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सीडीएस अनिल चौहान ने चीन के साथ सीमा विवाद को बताया भारत की सबसे बड़ी चुनौती, गिनाए चार प्रमुख राष्ट्रीय खतरे

सीडीएस अनिल चौहान ने चीन के साथ सीमा विवाद को बताया भारत की सबसे बड़ी चुनौती, गिनाए चार प्रमुख राष्ट्रीय खतरे

गोरखपुर: भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार, 5 सितंबर 2025 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में चीन के साथ सीमा विवाद को भारत की सबसे बड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती करार दिया। “भारत के सामने सुरक्षा चुनौतियां” विषय पर बोलते हुए उन्होंने चार प्रमुख खतरों की चर्चा की, जिनमें पाकिस्तान की प्रॉक्सी वॉर, क्षेत्रीय अस्थिरता, और युद्ध के बदलते स्वरूप शामिल हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार देखा जा रहा है, लेकिन सीडीएस ने स्पष्ट किया कि सीमा विवाद लंबे समय तक चुनौती बना रहेगा।

जनरल चौहान ने कहा, “देशों के सामने चुनौतियां क्षणिक नहीं होतीं। मेरा मानना है कि चीन के साथ सीमा विवाद भारत की सबसे बड़ी चुनौती है और यह बनी रहेगी। दूसरी बड़ी चुनौती पाकिस्तान की प्रॉक्सी वॉर है, जिसकी रणनीति ‘भारत को हजार घावों से लहूलुहान करना’ है।” उन्होंने क्षेत्रीय अस्थिरता को तीसरी चुनौती बताया, क्योंकि भारत के सभी पड़ोसी देश सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक अशांति का सामना कर रहे हैं। चौथी चुनौती के रूप में उन्होंने युद्ध के बदलते स्वरूप का जिक्र किया, जिसमें साइबर, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक डोमेन शामिल हैं। “हमारे दोनों प्रतिद्वंद्वी (चीन और पाकिस्तान) परमाणु शक्ति संपन्न हैं, इसलिए यह तय करना हमेशा चुनौतीपूर्ण होगा कि उनके खिलाफ किस तरह का ऑपरेशन चलाया जाए।”

सीडीएस ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि यह मल्टी-डोमेन ऑपरेशन था, जिसमें साइबर वॉरफेयर और सैन्य विंग्स के बीच समन्वय शामिल था। “ऑपरेशन सिंदूर में हमें पूरी स्वतंत्रता थी, जिसमें लक्ष्य चयन और योजना शामिल थी। इसका उद्देश्य पहलगाम आतंकी हमले (22 अप्रैल 2025) का बदला लेना नहीं, बल्कि हमारी सहनशीलता की सीमा रेखा खींचना था।” उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) ने इस ऑपरेशन में मार्गदर्शन, लक्ष्य चयन और डी-एस्केलेशन की रूपरेखा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

चौहान ने बालाकोट और उरी हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे भारत और पाकिस्तान ने अलग-अलग सबक सीखे। “भारत ने लंबी दूरी के सटीक हमलों और नुकसान मूल्यांकन पर ध्यान दिया, जबकि पाकिस्तान ने अपनी हवाई रक्षा को मजबूत किया।” उन्होंने भारत की सात देशों से लगी संवेदनशील सीमाओं और आतंकवाद जैसे गैर-पारंपरिक खतरों पर भी जोर दिया।

इससे पहले, जनरल चौहान ने गोरखनाथ मंदिर में दर्शन किए और महंत दिग्विजयनाथ महाराज और महंत अवेद्यनाथ महाराज की पुण्यतिथि पर आयोजित ‘व्याख्यानमाला’ में हिस्सा लिया। इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। गोरखा युद्ध स्मारक के सौंदर्यीकरण और संग्रहालय के शिलान्यास समारोह में भी उन्होंने भाग लिया, जिसकी लागत 45 करोड़ रुपये है। यह परियोजना भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत करेगी।

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