शेयर बाजार में भगदड़ मचाने वाली गिरावट: मिनटों में 4 लाख करोड़ का नुकसान, निवेशक स्तब्ध!
शेयर बाजार में भगदड़ मचाने वाली गिरावट: मिनटों में 4 लाख करोड़ का नुकसान, निवेशक स्तब्ध!
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को अचानक भारी गिरावट ने निवेशकों को हिलाकर रख दिया। बीएसई सेंसेक्स 556 अंकों की छलांग के साथ 81,160 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 166 अंकों की गिरावट के साथ 24,891 पर आ गया। बाजार पूंजीकरण में 4 लाख करोड़ रुपये का झटका लगा—24 सितंबर को यह 461.34 लाख करोड़ था, जो आज घटकर 457.35 लाख करोड़ रह गया। फार्मा, ऑटो और बैंकिंग सेक्टरों में सबसे ज्यादा बिकवाली हुई, जिससे छोटे-बड़े निवेशक परेशान हैं। एक्सपर्ट्स इसे वैश्विक संकेतों और घरेलू कमजोरियों का नतीजा बता रहे हैं।
गिरावट का आंकड़ा: कौन-कौन से इंडेक्स हुए प्रभावित?
– सेंसेक्स: 555.95 अंकों (-0.68%) की गिरावट के साथ 81,159.68 पर बंद। दिन में 750 अंकों से ज्यादा का उतार-चढ़ाव देखा गया।
– निफ्टी: 166 अंकों (-0.66%) की गिरावट के साथ 24,890.85 पर। निफ्टी बैंक में 145 अंकों का झटका।
– मिडकैप और स्मॉलकैप: बीएसई मिडकैप 330 अंकों (-1.2%) और स्मॉलकैप 400 अंकों (-1.5%) गिरे।
– सेक्टरल हिट: फार्मा सेक्टर में 2% से ज्यादा की गिरावट, ऑटो में 1.5% और मेटल्स में 1.8% का नुकसान। आईटी में हल्की रिकवरी दिखी।
निवेशकों का कुल नुकसान 4 लाख करोड़ से ऊपर पहुंच गया, जो मिनटों में हुआ। बाजार दोपहर के बाद यू-टर्न लेते हुए लोअर सर्किट की ओर बढ़ा, जिससे पैनिक सेलिंग शुरू हो गई।
गिरावट के 6 प्रमुख कारण: वैश्विक तूफान से घरेलू दबाव तक
एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह गिरावट कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फैक्टर्स का मिला-जुला असर है। मुख्य कारण:
1. विदेशी निवेशकों की बिकवाली: सितंबर में अब तक FPI ने 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की। अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी की चिंताओं से FII निकासी तेज हो गई।
2. कमजोर क्वार्टरली रिजल्ट्स: कंपनियों के Q2 नतीजे उम्मीदों से नीचे रहे। फार्मा और ऑटो कंपनियों के प्रॉफिट में कमी ने बाजार को झकझोरा।
3. वैश्विक संकेत: अमेरिकी बाजारों में टेक सेक्टर की गिरावट और यूरोपीय इंडेक्सों का दबाव भारतीय बाजार पर असर डाल रहा। जापान और चीन के बाजार भी लाल निशान पर।
4. हाई वैल्यूएशन: बाजार का P/E रेशियो ऊंचा होने से सुधार के लिए करेक्शन जरूरी था। मिडकैप और स्मॉलकैप ओवरवैल्यूड थे।
5. एक्सपायरी का दबाव: मासिक डेरिवेटिव एक्सपायरी से वोलेटिलिटी बढ़ी, जिसने बिकवाली को हवा दी।
6. महंगाई और ब्याज दरें: RBI की सख्त नीति और बढ़ती महंगाई ने निवेशकों का भरोसा कम किया।
बाजार विश्लेषक ने कहा, “यह एक हेल्दी करेक्शन है, लेकिन अगर FPI निकासी रुकी तो रिकवरी जल्द संभव।”
सबसे ज्यादा प्रभावित शेयर: ये स्टॉक्स हुए धूल चाटने वाले
– बजाज ऑटो: 12% से ज्यादा की गिरावट, कंपनी के रिजल्ट्स निराश करने वाले।
– सन फार्मा: 4% नीचे, सेक्टर की कमजोरी का शिकार।
– HDFC बैंक: 2.5% गिरा, बैंकिंग सेक्टर में लीडर।
– रिलायंस इंडस्ट्रीज: 1.8% की छूट, एक्सपायरी का असर।
– टाटा स्टील: मेटल्स में 3% का नुकसान।
NSE के 2,800 से ज्यादा शेयरों में से 1,800 गिरावट पर बंद हुए, जबकि सिर्फ 900 में तेजी रही।
निवेशकों के लिए सलाह: क्या करें, क्या न करें?
– शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स: पैनिक सेलिंग से बचें, स्टॉप-लॉस सेट करें।
– लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स: डिप में खरीदारी का मौका, ब्लू-चिप स्टॉक्स पर फोकस।
– एक्सपर्ट टिप: RBI की अगली पॉलिसी मीटिंग पर नजर रखें। अगर FPI फ्लो पॉजिटिव हुआ तो 82,000 का स्तर टूट सकता है।
यह गिरावट बाजार को रियलिस्टिक लेवल पर ला रही है, लेकिन सतर्कता जरूरी। कल के सत्र पर नजरें टिकी हैं—क्या रिकवरी होगी या और गिरावट? अपडेट्स के लिए बने रहें।
