यूपी में पोस्टर वॉर: ‘आई लव मोहम्मद’ के जवाब में ‘आई लव महादेव’ अभियान, कानपुर से काशी तक तनाव चरम पर
यूपी में पोस्टर वॉर: ‘आई लव मोहम्मद’ के जवाब में ‘आई लव महादेव’ अभियान, कानपुर से काशी तक तनाव चरम पर
उत्तर प्रदेश में धार्मिक भावनाओं का इंद्रधनुषी प्रदर्शन अब पोस्टर वॉर में बदल गया है। कानपुर में ‘आई लव मोहम्मद’ के पोस्टर्स को लेकर शुरू हुआ विवाद अब वाराणसी तक फैल चुका है, जहां हिंदू संतों ने ‘आई लव महादेव’ के बैनर्स और नारों से जवाब दिया है। यह अभियान साम्प्रदायिक शांति को चुनौती दे रहा है, और पुलिस को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। सोशल मीडिया पर #ILoveMuhammad और #ILoveMahadev हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जबकि राजनीतिक दल इसे ‘भड़काऊ’ बता रहे हैं।
विवाद की शुरुआत: कानपुर में ‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टर्स पर बवाल
सारा मामला कानपुर के बेकनगंज इलाके से शुरू हुआ, जहां ईद-मिलाद-उन-नबी के जुलूस के दौरान ‘आई लव मोहम्मद’ के लाइट बोर्ड लगाए गए। स्थानीय हिंदू संगठनों ने इसे ‘नई परंपरा’ बताते हुए विरोध किया, दावा किया कि यह राम नवमी जैसे हिंदू उत्सवों वाली सड़क पर उकसावे का काम है। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि यह पैगंबर मुहम्मद के प्रति भक्ति का निर्दोष अभिव्यक्ति है।
विवाद तब भड़का जब हिंदू युवकों पर मुस्लिम पोस्टर्स फाड़ने का आरोप लगा, तो मुस्लिम पक्ष ने पलटवार किया। कानपुर पुलिस ने ‘आई लव मोहम्मद’ लगाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, जिसके बाद मुस्लिम समुदाय ने पूरे यूपी में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। लखनऊ, बरेली और कानपुर में महिलाओं समेत हजारों ने सड़कों पर उतरकर नारे लगाए। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर कहा, “मोहम्मद से प्यार जताना अपराध नहीं है, यह संविधान के अनुच्छेद 25 की रक्षा है।”
काउंटर-अभियान: वाराणसी में ‘आई लव महादेव’ का शंखनाद
‘आई लव मोहम्मद’ के खिलाफ हिंदू संगठनों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। वाराणसी में जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती के नेतृत्व में संतों ने मंगलवार को शहर भर में मार्च निकाला। प्लेकार्ड्स पर ‘आई लव महादेव’ लिखा था, जो भगवान शिव को समर्पित था। संतों ने इसे “देश को भक्ति के नाम पर बर्बाद करने की साजिश” बताया। उज्जैन और दिल्ली में भी ‘आई लव महादेव’ के पोस्टर्स लगे, जबकि मुंबई के गरबा पंडालों में युवतियां ‘आई लव महादेव’ बैनर्स लेकर पहुंचीं।
सोशल मीडिया पर यह ‘लव बैटल’ डिजिटल हो गया—हिंदू यूजर्स ‘आई लव राम’, ‘आई लव हनुमान’ और ‘आई लव गणेश’ पोस्ट कर रहे हैं, तो मुस्लिम पक्ष ‘आई लव मोहम्मद’ की तस्वीरें शेयर कर रहा। एक मजेदार ट्विस्ट में ‘आई लव रसगुल्ला’ ट्रेंड शुरू हो गया, जो तनाव को कम करने की कोशिश लगता है।
अन्य राज्यों में फैला विवाद: मुंबई से बिहार तक प्रदर्शन
यह आग यूपी से बाहर भी फैल चुकी है। मुंबई के मालवणी जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में क्लेरिक्स ने पुलिस स्टेशन जाकर कानपुर की एफआईआर का विरोध दर्ज कराया। हिंदू संगठनों ने मुंबई में ‘आई लव महादेव’ रैलियां घोषित कीं। उत्तराखंड, तेलंगाना और बिहार के किशनगंज में भी प्रदर्शन हुए। दिल्ली के नॉर्थ-ईस्ट में ‘आई लव मोहम्मद’ कार्यक्रम को पुलिस ने रोका, आयोजक हिरासत में हैं।
पुलिस ने कानपुर और वाराणसी में भारी फोर्स तैनात की है। यूपी डीजीपी ने कहा, “शांति बनाए रखें, उकसावे वाले पोस्टर्स हटाए जाएंगे।” लेकिन दोनों पक्ष एक-दूसरे पर पोस्टर्स फाड़ने का आरोप लगा रहे हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विपक्ष का हमला, सत्ताधारी की चुप्पी
विपक्ष ने यूपी सरकार पर ‘सांप्रदायिकता’ का आरोप लगाया। समाजवादी पार्टी के नेता ने कहा, “मुस्लिम भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा रही है।” बीजेपी ने इसे ‘कुछ असामाजिक तत्वों की साजिश’ बताया, लेकिन कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद आने वाले त्योहारों पर असर डाल सकता है।
यह पोस्टर वॉर धार्मिक अभिव्यक्ति की सीमाओं को परख रहा है। क्या यह शांति से खत्म होगा या और भड़केगा? प्रशासन की सतर्कता पर नजरें टिकी हैं।
