कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की अटकलों ने फिर पकड़ा जोर: डीके शिवकुमार के समर्थन में विधायक, सिद्धारमैया बोले- ‘पांच साल पूरा करूंगा’
कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की अटकलों ने फिर पकड़ा जोर: डीके शिवकुमार के समर्थन में विधायक, सिद्धारमैया बोले- ‘पांच साल पूरा करूंगा’
कर्नाटक की सियासत में सत्ता परिवर्तन को लेकर एक बार फिर हलचल मच गई है। कुनिगल से कांग्रेस विधायक एच डी रंगनाथ ने बुधवार को अपने राजनीतिक गुरु और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देखने की इच्छा जाहिर की। इस बयान ने पहले से चल रही अटकलों को और हवा दे दी। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इन चर्चाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। कांग्रेस हाईकमान ने पहले ही नेताओं को ऐसी बयानबाजी से बचने की चेतावनी दी है, लेकिन विधायकों के बयान थमने का नाम नहीं ले रहे।
रंगनाथ का दावा: ‘शिवकुमार की मेहनत से मिली 140 सीटें’
कुनिगल विधायक एच डी रंगनाथ, जो डीके शिवकुमार के रिश्तेदार भी हैं, ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए बयान में कहा, “मेरे राजनीतिक गुरु डीके शिवकुमार हैं। उन्होंने सामाजिक सेवा, प्रशासनिक दक्षता और विकास कार्यों में अपनी योग्यता साबित की है। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 224 में से 140 सीटें उनकी मेहनत से मिलीं। हर नेता यह बात कह रहा है। हाईकमान को उनकी इस भूमिका को मान्यता देनी चाहिए और उन्हें उचित सम्मान व स्थान देना चाहिए।”
रंगनाथ ने आगे कहा, “शिवकुमार सुबह 8 बजे से रात 3 बजे तक मेहनत करते हैं। उनके पास भगवान का आशीर्वाद, हाईकमान का भरोसा और जनता का प्यार है। मुझे विश्वास है कि वह एक दिन जरूर मुख्यमंत्री बनेंगे।” हालांकि, जब उनसे समयसीमा पूछी गई तो उन्होंने कहा, “मैं इतना बड़ा नहीं कि भविष्यवाणी कर सकूं। यह फैसला हाईकमान का है।”
रंगनाथ ने मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की भी तारीफ की और कहा कि उनकी पांच गारंटी योजनाएं देश भर के लिए मॉडल बन गई हैं। फिर भी, उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य में शिवकुमार कर्नाटक की कमान संभालेंगे।
पूर्व सांसद का दावा: ‘नवंबर में हो सकता है बदलाव’
पूर्व मांड्या सांसद एल आर शिवरामे गौड़ा ने भी शिवकुमार के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने कहा, “शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने को लेकर कोई संदेह नहीं है। नवंबर में सत्ता परिवर्तन की संभावना है, लेकिन अंतिम फैसला हाईकमान का होगा।” यह बयान सिद्धारमैया के ढाई साल के कार्यकाल के नवंबर में पूरे होने की पृष्ठभूमि में आया है, जिससे ‘रोटेशनल सीएम फॉर्मूला’ की चर्चा फिर तेज हो गई है।
सिद्धारमैया का जवाब: ‘मैं अगले ढाई साल भी सीएम रहूंगा’
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “लोग कहते हैं कि नवंबर में ढाई साल पूरे हो जाएंगे। मैं स्पष्ट कर दूं कि हाईकमान का जो भी फैसला होगा, हम उसका पालन करेंगे। लेकिन मुझे उम्मीद है कि अगले साल मैसूर दशहरा पर भी मैं फूल चढ़ाऊंगा। मैंने ढाई साल पूरे कर लिए हैं और अगले ढाई साल तक सत्ता में बना रहूंगा।”
सिद्धारमैया ने 11 जुलाई को भी यही रुख दोहराया था, जब उन्होंने कहा था, “मैं पांच साल का कार्यकाल पूरा करूंगा। इसमें कोई शक नहीं।” उन्होंने विपक्ष पर अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया और दावा किया कि उनकी सरकार स्थिर है।
कांग्रेस की चेतावनी, फिर भी नहीं थम रही बयानबाजी
कांग्रेस हाईकमान ने पहले ही नेताओं और कार्यकर्ताओं को सत्ता परिवर्तन पर सार्वजनिक बयान देने से मना किया है। कई नेताओं को इस तरह की टिप्पणियों के लिए कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं। जून में रामानगरा विधायक एचए इकबाल हुसैन को इसी तरह का नोटिस मिला था, जब उन्होंने रोटेशनल फॉर्मूले का दावा किया था। कर्नाटक कांग्रेस प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने जुलाई में विधायकों से एक-एक कर मुलाकात की थी और ऐसी बयानबाजी पर रोक लगाने की हिदायत दी थी।
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी इन चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा, “हमारा ध्यान सरकार को मजबूत करने पर है। सिद्धारमैया के नेतृत्व में हम एकजुट हैं।” उन्होंने विधायकों को चेतावनी दी कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विपक्ष का तंज: ‘कांग्रेस में सत्ता की भूख’
विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस की अंदरूनी कलह पर तंज कसा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा, “कांग्रेस में सत्ता की भूख साफ दिख रही है। एक तरफ सिद्धारमैया कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं, दूसरी तरफ शिवकुमार समर्थक खुलेआम बयान दे रहे हैं। यह सरकार जनता की नहीं, कमीशन की सरकार है।” भाजपा नेताओं ने सिद्धारमैया से इस्तीफे की मांग भी की है।
सियासी ड्रामा कब थमेगा?
कर्नाटक में 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद से ही सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता को लेकर तनातनी की खबरें आ रही हैं। उस समय हाईकमान ने सिद्धारमैया को सीएम और शिवकुमार को डिप्टी सीएम बनाकर मामले को शांत किया था। लेकिन ढाई साल बाद अब शिवकुमार समर्थकों की बेचैनी फिर उभर आई है। कुछ विधायकों का दावा है कि हाईकमान ने ‘ढाई-ढाई साल’ का फॉर्मूला तय किया था, हालांकि सिद्धारमैया और हाईकमान ने इसकी पुष्टि कभी नहीं की।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर हाईकमान ने जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं की, तो यह आंतरिक कलह 2028 के चुनावों से पहले कांग्रेस को भारी पड़ सकती है। फिलहाल, कर्नाटक की सियासत में यह ड्रामा जारी है, और सभी की नजरें हाईकमान के अगले कदम पर टिकी हैं।
