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‘हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया’, टैरिफ वॉर के बीच राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और रूस के साथ संबंधों को लेकर एक सनसनीखेज बयान दिया है, जिसने वैश्विक कूटनीति और टैरिफ वॉर को नया मोड़ दे दिया है। 5 सितंबर 2025 को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ट्रंप ने लिखा, “लगता है हमने भारत और रूस को चीन के सबसे गहरे और अंधेरे पाले में खो दिया है। उम्मीद है कि उनका साथ लंबा और समृद्ध हो।” यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 26% टैरिफ और रूसी तेल व्यापार पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिससे भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ गया है।

ट्रंप का यह बयान भारत के हाल के कदमों, विशेष रूप से रूस से तेल आयात और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के तहत चीन के साथ बढ़ती साझेदारी की ओर इशारा करता है। 2 अप्रैल 2025 को ट्रंप ने भारत पर 26% टैरिफ लागू करने के आदेश पर हस्ताक्षर किए, जो 3 अप्रैल रात 9:30 बजे (IST) से प्रभावी हो गया। यह टैरिफ भारत द्वारा अमेरिका पर 52% टैरिफ के जवाब में आधा (reciprocal tariff) लगाया गया है। ट्रंप ने दावा किया कि भारत और चीन जैसे देश अमेरिका पर भारी टैरिफ लगाकर अपने बाजारों में अमेरिकी सामान को बेचने से रोकते हैं, जिसके जवाब में यह कदम उठाया गया है।

ट्रंप के बयान ने भारत में सियासी हलचल मचा दी है। गुजरात में उनके बैनर हटाए गए, और स्थानीय नेताओं ने इसे “भारत का अपमान” करार दिया। ट्रंप के ट्रेड सलाहकार पीटर नवारो ने हाल ही में कहा था, “भारत अब अधिनायकवादी देशों के साथ हाथ मिला रहा है। चीन ने अक्साई चिन पर कब्जा किया, वे आपके दोस्त नहीं हैं।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि रूस और यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए भारत की तुलना में चीन अधिक प्रभावी रहा, जिससे भारत की रणनीतिक स्थिति पर सवाल उठे।

भारत ने इस टैरिफ वॉर का जवाब समझदारी से दिया है। सरकार ने सात देशों (ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कतर, बहरीन आदि) के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर बातचीत तेज कर दी है, ताकि अमेरिकी टैरिफ का असर कम हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को मरीन प्रोडक्ट्स, रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों में नए बाजार मिल सकते हैं। भारत ने चीन की तरह जवाबी टैरिफ नहीं लगाए, जिसे कूटनीतिक सूझबूझ माना जा रहा है। हालांकि, विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कूटनीतिक विफलता है।

ट्रंप का यह बयान भारत-रूस-चीन त्रिकोणीय संबंधों पर उनके असंतोष को दर्शाता है। भारत के रूस से तेल आयात पर 25% अतिरिक्त टैरिफ ने भी तनाव बढ़ाया है, जबकि चीन को इस मामले में छूट दी गई है।

विदेश मंत्रालय ने इस पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन सूत्रों का कहना है कि भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) के जरिए इस चुनौती से निपटेगा। यह विवाद वैश्विक व्यापार युद्ध को और गहरा सकता है, और भारत की कूटनीति की अगली कड़ी पर सबकी नजर है।

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