प्लेट और रॉड नहीं अब ग्लू से जुड़ेगी टूटी हड्डियां, चीन ने बनाया दुनिया का पहला ‘बोन ग्लू’
बीजिंग: चीनी वैज्ञानिकों ने चिकित्सा विज्ञान में एक क्रांतिकारी खोज की है। उन्होंने दुनिया का पहला ‘बोन ग्लू’ विकसित किया है, जो टूटी हुई हड्डियों को मात्र 2-3 मिनट में जोड़ सकता है। यह बायोडिग्रेडेबल सामग्री सीपों से प्रेरित है और रक्तयुक्त वातावरण में भी मजबूती से काम करती है। इस ग्लू की चिपकने की क्षमता 200 किलोग्राम से अधिक है, जो पारंपरिक सर्जरी की जरूरत को कम कर देगी। 9 सितंबर 2025 को जियांग्शी विश्वविद्यालय के सर रन रन शॉ अस्पताल ने इसकी पहली क्लिनिकल स्टडी पूरी की, जो कम्यूनाइटेड फ्रैक्चर (जटिल टूटन) के इलाज के लिए इस्तेमाल की गई। यह खोज वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नया युग शुरू कर सकती है।
‘बोन 02’ नामक इस ग्लू को विकसित करने में 50 से अधिक फॉर्मूलेशन और सैकड़ों ट्रायल्स का इस्तेमाल किया गया। वैज्ञानिकों ने सीपों की चिपकने की प्रक्रिया से प्रेरणा ली, जो पानी में भी मजबूत बंधन बनाती है। यह ग्लू रक्त में भी 2-3 मिनट में हड्डी के टुकड़ों को जोड़ देता है और 6 महीनों में शरीर में घुल जाता है, जिससे कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। क्लिनिकल ट्रायल में एक युवा मजदूर की कलाई की जटिल टूटन का इलाज किया गया। सर्जन ने केवल 2-3 सेंटीमीटर का छोटा चीरा लगाया और 3 मिनट में टुकड़ों को फिक्स कर दिया। इससे मरीज को सेकेंडरी सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी, जो पारंपरिक मेटल इम्प्लांट्स में आम समस्या है।
पारंपरिक हड्डी जोड़ने की प्रक्रिया में मेटल प्लेट्स या स्क्रू इस्तेमाल होते हैं, जो संक्रमण का खतरा बढ़ाते हैं और कई बार दोबारा सर्जरी की जरूरत पड़ती है। लेकिन ‘बोन ग्लू’ इन कमियों को दूर करता है। इसकी एडहेजन स्ट्रेंथ 400 पाउंड से अधिक है, जो जोड़ों के पास की टूटन में आर्थराइटिस के खतरे को कम करती है। चीनी शोधकर्ताओं ने कहा कि यह ग्लू बायोसेफ्टी और रक्त में चिपकने की चुनौतियों को पार कर चुका है। पशु प्रयोगों में यह सफल रहा, और अब मानव ट्रायल्स में भी सकारात्मक परिणाम मिले हैं। इससे सर्जरी का समय कम होगा, रिकवरी तेज होगी और लागत घटेगी।
यह खोज चीन की बायोटेक्नोलॉजी में बढ़ती प्रगति को दर्शाती है। सर रन रन शॉ अस्पताल के डॉक्टरों ने कई संस्थानों के साथ मिलकर इसे विकसित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ग्लू जल्द ही वैश्विक बाजार में उपलब्ध होगा, खासकर दुर्घटना प्रभावित क्षेत्रों में। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इसकी सराहना की है, लेकिन व्यापक ट्रायल्स की सिफारिश की। भारत जैसे विकासशील देशों में जहां सड़क हादसे आम हैं, यह तकनीक लाखों मरीजों को फायदा पहुंचा सकती है। कुल मिलाकर, ‘बोन ग्लू’ चिकित्सा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, जो टूटी हड्डियों को तेजी से जोड़कर जीवन को आसान बनाएगा।
