चुनाव से ठीक पहले ‘खान ब्रदर्स’ की गिरफ्तारी, सिवान की सियासत में उबाल: चिराग पासवान को झटका या बीजेपी को संजीवनी?
चुनाव से ठीक पहले ‘खान ब्रदर्स’ की गिरफ्तारी, सिवान की सियासत में उबाल: चिराग पासवान को झटका या बीजेपी को संजीवनी?
बिहार विधानसभा चुनावों से महज चंद महीनों पहले सिवान जिले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों को हिला दिया। रविवार रात सिसवन थाना क्षेत्र के ग्यासपुर गांव में विशेष कार्य बल (STF) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर ‘खान ब्रदर्स’—रईस खान और उनके सहयोगियों—को गिरफ्तार कर लिया। रईस खान, जो लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता और चिराग पासवान के करीबी माने जाते हैं, रघुनाथपुर विधानसभा सीट से टिकट की दौड़ में थे। इस गिरफ्तारी से एलजेपी की उम्मीदें धूमिल पड़ गई हैं, जबकि बीजेपी के लिए यह सियासी संजीवनी बन सकती है।
पुलिस के अनुसार, गुप्त सूचना पर छापेमारी के दौरान रईस खान के अलावा मुन्ना खान, अफताब खान और शाह आलम को भी दबोच लिया गया। मौके से एक देसी कट्टा, मादक पदार्थ, 10 मोबाइल फोन, दो वॉकी-टॉकी, बुलेटप्रूफ जैकेट, छह चारपहिया वाहन, एक बाइक और दो चाकू बरामद हुए। छह घंटे चली इस कार्रवाई में कोई विरोध नहीं हुआ। डीआईजी नीलेश कुमार ने बताया, “खान ब्रदर्स पर 52 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, अपहरण और जबरन वसूली शामिल हैं। वे चुनावी हिंसा की साजिश रच रहे थे।” रईस के भाई अयूब खान अभी फरार हैं, और उनकी तलाश जारी है।
यह गिरफ्तारी सिवान की पुरानी दुश्मनी को फिर से जगा रही है। खान ब्रदर्स कुछ महीने पहले ही जेडीयू से एलजेपी में शामिल हुए थे, ताकि रघुनाथपुर से रईस को टिकट मिले। वहीं, आरजेडी से मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब और बीजेपी से मनोज सिंह भी इसी सीट पर दावेदार हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि खान ब्रदर्स की गिरफ्तारी से एलजेपी की मुस्लिम-यादव वोट बैंक कमजोर पड़ेगा। बीजेपी नेता मनोज सिंह ने इसे ‘कानून का राज’ बताते हुए कहा, “सिवान को गुंडों से मुक्ति मिल रही है। यह चुनावी धांधली रोकने का संदेश है।” दूसरी ओर, चिराग पासवान ने चुप्पी साधी है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे अब किसी अन्य उम्मीदवार पर फोकस कर सकते हैं।
ओसामा शहाब के समर्थक इसे ‘सियासी साजिश’ बता रहे हैं। एक स्थानीय कार्यकर्ता ने कहा, “खान ब्रदर्स को निशाना बनाकर बीजेपी आरजेडी को कमजोर करना चाहती है।” सिवान, जो कभी शहाबुद्दीन के आतंक का गढ़ था, अब फिर से चुनावी मैदान में तनावग्रस्त है। पुलिस ने शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना बिहार चुनावों को और ध्रुवीकरण की ओर धकेल सकती है। क्या यह गिरफ्तारी लोकतंत्र की जीत है या सियासी हथकंडा? सवाल बिहार की सड़कों पर गूंज रहा है।
