यूपी के 127 राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग ने भेजा नोटिस, तीन तक मांगा जवाब, जानें वजह
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने उत्तर प्रदेश की 127 राजनीतिक पार्टियों पर सख्ती बरती है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने इन सभी दलों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर 3 अक्टूबर तक जवाब मांगा है। मामला वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए ऑडिटेड वित्तीय विवरण और चुनाव खर्च की जानकारी समय पर जमा न करने का है। ECI का यह कदम राजनीतिक पार्टियों में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा एक्शन है, जो राष्ट्रीय स्तर पर 359 गैर-अनुपालन वाली पार्टियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई का हिस्सा है।
मुख्य चुनाव अधिकारी पवन कुमार ने बताया, “ये 127 पार्टियां रजिस्टर्ड अनरेकग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टीज (RUPPs) हैं। इन्हें तीन लगातार वित्तीय वर्षों (2021-22 से 2023-24) के लिए वार्षिक ऑडिटेड अकाउंट्स और चुनावी खर्च के विवरण जमा करने थे, लेकिन ऐसा नहीं किया।” नोटिस में चेतावनी दी गई है कि जवाब न मिलने पर इन पार्टियों का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। ECI ने अगस्त से अब तक 808 पार्टियों को डीलिस्ट कर चुका है, जिनमें से कई यूपी की ही थीं। तमिलनाडु (39) और दिल्ली (41) के बाद यूपी में सबसे ज्यादा नोटिस जारी हुए हैं।
यह कार्रवाई लोकसभा चुनाव 2024 के बाद तेज हुई है, जब ECI ने पार्टियों से खर्च के स्रोत और व्यय की सटीक जानकारी मांगी थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “कई पार्टियां चुनाव लड़ती हैं लेकिन खर्च छिपाती हैं, जो काले धन को बढ़ावा देता है।” यूपी में ये पार्टियां ज्यादातर स्थानीय स्तर की हैं, जो विधानसभा चुनावों में सक्रिय रहती हैं। एक पार्टी प्रतिनिधि ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “दस्तावेज जमा करने में देरी हुई, लेकिन हम जवाब देंगे।”
ECI के इस एक्शन से राजनीतिक दलों में हड़कंप मच गया है। विपक्षी नेता अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा, “ECI का फोकस पारदर्शिता पर होना चाहिए, न कि छोटी पार्टियों को दबाने पर।” वहीं, भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने इसे “चुनावी सुधार” बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम आगामी उपचुनावों में पार्टियों को अनुशासित करेगा। ECI ने सभी राज्यों के CEO को इसी तरह की कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। क्या ये नोटिस पार्टियों को सुधारने पर मजबूर करेंगे, या पंजीकरण रद्द की लिस्ट लंबी होगी? समय बताएगा।
