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नवरात्रि व्रत में कुट्टू का आटा बन सकता है खतरा: डॉक्टर्स ने बताई जरूरी सावधानियां

नवरात्रि के व्रत के दौरान हर घर में कुट्टू का आटा (बकवीट फ्लोर) खाने की धूम मच जाती है। पूड़ी, पकौड़े, पराठे और खिचड़ी जैसी डिशेज से लोग अपना फलाहार पूरा करते हैं। लेकिन हाल के दिनों में कई जगहों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि यह पौष्टिक आटा जहर बन रहा है। दिल्ली के नॉर्थ-वेस्ट इलाके में मंगलवार को ही 200 से ज्यादा लोग कुट्टू के आटे से बनी चीजें खाने के बाद उल्टी, पेट दर्द और बेचैनी की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे। इसी तरह, मथुरा-आगरा में जनमाष्टमी पर 250 से अधिक लोग फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए, जबकि मेरठ में 160 लोगों की तबीयत बिगड़ चुकी है। डॉक्टर्स का कहना है कि कुट्टू का आटा व्रत में फायदेमंद है, लेकिन गलत स्टोरेज, मिलावट या ज्यादा मात्रा में सेवन से यह जहरीला हो सकता है। आइए जानें क्या है वजह और कैसे बचें।

कुट्टू का आटा क्यों बन जाता है जहरीला?

कुट्टू का आटा असल में एक फल (बकवीट) से बनता है, न कि अनाज से, इसलिए व्रत में इसे खाने की परंपरा है। लेकिन इसमें मौजूद नेचुरल तेल जल्दी ऑक्सीडाइज हो जाते हैं, जिससे इसकी शेल्फ लाइफ कम होती है। अगर आटा नम, बासी या फंगस लग चुका हो, तो बैक्टीरिया फैल जाते हैं, जो फूड पॉइजनिंग का कारण बनते हैं।

मिलावट (जैसे गेहूं का आटा मिलाना) भी आम समस्या है। डॉ. ए.पी. सिंह (यशोदा सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल) बताते हैं, “कुट्टू में फाइबर और फॉस्फोरस ज्यादा होता है। गलत तरीके से पकाने या ज्यादा खाने से पाचन तंत्र बिगड़ जाता है, जिससे गैस, अपच, पेट दर्द या किडनी पर दबाव पड़ सकता है।”

विशेषज्ञों के अनुसार, नमी वाली जगह पर रखने से फंगस (एफ्लाटॉक्सिन) पैदा हो जाता है, जो लीवर को नुकसान पहुंचा सकता है।

डॉक्टर्स की सलाह: ये सावधानियां बरतें, व्रत रहें सुरक्षित

डॉक्टर्स और न्यूट्रिशनिस्ट्स ने व्रत रखने वालों के लिए कुछ जरूरी टिप्स दिए हैं। इन्हें फॉलो करें तो कुट्टू का आटा जहर की बजाय सेहतमंद बनेगा:

ताजा और पैकेज्ड आटा खरीदें: हमेशा सील पैक और एक्सपायरी डेट चेक करें। खुला या बासी आटा न लें, क्योंकि इसमें फंगस लगने का खतरा ज्यादा होता है।

व्यापारियों का कहना है कि नमी से बचाने के लिए सूखी जगह पर रखें।

घर पर शुद्धता टेस्ट करें: थोड़ा आटा पानी में डालें। अगर यह तुरंत गीला हो जाए या गंध आए, तो खराब है। सुबह खाली पेट 20 ग्राम खाकर देखें – अगर पेट में भारीपन हो, तो न खाएं।

मात्रा का ध्यान रखें: व्रत में 50-100 ग्राम से ज्यादा न खाएं। ज्यादा फाइबर से पेट की समस्या हो सकती है। इसे अच्छे से पकाएं – कच्चा न खाएं।

डॉक्टर्स कहते हैं, महीने में 5-6 बार ही इस्तेमाल करें।

– एलर्जी वालों के लिए: अगर दाने, सूजन या सांस की तकलीफ हो, तो बंद करें। किडनी पेशेंट्स डॉक्टर से पूछें, क्योंकि फॉस्फोरस ज्यादा है।

स्टोरेज टिप्स: एयरटाइट कंटेनर में ठंडी, सूखी जगह पर रखें। नमी से बचाएं, वरना ऑक्सीडेशन हो जाता है।

खाने के बाद ज्यादा पानी पिएं, ताकि पाचन सुधरे।

विशेषज्ञों का कहना है कि कुट्टू प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स से भरपूर है, जो एनर्जी देता है। लेकिन सावधानी से इस्तेमाल करें। अगर कोई लक्षण दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

 

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