चंद्र ग्रहण 2025: हरिद्वार में मंदिरों के कपाट बंद, हरकी पैड़ी पर दोपहर में हुई संध्याकालीन गंगा आरती
चंद्र ग्रहण 2025: हरिद्वार में मंदिरों के कपाट बंद, हरकी पैड़ी पर दोपहर में हुई संध्याकालीन गंगा आरती
साल 2025 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण रविवार रात को होने के कारण उत्तराखंड के हरिद्वार में धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए मंदिरों के कपाट दोपहर में ही बंद कर दिए गए। विश्व प्रसिद्ध हरकी पैड़ी पर होने वाली संध्याकालीन गंगा आरती, जो सामान्य दिनों में शाम 6:30 बजे होती है, आज सूतक काल शुरू होने से पहले दोपहर 12:30 बजे संपन्न कर ली गई। इस बदलाव के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु दोपहर की आरती में शामिल हुए और गंगा स्नान किया।
सूतक काल और मंदिरों का बंद होना
श्री गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने बताया कि चंद्र ग्रहण रविवार रात 9:57 बजे शुरू होगा और 8 सितंबर को मध्यरात्रि 1:27 बजे समाप्त होगा, जिसमें ग्रहण का चरम रात 11:41 बजे होगा। सूतक काल, जो ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू होता है, दोपहर 12:57 बजे से प्रभावी हो गया। इस दौरान हरिद्वार के प्रमुख मंदिरों जैसे दक्ष मंदिर, माया देवी, मनसा देवी, और चंडी देवी के कपाट बंद रहे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक और ग्रहण काल में पूजा-पाठ और शुभ कार्य वर्जित होते हैं।
मंदिरों की शुद्धि और पुनः खुलना
वशिष्ठ ने बताया कि मां गंगा के मंदिर के कपाट सूतक शुरू होने से पहले बंद कर दिए गए। ग्रहण समाप्त होने के बाद, 8 सितंबर को सुबह मंदिरों को गंगा जल से शुद्ध करने के बाद कपाट खोले जाएंगे और नियमित पूजा-पाठ शुरू होगा। तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित ने कहा कि इस दौरान श्रद्धालुओं को जप, तप, और मंत्रोच्चार करने की सलाह दी गई है।
चारधाम और अन्य मंदिरों पर असर
चंद्र ग्रहण का प्रभाव उत्तराखंड के चारधाम—बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, और यमुनोत्री—सहित अन्य प्रमुख मंदिरों पर भी दिखा। बद्री-केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने बताया कि दोपहर 12:50 बजे से सभी मंदिर बंद कर दिए गए। गंगोत्री धाम मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने पुष्टि की कि सूतक काल के अनुसार कपाट बंद किए गए। सोमवार सुबह गर्भगृह की शुद्धि के बाद दर्शन और पूजा फिर से शुरू होंगे।
धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
यह पूर्ण चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में होगा। ज्योतिषी प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि कुंभ और मीन राशि वालों को ग्रहण नहीं देखना चाहिए, जबकि मेष, वृषभ, कन्या, और धनु राशि वालों के लिए यह शुभ रहेगा। पितृ पक्ष की शुरुआत के साथ यह ग्रहण और भी महत्वपूर्ण हो गया है, और धर्माचार्यों ने सुझाव दिया कि पिंडदान जैसे कार्य सूतक शुरू होने से पहले पूरे कर लिए जाएं।
