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Gen Z’ फायरिंग केस: नेपाल के पूर्व PM देउबा का पासपोर्ट रद्द, ओली सहित 5 नेताओं के काठमांडू छोड़ने पर रोक

Gen Z’ फायरिंग केस: नेपाल के पूर्व PM देउबा का पासपोर्ट रद्द, ओली सहित 5 नेताओं के काठमांडू छोड़ने पर रोक

नेपाल में ‘जन-जेड’ (Gen Z) आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और फायरिंग के मामले में जांच आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा का पासपोर्ट रद्द कर दिया है। इसके अलावा, पूर्व PM केपी शर्मा ओली सहित 5 प्रमुख नेताओं के पासपोर्ट निलंबित कर दिए गए हैं। आयोग ने पुलिस और खुफिया विभाग को इन नेताओं पर निगरानी रखने और काठमांडू छोड़ने से रोकने का सख्त निर्देश जारी किया है। यह कार्रवाई आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग से 19-20 युवाओं की मौत और सैकड़ों घायलों के मामले में की गई है। Gen Z प्रदर्शनकारियों ने इसे ‘क्रांतिकारी न्याय’ का नाम दिया है, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है।

जन-जेड’ फायरिंग का काला अध्याय: सोशल मीडिया बैन से भड़का आग्नेयास्त्रों का खेल  

सितंबर 2025 में नेपाल सरकार द्वारा 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर आदि) पर बैन लगाने के बाद Gen Z युवाओं ने भारी विरोध प्रदर्शन शुरू किया। काठमांडू, पोखरा, इटहरी और अन्य शहरों में हजारों छात्र सड़कों पर उतरे, जो भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता के खिलाफ थे। प्रदर्शन हिंसक हो गए—प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, PM हाउस, नेपाली कांग्रेस मुख्यालय और नेताओं के घरों में आग लगा दी।

9 सितंबर को काठमांडू में पुलिस ने लाइव गोलियां चलाईं, जिसमें 19 युवा मारे गए और 300 से अधिक घायल हुए। चश्मदीदों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने संसद की दीवारें फांदीं, तो पुलिस ने आंसू गैस, वॉटर कैनन और गोलियां चलाईं। एक 20 वर्षीय प्रदर्शनकारी रोहन अंशारी ने कहा, “मेरे दोस्त को पुलिस ने गोली मार दी। यह Gen Z की जीत है, लेकिन खून की कीमत चुकानी पड़ी।”

बैन हटाने के बावजूद आंदोलन जारी रहा, जिससे PM केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। सेना ने कर्फ्यू लगाया और शहरों में गश्त शुरू की।

आयोग की कार्रवाई: पासपोर्ट रद्द, यात्रा प्रतिबंध और निगरानी  

जांच आयोग (जो आंदोलन के बाद गठित किया गया) ने 27 सितंबर को आदेश जारी किया:  

– शेर बहादुर देउबा: पासपोर्ट रद्द, क्योंकि उनके घर पर हमले के दौरान सुरक्षा चूक का आरोप। देउबा और उनकी पत्नी (विदेश मंत्री अरुजू राणा देउबा) पर हमला हुआ, घर में आग लगाई गई।

– केपी शर्मा ओली सहित 5 नेता: पासपोर्ट निलंबित। ओली के घर को आग लगाई गई, और फायरिंग के आदेश देने का आरोप। अन्य नेता: पुष्प कमल दहाल (प्रचंड), झलनाथ खनाल, बिश्नु प्रसाद पौडेल (वित्त मंत्री) और प्रिथ्वी सुभ्बा गुरुंग (संचार मंत्री)।

आयोग ने पुलिस और खुफिया विभाग को इन नेताओं पर 24×7 निगरानी रखने और काठमांडू से बाहर जाने पर रोक लगाने का निर्देश दिया। आयोग प्रमुख ने कहा, “यह हिंसा में शामिल नेताओं पर लगाम कसने के लिए है। CBI जैसी निष्पक्ष जांच होगी।”

प्रभाव: राजनीतिक उथल-पुथल, Gen Z की नई मांगें  

ओली के इस्तीफे के बाद सेना ने अंतरिम सरकार का जिम्मा संभाला। Gen Z ने डिस्कॉर्ड पर वर्चुअल मीटिंग की और पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशिला कार्की को अंतरिम PM बनाने का प्रस्ताव रखा। प्रदर्शनकारियों ने कहा, “हमारी क्रांति को हाईजैक न किया जाए। स्वतंत्र, भ्रष्टाचार-मुक्त सरकार चाहिए।” विपक्षी दलों ने ‘क्रूर दमन’ की निंदा की और ओली की गिरफ्तारी की मांग की।

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