राष्ट्रीय

वैष्णो देवी में लैंडस्लाइड से मौत का आंकड़ा 31 हुआ: जम्मू-कटरा हाईवे बंद, 22 ट्रेनें भी रद्द

जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में माता वैष्णो देवी धाम की ओर जाने वाले मार्ग पर भारी बारिश के कारण मंगलवार दोपहर भयंकर भूस्खलन हुआ, जिसमें 31 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। 23 अन्य घायल बताए जा रहे हैं, जबकि कई लोग अभी भी मलबे में दबे होने का शक है। यह हादसा अधकवारी गुफा मंदिर के पास इंदरप्रस्थ भोजनालय के निकट हुआ, जो यात्रा मार्ग के मध्य बिंदु पर स्थित है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने यात्रा पूरी तरह निलंबित कर दी है और श्रद्धालुओं से मौसम सुधरने तक यात्रा स्थगित करने की अपील की है। जम्मू-कटरा हाईवे भी भूस्खलन और बाढ़ के कारण बंद हो गया, जिससे हजारों यात्री फंस गए। इसके अलावा, 22 ट्रेनें रद्द कर दी गईं, जिसमें कटरा से चलने वाली अधिकांश ट्रेनें शामिल हैं।

पुलिस अधीक्षक (रियासी) परमवीर सिंह ने बताया कि मलबे से 31 शव बरामद हो चुके हैं, जबकि बचाव कार्य जारी है। “भारी बारिश ने पहाड़ी ढलान को फिसलने पर मजबूर कर दिया, जिसमें पत्थर, मिट्टी और पेड़ यात्रियों पर गिर पड़े।” एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय सेना और स्थानीय पुलिस की टीमें रातभर बचाव कार्य में जुटी रहीं, लेकिन लगातार हो रही बारिश ने चुनौतियां बढ़ा दीं। एक प्रत्यक्षदर्शी, पंजाब के मोहाली से आई किरण ने बताया, “हम दर्शन करके लौट रहे थे जब अचानक चीखें गूंजीं। पत्थरों की बौछार देखकर भागे, लेकिन तीन साथी घायल हो गए।” कटरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में घायलों का इलाज चल रहा है।

यह हादसा जम्मू क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश का परिणाम है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने रेड अलर्ट जारी किया है, जिसमें 27 अगस्त तक बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन की चेतावनी दी गई है। जम्मू में 81.5 मिमी, कटरा में 68.8 मिमी और कठुआ में 155.6 मिमी बारिश दर्ज की गई। तवी नदी खतरे के स्तर से ऊपर बह रही है, जबकि चेनाब नदी भी चेतावनी स्तर पर पहुंच गई। डोडा जिले में बादल फटने से तीन और मौतें हुईं, जहां कई घर बह गए। कुल मिलाकर, बारिश से जुड़ी घटनाओं में 40 से अधिक मौतें हो चुकी हैं।

परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर चंद्रकोट, केला मोड़ और बैटरी चश्मा में भूस्खलन से यातायात निलंबित। कठुआ में सहार खाड़ नदी पर पुल बह गया, जिससे जम्मू-पठानकोट हाईवे बंद। उधमपुर-रामनगर और किश्त्वाड़-पड्डर सड़कें भी क्षतिग्रस्त। नॉर्दर्न रेलवे ने पठानकोट-कंडरोड़ी लाइन पर मिट्टी कटाव और चक्की नदी में बाढ़ के कारण 22 ट्रेनें रद्द कीं, जिसमें कटरा से 9 ट्रेनें शामिल हैं। 27 ट्रेनें शॉर्ट टर्मिनेट की गईं। बिहार, यूपी और राजस्थान से आए सैकड़ों श्रद्धालु कटरा में फंस गए, जो घर लौटने को बेताब हैं। एक यात्री दशरथ ने कहा, “दर्शन हो गया, लेकिन अब ट्रेनें बंद हैं। बिहार कैसे लौटें?”

प्रशासन ने राहत कार्य तेज कर दिया है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने घायलों को तत्काल सहायता का निर्देश दिया और सेना की तीन रिलीफ कॉलम तैनात कीं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा, “बारिश ने भारी तबाही मचाई है। फोन और इंटरनेट सेवाएं बहाल करने का प्रयास जारी है।” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अब्दुल्ला और सिन्हा से बात की और एनडीआरएफ की अतिरिक्त टीम भेजी। जम्मू डिवीजन में सभी सरकारी और निजी स्कूल 27 अगस्त तक बंद, जबकि कक्षा 10-11 की परीक्षाएं स्थगित। रात्रि में लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित। टेलीकॉम सेवाएं चरमरा गईं, क्योंकि फाइबर कट गए।

श्राइन बोर्ड ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए: 9906019460, 9906019446 और 9103491554। यात्रियों से अपील की गई कि मौसम सुधरने तक यात्रा न करें। यह घटना वैष्णो देवी यात्रा की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही है, जहां सालाना करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से ऐसी आपदाएं बढ़ रही हैं। फिलहाल, बचाव कार्य जारी है और मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने की घोषणा हो चुकी है। जम्मू-कश्मीर में बारिश का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं।

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