महिलाएं डिप्रेशन और एंग्जायटी की अधिक शिकार: WHO की रिपोर्ट
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताजा रिपोर्ट ने एक चिंताजनक तथ्य उजागर किया है कि महिलाएं डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावित हो रही हैं। वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं में डिप्रेशन के मामले 64.9 प्रतिशत हैं, जबकि पुरुषों में यह केवल 35.1 प्रतिशत है। इसी तरह, एंग्जायटी डिसऑर्डर के कुल मामलों में महिलाओं की हिस्सेदारी 62.6 प्रतिशत है। यह असमानता सभी उम्र समूहों में देखी जा रही है, खासकर युवा महिलाओं में, जहां 20-24 वर्ष की आयु में एंग्जायटी का प्रतिशत 7.1 तक पहुंच जाता है।
WHO की रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में वयस्कों में डिप्रेशन से प्रभावित लोगों की संख्या 5.7 प्रतिशत है, जिसमें महिलाओं का अनुपात 6.9 प्रतिशत है, जबकि पुरुषों का 4.6 प्रतिशत। यह अंतर सामाजिक, जैविक और आर्थिक कारकों से जुड़ा हुआ है। महिलाओं को हार्मोनल बदलावों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि प्रीमेन्स्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर, पोस्टपार्टम डिप्रेशन और मेनोपॉज के दौरान एंग्जायटी, जो पुरुषों में नहीं होते। इसके अलावा, सामाजिक दबाव जैसे घरेलू जिम्मेदारियां, कार्यस्थल पर भेदभाव, आर्थिक असुरक्षा और हिंसा के खतरे महिलाओं को अधिक प्रभावित करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं में खाने की आदतों से जुड़े विकारों (ईटिंग डिसऑर्डर) के 63.3 प्रतिशत मामले भी इन्हीं कारकों से प्रेरित हैं।
यह समस्या केवल व्यक्तिगत स्तर पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी भारी पड़ रही है। WHO का अनुमान है कि डिप्रेशन और एंग्जायटी के कारण हर साल 12 अरब उत्पादक कार्यदिवस खो जाते हैं, जिससे लगभग 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान होता है। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां 75 प्रतिशत से अधिक प्रभावित लोग इलाज से वंचित रह जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरावस्था में लड़कियों में एंग्जायटी और डिप्रेशन के मामले लड़कों की तुलना में दोगुने हो जाते हैं, और मेनोपॉज के आसपास यह और बढ़ जाता है।
WHO ने इस समस्या से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है। महिलाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, जागरूकता अभियान चलाना और हार्मोनल थेरेपी जैसे उपचारों को सुलभ बनाना आवश्यक है। साथ ही, सामाजिक समानता को बढ़ावा देकर इस अंतर को कम किया जा सकता है। भारत जैसे देशों में, जहां महिलाओं पर पारंपरिक भूमिकाओं का बोझ अधिक है, सरकारों को नीतियां बनानी चाहिए। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लें, जैसे कि थेरेपी या दवाएं। रोकथाम के लिए स्वस्थ जीवनशैली, व्यायाम और सामाजिक समर्थन महत्वपूर्ण हैं।
यह रिपोर्ट महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर देती है, ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके।
