संसद की 24 स्थायी समितियों का गठन: शशि थरूर बरकरार, BJP को 11 की कमान, कांग्रेस को 4 समितियां
संसद की 24 स्थायी समितियों का गठन: शशि थरूर बरकरार, BJP को 11 की कमान, कांग्रेस को 4 समितियां
लोकसभा सचिवालय ने संसद की 24 विभागीय स्थायी समितियों का गठन कर दिया है। इन समितियां विभिन्न मंत्रालयों के कार्यों की गहन जांच और निगरानी करती हैं। भाजपा को कुल 11 समितियों की अध्यक्षता मिली है, जबकि विपक्षी दलों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर को विदेश मामलों की समिति का अध्यक्ष बरकरार रखा गया है, जो उनकी विशेषज्ञता को मान्यता देता है। कांग्रेस को कुल 4 समितियों की कमान सौंपी गई है। यह गठन संसदीय कार्यों को सुचारू बनाने और विधेयकों की गहन समीक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है।
BJP को सबसे ज्यादा हिस्सा: 11 समितियों की कमान
भाजपा, जो सत्तारूढ़ दल है, को 24 में से 11 समितियों की अध्यक्षता मिली है। यह वितरण लोकसभा में दल की सीटों के अनुपात पर आधारित है। प्रमुख समितियों में शामिल हैं:
– वित्त समिति: भर्तृहरि महताब (भाजपा)
– गृह मामलों की समिति: राधा मोहन दास अग्रवाल (भाजपा)
– रक्षा समिति: राधा मोहन सिंह (भाजपा)
– अन्य समितियां: ऊर्जा, कोयला, स्टील; खान; श्रम; पेट्रोलियम; आदि।
एनडीए के सहयोगी दलों को भी 4 समितियों की जिम्मेदारी दी गई है, जैसे जेडीयू, टीडीपी, एनसीपी (अजित पवार गुट) और शिवसेना (शिंदे गुट) को एक-एक।
शशि थरूर बरकरार: विदेश मामलों की कमान
कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर को विदेश मामलों की स्थायी समिति (External Affairs) का अध्यक्ष बनाए रखा गया है। वे पिछले कार्यकाल में भी इस पद पर थे और उनकी विदेश नीति पर गहरी समझ के कारण यह फैसला लिया गया। थरूर ने इसे “संसदीय लोकतंत्र की जीत” बताते हुए कहा कि वे भारत की वैश्विक छवि मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
कांग्रेस के हिस्से में 4 समितियां: विपक्ष को मजबूत भूमिका
कांग्रेस को कुल 4 समितियों की अध्यक्षता मिली है, जो विपक्ष के रूप में उनकी भूमिका को मजबूत करती है। इनमें शामिल हैं:
– विदेश मामलों की समिति: शशि थरूर
– महिला, बाल विकास, शिक्षा, युवा एवं खेल मामलों की समिति: दिग्विजय सिंह
– स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति: रामगोपाल यादव (समाजवादी पार्टी के साथ साझा, लेकिन कांग्रेस के प्रभाव में)
– अन्य: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन समिति (कांग्रेस प्रतिनिधि)।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को रक्षा समिति का सदस्य बनाया गया है, जहां वे सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे। कांग्रेस नेताओं ने इसे “संतुलित वितरण” बताया, हालांकि कुछ ने और समितियों की मांग की।
अन्य दलों को भी हिस्सा
– तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी): 2 समितियां (ममता बनर्जी के दल को महत्वपूर्ण विभाग)
– द्रविड़ मुनेत्र कढ़गम (डीएमके): 2 समितियां
– समाजवादी पार्टी (सपा): 1 समिति (स्वास्थ्य समिति में रामगोपाल यादव)
– कुल मिलाकर, विपक्षी दलों को 9 समितियों की कमान सौंपी गई है।
कार्यकाल पर चर्चा: दो साल का प्रस्ताव
गठन के साथ ही संसदीय समितियों के कार्यकाल को एक साल से बढ़ाकर दो साल करने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। सांसदों का मानना है कि इससे जांच कार्यों में निरंतरता आएगी और विधेयकों की बेहतर समीक्षा संभव होगी। अगर यह लागू होता है, तो शशि थरूर जैसे सदस्यों को लंबी अवधि तक जिम्मेदारी निभाने का मौका मिलेगा।
महत्व और प्रभाव
ये स्थायी समितियां संसद के “लघु रूप” के रूप में कार्य करती हैं और मंत्रालयों के बजट, नीतियों एवं विधेयकों पर सिफारिशें देती हैं। उनका गठन लोकसभा में दलों के अनुपात पर आधारित होता है। इस बार का वितरण NDA की मजबूत स्थिति को दर्शाता है, लेकिन विपक्ष को पर्याप्त स्थान देकर संतुलन बनाए रखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे संसदीय कार्यवाही अधिक प्रभावी होगी, खासकर आगामी सत्रों में।
यह गठन 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद पहली बार हुआ है और संसद के शीतकालीन सत्र से पहले महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सभी की नजरें अब इन समितियों की पहली बैठकों पर टिकी हैं।
