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आपदा से लड़ रहे हैं हिमाचल और पंजाब, मंत्रियों का आरोप- केंद्र से नहीं मिली मदद

आपदा से लड़ रहे हैं हिमाचल और पंजाब, मंत्रियों का आरोप- केंद्र से नहीं मिली मदद

शिमला/चंडीगढ़: मानसून की विभीषिका ने हिमाचल प्रदेश और पंजाब को बुरी तरह जकड़ लिया है। जून से सितंबर तक चली भारी बारिश, बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ ने दोनों राज्यों में भयंकर तबाही मचाई है। हिमाचल में 161 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, जबकि पंजाब में 1,900 से ज्यादा गांव जलमग्न हो गए हैं। कुल नुकसान हजारों करोड़ रुपये का अनुमानित है, लेकिन राज्य सरकारों के मंत्री केंद्र पर मदद न पहुंचाने का गंभीर आरोप लगा रहे हैं। विपक्षी दलों पर भी राजनीतिकरण का इल्जाम लग रहा है, जिससे राहत कार्य और जटिल हो गया है।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 2 सितंबर को पूरे राज्य को ‘डिजास्टर हिट’ घोषित किया। विधानसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि राज्य को 3,056 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिसमें सड़कें, पुल, जल आपूर्ति और बिजली योजनाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। सुक्खू ने कहा, “केंद्र सरकार ने अभी तक कोई विशेष राहत पैकेज स्वीकृत नहीं किया है। हम सीमित संसाधनों से राहत कार्य चला रहे हैं।” उन्होंने विश्व बैंक को 3,000 करोड़ का पुनर्वास प्रस्ताव भेजा है, लेकिन केंद्र से अपेक्षित सहायता न मिलने पर नाराजगी जताई। संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने 28 अगस्त को विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र से इसे ‘नेशनल डिजास्टर’ घोषित करने की मांग की। पूर्व सीएम शांता कुमार ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर 20,000 करोड़ का विशेष पैकेज मांगा, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठा।

पंजाब में स्थिति और दर्दनाक है। भाखड़ा बांध से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के बाद सतलुज, ब्यास और रावी नदियां उफान पर हैं। जुलाई-अगस्त में भारी बारिश से 300,000 एकड़ कृषि भूमि डूब गई, जबकि 1,900 गांवों में बाढ़ ने कहर बरपाया। एक मंत्री ने 17 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र पर सहायता न देने का आरोप लगाया। डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य और केंद्र एजेंसियों के बीच सूचना आदान-प्रदान में कमी रही, जिससे बाढ़ प्रबंधन विफल रहा। पंजाब सरकार ने ‘गिरदावरी’ अभियान शुरू कर नुकसान का आकलन किया है और किसानों को मुआवजा देने का वादा किया, लेकिन केंद्र से अतिरिक्त फंड न आने से राहत विलंबित हो रही है।

केंद्र सरकार ने इनकार किया है। गृह मंत्रालय ने इंटर-मिनिस्टीरियल सेंट्रल टीम (IMCT) गठित की है, जो हिमाचल, पंजाब, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर का दौरा कर नुकसान का मूल्यांकन कर रही है। एनडीआरएफ की 22 टीमें, सेना के 13 कॉलम और वायुसेना के हेलीकॉप्टर तैनात हैं। केंद्रीय मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली कमिटी ने जून में 2,006 करोड़ का पुनर्निर्माण पैकेज मंजूर किया, लेकिन राज्य इसे अपर्याप्त बता रहे हैं। हिमाचल के विपक्षी नेता जयराम ठाकुर ने कहा, “पीएम ने दौरा किया, 1,500 करोड़ की घोषणा की, सात केंद्रीय मंत्री आए, लेकिन राज्य के मंत्री मैदान में नहीं दिखे। कांग्रेस केंद्र पर दोषारोपण कर रही है।”

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच प्रभावित परिवार परेशान हैं। हिमाचल में 1,237 घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त, 5,319 आंशिक रूप से प्रभावित। पंजाब में हजारों लोग विस्थापित। पूर्वी पंजाब के होशियारपुर जिले में रहने वाले ज्योति स्वरूप ने कहा, “पोंग बांध पर दबाव बढ़ रहा था, लेकिन चेतावनी समय पर नहीं दी गई।” दोनों राज्य फिस्कल संकट से जूझ रहे हैं—हिमाचल का कर्ज बढ़ रहा है, जबकि पंजाब बाढ़ नियंत्रण बांधों के अभाव में कमजोर। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से ऐसी आपदाएं बढ़ेंगी, इसलिए केंद्र-राज्य समन्वय जरूरी। क्या यह विवाद राहत को प्रभावित करेगा या केंद्र जल्द पैकेज घोषित करेगा? प्रभावितों को तत्काल सहायता की दरकार है।

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