संभल में ATS यूनिट स्थापना पर सपा सांसद का तीखा विरोध: ‘मुसलमान आतंकी नहीं, BJP समाज को बांट रही’
संभल में ATS यूनिट स्थापना पर सपा सांसद का तीखा विरोध: ‘मुसलमान आतंकी नहीं, BJP समाज को बांट रही’
संभल, 15 सितंबर 2025: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) की यूनिट स्थापित करने के योगी सरकार के फैसले पर समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने की साजिश है और मुसलमान कभी आतंकी नहीं हो सकते। सांसद का यह बयान जिले में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव के बीच आया है, जहां हाल के वर्षों में आतंकी कनेक्शन के कई मामले सामने आ चुके हैं।
सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा, “मुसलमानों ने देश की आजादी से लेकर हर मुश्किल वक्त में बलिदान दिया है। वे देश की सेवा में हमेशा आगे रहे हैं। BJP सरकार मुसलमानों से चिढ़ रखती है और जानबूझकर पूरी कौम को टारगेट कर रही है। ATS सेंटर में हिंदू बच्चे भी पढ़ेंगे या काम करेंगे, फिर भी इस फैसले से समाज में नफरत फैलेगी।” उन्होंने आरोप लगाया कि यह नीति मुस्लिमों को गद्दार साबित करने का प्रयास है, जबकि मुसलमान जहां भी रहते हैं, वफादारी से रहते हैं। बर्क ने अपील की कि सरकार ऐसी नीतियां छोड़कर शांति बनाए रखने पर ध्यान दे।
यह विवाद संभल में ATS यूनिट के स्थापना के ऐलान के बाद भड़का है। पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई के अनुसार, मुरादाबाद जोन की यह पहली स्थायी ATS यूनिट जामा मस्जिद के सामने स्थित सत्यव्रत पुलिस चौकी में अस्थायी रूप से शुरू होगी। ATS के आईजी प्रेम गौतम के आदेश पर यह कदम उठाया गया है, जो नवंबर 2024 के जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा और विदेशी हथियारों की बरामदगी से जुड़ा माना जा रहा है। न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में भी संभल की डेमोग्राफी बदलने और सांप्रदायिक तनाव की बात कही गई थी।
संभल जिला लंबे समय से अतिसंवेदनशील रहा है। यहां अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे संगठनों से जुड़े मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, जिनमें स्थानीय लोग सजा काट चुके हैं। सपा सांसद का बयान राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जियाउर्रहमान बर्क पर पहले भी संभल हिंसा मामले में FIR दर्ज हो चुकी है। विपक्ष का कहना है कि यह फैसला सुरक्षा के नाम पर समुदाय-विशेष को निशाना बनाने का प्रयास है, जबकि भाजपा इसे कानून-व्यवस्था मजबूत करने का कदम बता रही है।
स्थानीय निवासियों में इस फैसले को लेकर दोराय है। कुछ इसे आवश्यक मानते हैं, तो कुछ सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का डर जता रहे हैं। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है, लेकिन सांसद के बयान से राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि संभल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में ऐसी कार्रवाइयों से सामाजिक सद्भाव प्रभावित न हो, इसके लिए संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है।
