ष का सरकार पर हमला
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली एक बार फिर उजागर हुई है। शुक्रवार रात बिजली गुल होने के बाद डॉक्टरों को मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज करना पड़ा। यह घटना एक वायरल वीडियो के जरिए सामने आई, जिसमें इमरजेंसी वार्ड में अंधेरे में टॉर्च की रोशनी से मरीजों का उपचार होता दिख रहा है। इस लापरवाही ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
घटना शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे की है, जब पौड़ी शहर में ग्रिड फेल होने से बिजली आपूर्ति एक घंटे तक बाधित रही। जिला अस्पताल, जो पौड़ी शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, में जनरेटर होने के बावजूद इसे शुरू नहीं किया जा सका। कारण बताया गया कि जनरेटर में डीजल की कमी थी और तकनीकी खराबी भी सामने आई। इस दौरान इमरजेंसी में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वीडियो में डॉक्टर मोबाइल की फ्लैशलाइट में घायलों की ड्रेसिंग और इंजेक्शन लगाते दिखे।
स्थानीय निवासी और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, गढ़वाल विश्वविद्यालय, ऋत्विक असवाल ने कहा, “मैं अपनी बीमार बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंचा, लेकिन बिजली न होने से हालात भयावह थे। डॉक्टर टॉर्च की रोशनी में इलाज कर रहे थे। यह शर्मनाक है।” अस्पताल में प्रतिदिन 500 से अधिक मरीज आते हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी से मरीजों को जोखिम उठाना पड़ रहा है।
यह पहली घटना नहीं है। 12 जनवरी 2025 को देहलचौरी मोटर मार्ग पर हुए बस हादसे के दौरान भी बिजली बाधित होने से घायलों का इलाज टॉर्च की रोशनी में हुआ था। उस समय तत्कालीन सीएमओ को बाध्य प्रतीक्षा में रखा गया था। पौड़ी के एसडीओ (विद्युत वितरण खंड) गोविंद सिंह रावत ने स्वीकार किया, “जनरेटर संचालन की शिकायतें पहले भी मिली हैं। डीजल और रखरखाव में लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी। जिला प्रशासन को पत्र भेजा जाएगा।”
अस्पताल के प्रभारी पीएमएस डॉ. सुनील शर्मा ने सफाई दी, “बिजली बाधित होने पर जनरेटर संचालन के निर्देश थे, लेकिन तकनीकी खामी से देरी हुई। दोषी कार्मिकों को चेतावनी दी गई है।” वहीं, सीएमओ डॉ. शिव मोहन शुक्ला ने कहा, “पिछले महीने निर्देश दिए गए थे। अब दोबारा शिकायत पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। असंतोषजनक जवाब पर कार्रवाई होगी।”
विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला। पौड़ी युवा कांग्रेस अध्यक्ष मोहित सिंह और एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव अंकित सुंदरियाल ने कहा, “स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत पौड़ी से हैं, फिर भी जिला अस्पताल का यह हाल है। सरकार के ‘आयुष्मान भारत’ के दावे खोखले हैं।” उन्होंने तत्काल जांच और सुधार की मांग की। स्थानीय लोगों ने भी अस्पताल में सोलर बैकअप और नियमित जनरेटर मेंटेनेंस की मांग उठाई।
यह अस्पताल 1 जनवरी 2025 से सरकारी नियंत्रण में वापस आया था, पहले इसे PPP मोड में चलाया जा रहा था। वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग पूछ रहे हैं, “यदि जिला अस्पताल का यह हाल है, तो दूरस्थ क्षेत्रों की स्थिति क्या होगी?” यह घटना उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की तत्काल जरूरत को रेखांकित करती है।
