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कुल्लू में फिर लैंडस्लाइड: 5 लोग चपेट में, 1 की मौत, बचाव कार्य जारी

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में भारी बारिश के कारण एक बार फिर भूस्खलन की घटना ने तबाही मचा दी। इंनर अखाड़ा बाजार क्षेत्र में मंगलवार सुबह हुए इस भूस्खलन में एक घर की चपेट में आने से 5 लोग फंस गए, जिनमें से एक की मौत हो गई। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और स्थानीय पुलिस की टीमें बचाव कार्य में जुटी हुई हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश ने राहत अभियान को मुश्किल बना दिया है।

घटना का विवरण

सुबह करीब 6 बजे इंनर अखाड़ा बाजार में अचानक भूस्खलन होने से एक आवासीय भवन ढह गया। इस हादसे में रह रहे 5 लोग मलबे में दब गए। NDRF की टीम ने तुरंत कार्रवाई शुरू की, जिसमें एक शव बरामद किया गया, जबकि 3 लोगों को घायल अवस्था में बाहर निकाला गया। दो लोग अभी भी मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका है। घायलों को कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। कुल्लू के एसपी कथिकेयन गोकुलचंद्रन ने बताया कि बचाव कार्य जारी है और जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित घोषित कर दिया है।

पिछले हादसों का सिलसिला

यह कुल्लू में हाल के दिनों में तीसरा बड़ा भूस्खलन है। 3 सितंबर को अखाड़ा बाजार में ही एक भूस्खलन में दो लोग मलबे में दब गए थे, जबकि 4 सितंबर को दो घरों के ढहने से 7 कश्मीरी मजदूर फंस गए, जिनमें से 3 की मौत हो चुकी है। इन घटनाओं में कुल 4 लोगों की जान जा चुकी है और कई अभी भी लापता हैं। लगातार बारिश के कारण कुल्लू-मंडी मार्ग सहित कई सड़कें बंद हो चुकी हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के अनुसार, इस मानसून में हिमाचल में 355 मौतें हो चुकी हैं, जिनमें से अधिकांश भूस्खलन और बाढ़ से जुड़ी हैं।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों को 5 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। उन्होंने कहा, “बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। हम हर संभव मदद कर रहे हैं।” NDRF की दो अतिरिक्त टीमें कुल्लू भेजी गई हैं, जो बैकहो लोडर और अन्य मशीनरी से मलबा हटाने का काम कर रही हैं। जिला प्रशासन ने आसपास के इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है और लोगों को घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है। साथ ही, 7 सितंबर तक सभी स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटर बंद रखने का आदेश दिया गया है।

कारण और चेतावनी

जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, हिमाचल में बढ़ते तापमान और अनियमित वर्षा के कारण भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं। कुल्लू जिले में पिछले एक सप्ताह से हो रही मूसलाधार बारिश ने नदियों का जलस्तर बढ़ा दिया है, जिससे पहाड़ी इलाकों में खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग ने 10 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। स्थानीय लोगों ने बुनियादी ढांचे की कमजोरी पर सवाल उठाए हैं और सरकार से तत्काल राहत की मांग की है।

यह घटना हिमाचल के पहाड़ी जिलों में प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती संख्या को दर्शाती है, जहां पर्यटन और कृषि पर इसका गहरा असर पड़ रहा है। बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं, और उम्मीद है कि बाकी फंसे लोगों को जल्द सुरक्षित निकाला जा सकेगा।

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में भारी बारिश के कारण एक बार फिर भूस्खलन की घटना सामने आई है। मंगलवार सुबह अखाड़ा बाजार क्षेत्र में हुए एक बड़े भूस्खलन में दो मकान जमींदोज हो गए, जिसमें 5 लोग चपेट में आए। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग अभी भी मलबे में फंसे हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), पुलिस, और स्थानीय प्रशासन की टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं।

हादसे का विवरण

घटना सुबह करीब 6:45 बजे अखाड़ा बाजार के इनर क्षेत्र में हुई, जहां भारी बारिश के कारण पहाड़ी से मलबा और चट्टानें गिरने से दो मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए। मृतक की पहचान मेहराज लौल (30), बांदीपोरा, कश्मीर के निवासी के रूप में हुई है। तीन लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला गया, जिनमें से दो महिलाएं और एक पुरुष गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों को कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल में भर्ती किया गया है, जबकि एक व्यक्ति को गंभीर हालत में एम्स बिलासपुर रेफर किया गया है।

बचाव कार्य में चुनौतियां

कुल्लू की उपायुक्त तोरुल एस. रवीश ने बताया कि छह लोग अभी भी मलबे में फंसे हो सकते हैं, जिनमें एक महिला और पांच कश्मीरी मजदूर शामिल हैं। बचाव कार्य में NDRF, होम गार्ड, अग्निशमन विभाग, और स्थानीय पुलिस की टीमें लगी हुई हैं, लेकिन लगातार बारिश के कारण ऑपरेशन में काफी मुश्किलें आ रही हैं। दो जेसीबी मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का काम जारी है।

स्थानीय प्रशासन का रुख

उपायुक्त ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र के मकानों को खाली करा लिया गया है, और स्थानीय गुरुद्वारे में अस्थायी पुनर्वास केंद्र बनाया गया है, जहां प्रभावित परिवारों को भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है, उनका कहना है कि अखाड़ा बाजार और मठ क्षेत्र में जल निकासी, सीवरेज, और अवैध निर्माण की समस्याओं को बार-बार उठाया गया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

मौसम और अन्य नुकसान

हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की शुरुआत (20 जून) से अब तक 355 लोगों की मौत हो चुकी है, और 49 लोग लापता हैं। कुल्लू में यह तीन दिनों में चौथा बड़ा भूस्खलन है। राज्य में 1,292 सड़कें, जिनमें छह राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं, बंद हैं। कुल्लू में 230 सड़कें प्रभावित हैं, और 1,885 बिजली ट्रांसफार्मर और 824 जल आपूर्ति योजनाएं बाधित हैं। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में बारिश में कमी की भविष्यवाणी की है, लेकिन सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घटनास्थल का दौरा किया और कहा, “यह एक भयावह घटना है। तीन शव बरामद किए जा चुके हैं, और बाकी लोगों को निकालने के लिए प्रयास तेज किए जाएंगे। प्रशासन को राहत और बचाव कार्यों में कोई कमी नहीं रखने के निर्देश दिए गए हैं।” उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, पानी, और सड़क संपर्क जल्द बहाल करने का आश्वासन दिया।

कुल्लू में बार-बार हो रहे भूस्खलन ने स्थानीय प्रशासन और निवासियों के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अनियोजित निर्माण और जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। स्थानीय लोग अब ठोस कदमों और दीर्घकालिक समाधानों की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों से बचा जा सके।

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