वायनाड कांग्रेस में हलचल: डीसीसी अध्यक्ष एन.डी. अप्पाचन ने दिया इस्तीफा, प्रियंका गांधी दौरे के बाद आया फैसला
वायनाड कांग्रेस में हलचल: डीसीसी अध्यक्ष एन.डी. अप्पाचन ने दिया इस्तीफा, प्रियंका गांधी दौरे के बाद आया फैसला
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के दबाव में वायनाड जिला कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) के अध्यक्ष एन.डी. अप्पाचन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह फैसला पार्टी के आंतरिक कलह, हालिया विवादों और प्रियंका गांधी वाड्रा के वायनाड दौरे के दौरान हुई घटनाओं के बाद आया है। केपीसीसी अध्यक्ष सुनी जोसेफ ने इस्तीफे की पुष्टि की है, जो अब ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) को भेजा जाएगा। अप्पाचन की जगह टी.जे. इसाक को अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि नया अध्यक्ष जल्द ही घोषित होने की उम्मीद है।
इस्तीफे के पीछे की वजहें: प्रियंका दौरे पर विवाद और आंतरिक कलह
अप्पाचन का इस्तीफा प्रियंका गांधी के हालिया वायनाड दौरे के बाद आया, जहां डीसीसी को उनके कार्यक्रमों की जानकारी नहीं दी गई थी। अप्पाचन ने इस पर असंतोष जताया था, जो पार्टी नेतृत्व को नागवार गुजरा। दौरे के दौरान दो वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं की आत्महत्या और एक पूर्व नेता की बहू का आत्महत्या प्रयास जैसी घटनाओं ने वायनाड इकाई को बदनाम किया। पूर्व कोषाध्यक्ष एन.एम. विजयन की सुसाइड नोट में अप्पाचन का नाम आने से विवाद और गहरा गया।
अप्पाचन ने कहा, “मैं लंबे समय से इस्तीफा देने को तैयार था। मेरा कार्यकाल खत्म हो चुका था, और दूसरा दौर मुझे थोपा गया।” उन्होंने प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद अपनी वफादारी दोहराई, लेकिन पार्टी हाईकमान ने वायनाड इकाई को स्थिर करने के लिए यह कदम उठाया।
एआईसीसी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और सुनी जोसेफ ने हाल ही में जिला नेताओं से चर्चा की थी, जिसमें संगठनात्मक सुधार पर जोर दिया गया।
वायनाड कांग्रेस की पृष्ठभूमि: राहुल से प्रियंका तक की विरासत, लेकिन कलह का शिकार
वायनाड राहुल गांधी का पूर्व निर्वाचन क्षेत्र है, जो अब प्रियंका गांधी के पास है। पार्टी यहां स्थानीय निकाय चुनावों से पहले एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रही है। हाल के महीनों में गुटबाजी ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया, जिसमें के. थंकचन की गिरफ्तारी (जो बाद में फर्जी निकली) और अन्य विवाद शामिल हैं।
अप्पाचन, जो 1991 में पहली बार डीसीसी अध्यक्ष चुने गए थे और 2021 में दोबारा नियुक्त हुए, ने कहा कि वे आखिरी सांस तक पार्टी के प्रति समर्पित रहेंगे।
प्रतिक्रियाएं: पार्टी में राहत, लेकिन चुनौतियां बरकरार
केपीसीसी ने इसे “संगठनात्मक पुनर्गठन” का हिस्सा बताया, जो पूरे केरल में डीसीसी अध्यक्षों के बदलाव का हिस्सा है।
विपक्षी दल सीपीआई(एम) ने इसे “कांग्रेस की आंतरिक कमजोरी” करार दिया। सोशल मीडिया पर वायनाड कांग्रेस कार्यकर्ता दो फाड़ हैं—कुछ अप्पाचन के समर्थन में, तो कुछ बदलाव की सराहना कर रहे हैं।
यह इस्तीफा वायनाड में कांग्रेस की एकजुटता बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन गुटबाजी की जड़ें गहरी हैं। नया अध्यक्ष कौन बनेगा, इस पर नजरें टिकी हैं। क्या यह प्रियंका गांधी के लिए राहत बनेगा? आने वाले दिनों में साफ होगा।
