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जुबिन गर्ग की अंतिम विदाई: अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाब, गुवाहाटी में भावुक माहौल

जुबिन गर्ग की अंतिम विदाई: अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाब, गुवाहाटी में भावुक माहौल

गुवाहाटी: असम के सुप्रसिद्ध गायक जुबिन गर्ग की अकस्मात् मृत्यु ने पूरे संगीत जगत को स्तब्ध कर दिया है। 52 वर्षीय जुबिन, जिन्हें ‘या अली’ गाने से बॉलीवुड में अमर पहचान मिली, की शवयात्रि रविवार को गुवाहाटी में निकाली गई। सरुसजई स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में रखे उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए हजारों प्रशंसकों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सड़कें जाम हो गईं, और लोग भावुक होकर आंसू बहाते नजर आए। यह दृश्य असम की सांस्कृतिक विरासत के एक युग का अंत दर्शा रहा था।

जुबिन की मृत्यु 19 सितंबर को सिंगापुर में हुई, जब वे नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के लिए वहां पहुंचे थे। पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग के अनुसार, लाजरस द्वीप पर समुद्र में तैरते समय उन्हें दौरा पड़ा, न कि स्कूबा डाइविंग के दौरान जैसा प्रारंभिक खबरों में कहा गया। उन्हें तुरंत सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन दोपहर 2:30 बजे वे दुनिया छोड़ गए। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शनिवार शाम को उनका शव विशेष विमान से दिल्ली होते हुए गुवाहाटी लाया। राज्य सरकार ने 20 से 22 सितंबर तक तीन दिवसीय राजकीय शोक घोषित किया, जिसमें कोई आधिकारिक समारोह नहीं होगा।

अंतिम संस्कार से पहले सरुसजई स्टेडियम में जुबिन के पार्थिव शरीर को रखा गया, जहां सुबह 8 बजे से ही प्रशंसक दर्शन को पहुंचने लगे। हजारों लोग ‘जुबिन दा अमर रहे’ के नारों के साथ सड़कों पर उतर आए। कई महिलाएं रोते हुए उनके चित्र पर फूल चढ़ा रही थीं, जबकि युवा उनके गाने ‘या अली’ और ‘जोनाकी’ गाकर श्रद्धांजलि दे रहे थे। बॉलीवुड गायक विशाल दादलानी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “तुम्हारी आवाज हमेशा गूंजती रहेगी।” पिटाम, बादशाह और जुबिन नौटियाल जैसे कलाकारों ने भी शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, “जुबिन की संगीतमय विरासत अमर रहेगी।”

जुबिन ने 1992 में ‘अनामिका’ एल्बम से सफर शुरू किया और 40 भाषाओं में 38,000 से अधिक गाने गाए। असम की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक बने वे सामाजिक मुद्दों पर भी मुखर रहे। उनकी पत्नी गरिमा ने कहा, “वे हमेशा लोगों को जोड़ते थे, आज भी वे हमें एक कर रहे हैं।” मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, “असम ने अपना चहेता बेटा खो दिया।” अंतिम यात्रा में परिवार के अलावा असम के गवर्नर, मंत्री और सांस्कृतिक हस्तियां शामिल हुईं। जुबिन की विदाई ने पूरे पूर्वोत्तर को गमगीन कर दिया, लेकिन उनकी धुनें सदैव जीवित रहेंगी।

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