इंटरनेट बैन से खिड़कियां तक प्रतिबंधित: अफगानिस्तान में तालिबान के वो डरावने कानून जो महिलाओं की जिंदगी को कैद कर रहे हैं
इंटरनेट बैन से खिड़कियां तक प्रतिबंधित: अफगानिस्तान में तालिबान के वो डरावने कानून जो महिलाओं की जिंदगी को कैद कर रहे हैं
अफगानिस्तान में तालिबान शासन के तीन साल पूरे होने के बाद महिलाओं पर पाबंदियां और सख्त हो गई हैं। 2021 में सत्ता हासिल करने के बाद से तालिबान ने महिलाओं की शिक्षा, नौकरी, आवाज और यहां तक कि इंटरनेट तक छीन लिया है। हाल ही में उत्तरी प्रांतों में लगाए गए इंटरनेट बैन ने महिलाओं की आखिरी उम्मीद को भी कुचल दिया है, जबकि खिड़कियों को ब्लॉक करने का फरमान महिलाओं को घर की चारदीवारी में और कैद कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी संस्थाओं ने इसे ‘जेंडर अपार्थीड’ करार दिया है, जो महिलाओं के खिलाफ व्यवस्थित अपराध है। आइए जानते हैं इन डरावने कानूनों की सच्चाई, जो अफगान महिलाओं की जिंदगी को नर्क बना रहे हैं।
इंटरनेट बैन: महिलाओं की आखिरी उम्मीद पर लात
15 सितंबर 2025 को तालिबान नेता हिबातुल्लाह अखुंदजादा ने फाइबर-ऑप्टिक इंटरनेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया, जो उत्तरी अफगानिस्तान के 5 प्रमुख प्रांतों – कुंडुज, बदख्शां, बाघलान, तखार और बल्ख – में लागू हो गया। बाद में यह 15 प्रांतों तक फैल गया, जिससे देशभर में इंटरनेट कनेक्टिविटी 14% तक गिर गई। तालिबान का दावा है कि यह ‘अनैतिकता’ रोकने के लिए है, लेकिन विशेषज्ञ इसे महिलाओं और असहमति को दबाने का हथियार मानते हैं।
महिलाओं के लिए इंटरनेट शिक्षा, नौकरी और संपर्क का एकमात्र साधन था। तालिबान ने लड़कियों को 12 साल से ऊपर की पढ़ाई पर रोक लगा दी है, लेकिन ऑनलाइन क्लासेस से वे सीख पा रही थीं। अब यह भी बंद। एक छात्रा ने बीबीसी को बताया, “हम न्यूज और स्किल्स सीखते थे, लेकिन अब घर में बैठे कुछ नहीं कर पा रही।”ऑनलाइन इंटरप्रेटर के रूप में काम करने वाली मरियम जैसी महिलाएं परिवार का पेट पालने से वंचित हो गई हैं। कढ़ाई और हस्तशिल्प बेचने वाली महिलाओं के ऑर्डर रुक गए हैं, क्योंकि मोबाइल डेटा तीन गुना महंगा है।
यह बैन 2024 के 296 वैश्विक इंटरनेट शटडाउन का हिस्सा है, लेकिन अफगानिस्तान में यह महिलाओं के अधिकारों पर सीधा हमला है। ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा, “यह प्रतिरोध के आखिरी स्पेस को खत्म कर रहा है।”
खिड़कियां भी हराम: घर की चारदीवारी में कैद
दिसंबर 2024 में तालिबान ने एक और डरावना फरमान जारी किया: नए घरों में ऐसी खिड़कियां न लगें जो महिलाओं को बाहर से दिखा सकें। रसोई, आंगन या कुएं के पास की खिड़कियों को ‘मानव-ऊंचाई’ की दीवारों से ब्लॉक करना होगा।
तालिबान का तर्क: “महिलाओं को किचन में काम करते देखना या पानी भरते देखना ‘प्रलोभन’ पैदा कर सकता है।” पुरानी खिड़कियों को भी बंद करने का आदेश है। यह कानून महिलाओं को पूरी तरह से अदृश्य बनाने की कोशिश है, जैसे वे कोई वस्तु हों।
अन्य डरावने प्रतिबंध: शिक्षा से लेकर आवाज तक
– शिक्षा पर ताला: अफगानिस्तान दुनिया का इकलौता देश है जहां लड़कियां माध्यमिक और उच्च शिक्षा से वंचित हैं। “दिसंबर 2024 में मेडिकल स्कूलों से भी महिलाओं को निकाल दिया गया, भले ही वे नर्स या मिडवाइफ बन रही थीं।विश्वविद्यालयों से महिलाओं की किताबें हटा दी गईं।
– नौकरी पर रोक: अधिकांश नौकरियां महिलाओं के लिए बंद। एनजीओ में महिलाओं को रखने वाले संगठनों के लाइसेंस रद्द।
– आवाज और चेहरा छिपाओ: अगस्त 2024 के ‘वर्च्यू एंड वाइस लॉ’ के तहत महिलाएं घर से बाहर चेहरा न दिखाएं, आवाज न उठाएं। टीवी पर महिला एंकरों पर रोक। जो उल्लंघन करे, उसे सजा – कोड़े मारना या पत्थरबाजी। 2024 में 180 से ज्यादा महिलाओं को व्यभिचार के आरोप में कोड़े लगाए गए।
– यात्रा और मीडिया पर पाबंदी: बिना महरम (पुरुष रिश्तेदार) के यात्रा निषेध। पत्रकार महिलाएं फोटो या वीडियो न लें. लाइव प्रसारण पर रोक।
महिलाओं का दर्द: आंकड़े जो रुला दें
2024 में 23.7 मिलियन अफगानिस्तानियों को मानवीय सहायता की जरूरत पड़ी, जिनमें से ज्यादातर महिलाएं हैं।12.4 मिलियन भुखमरी का शिकार। तालिबान ने महिलाओं को ‘पश्चिमी एजेंडे’ का शिकार बताया है, लेकिन यूएन की रोझा ओतुंबायेवा ने कहा, “यह असहनीय प्रतिबंध अफगानिस्तान के भविष्य को डरावना बना रहे हैं।”जनवरी 2025 में आईसीसी ने तालिबान नेताओं के खिलाफ जेंडर उत्पीड़न के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
क्या है रास्ता?
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी ने तालिबान को बुलबुलाया है। पूर्व सांसद शुकria बरकजई ने कहा, “यह न सिर्फ महिलाओं, बल्कि पूरी मानवता पर हमला है।” विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक दबाव और डिप्लोमेसी से ही बदलाव संभव है। लेकिन फिलहाल, अफगान महिलाएं बुरqa के पीछे छिपी, इंतजार कर रही हैं – एक ऐसी आजादी की, जो कभी उनकी थी। यह कहानी सिर्फ अफगानिस्तान की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है।
