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एक और टैरिफ, ट्रम्प की आयातित ड्रग्स पर 200% टैरिफ लगाने की तैयारी, मिल सकता है एक और झटका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दवा कंपनियों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी है, जो वैश्विक फार्मा उद्योग में हलचल मचा रही है। जुलाई 2025 में कैबिनेट मीटिंग के दौरान ट्रंप ने कहा कि आयातित दवाओं पर 200% तक टैरिफ लगाया जाएगा, जो “बहुत जल्द” लागू हो सकता है। बाद में अगस्त में उन्होंने इसे और बढ़ाकर 250% तक की बात कही। यह योजना अमेरिका में दवा उत्पादन को बढ़ावा देने और विदेशी निर्भरता कम करने के लिए है। ट्रंप का कहना है कि कंपनियों को 1 से 1.5 साल का समय दिया जाएगा ताकि वे मैन्युफैक्चरिंग को अमेरिका शिफ्ट कर सकें। अगर ऐसा न हुआ, तो ऊंचा टैरिफ लगेगा। यह कदम ट्रंप की व्यापक “मेक अमेरिका ग्रेट अगेन” पॉलिसी का हिस्सा है, जहां वे आयात पर टैरिफ के जरिए घरेलू उद्योग को मजबूत करना चाहते हैं।

ट्रंप प्रशासन ने अप्रैल 2025 में फार्मास्यूटिकल्स के आयात पर राष्ट्रीय सुरक्षा जांच शुरू की थी, जो सेक्शन 232 के तहत की गई। इसका मकसद यह देखना है कि विदेशी दवाओं पर निर्भरता अमेरिका की सुरक्षा को खतरा तो नहीं। रिपोर्ट के आधार पर टैरिफ लगाए जाएंगे, जो छोटे स्तर से शुरू होकर धीरे-धीरे बढ़ेंगे। उदाहरण के लिए, पहले छोटा टैरिफ, फिर 150% और अंत में 250%। ट्रंप ने कहा, “हम चाहते हैं कि दवाएं अमेरिका में बनी हों।” यह योजना चीन, भारत, आयरलैंड और स्विट्जरलैंड जैसे देशों से आने वाली दवाओं को निशाना बनाएगी, जहां से अमेरिका $200 बिलियन से ज्यादा का आयात करता है। जेनेरिक दवाओं पर असर ज्यादा पड़ेगा, क्योंकि वे कम मार्जिन पर चलती हैं और ज्यादातर भारत-चीन से आती हैं। ब्रांडेड दवाओं के लिए यूरोपीय यूनियन के साथ 15% टैरिफ का डील हो चुका है, जिसमें कुछ जेनेरिक्स को छूट मिल सकती है।

फार्मा कंपनियां इस योजना से चिंतित हैं। PhRMA जैसे संगठन कहते हैं कि टैरिफ दवा कीमतें बढ़ाएंगे, सप्लाई चेन बाधित होगी और मरीजों को नुकसान होगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ 25% टैरिफ से अमेरिका में दवा लागत $51 बिलियन सालाना बढ़ सकती है। कंपनियां जैसे एली लिली, जॉनसन एंड जॉनसन ने अमेरिका में $250 बिलियन से ज्यादा निवेश का ऐलान किया है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि नई फैसिलिटी बनाने में 3-5 साल लगेंगे। ट्रंप ने साथ ही 17 बड़ी दवा कंपनियों को लेटर भेजकर दबाव डाला कि वे अमेरिका में अन्य देशों जितनी कीमतें अपनाएं, वरना “हर हथियार” इस्तेमाल करेंगे। विपक्ष और अर्थशास्त्री चेतावनी दे रहे हैं कि यह उपभोक्ताओं पर बोझ डालेगा, दवा की कमी हो सकती है और वैश्विक व्यापार युद्ध तेज होगा। भारत जैसे देशों के शेयर गिरे हैं, क्योंकि वे अमेरिका को 50% जेनेरिक दवाएं सप्लाई करते हैं। कुल मिलाकर, ट्रंप की यह योजना अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का दावा करती है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं पर जोखिम बढ़ा रही है। घोषणा अगले कुछ हफ्तों में हो सकती है।

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