ब्लिंकिट ने नॉन-इमरजेंसी एम्बुलेंस बुकिंग पर लागू किया 2,500 रुपये का शुल्क, इमरजेंसी सेवाएं रहेंगी पूरी तरह मुफ्त
ब्लिंकिट ने नॉन-इमरजेंसी एम्बुलेंस बुकिंग पर लागू किया 2,500 रुपये का शुल्क, इमरजेंसी सेवाएं रहेंगी पूरी तरह मुफ्त
क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘ब्लिंकिट’ (Blinkit) ने गैर-आपातकालीन (नॉन-इमरजेंसी) एम्बुलेंस बुकिंग के लिए 2,500 रुपये का एक समान (फ्लैट) शुल्क लागू करने का बड़ा फैसला लिया है। हालांकि, कंपनी ने यह साफ किया है कि वास्तविक आपातकालीन (इमरजेंसी) चिकित्सा जरूरतों के लिए 10 मिनट की एम्बुलेंस सेवा पहले की तरह पूरी तरह से निःशुल्क (फ्री) उपलब्ध रहेगी।
दीपिंदर गोयल ने बताई शुल्क लागू करने की वजह
इटरनल (Zomato/Blinkit की पैरेंट कंपनी) के संस्थापक दीपिंदर गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर इस फैसले के पीछे का कारण साझा किया।
नॉन-इमरजेंसी बुकिंग में बढ़ोतरी: गोयल ने बताया कि मुफ्त सेवा होने के कारण बड़ी संख्या में लोग सामान्य स्वास्थ्य जांच, डॉक्टर कंसल्टेशन, routine चेकअप और अस्पताल से घर आने-जाने जैसी गैर-आपातकालीन यात्राओं के लिए एम्बुलेंस बुक करने लगे थे।
इमरजेंसी मरीजों को नुकसान: पैरामेडिक्स और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस ये एम्बुलेंसें नॉन-इमरजेंसी बुकिंग में व्यस्त हो जाती थीं, जिससे गंभीर मरीजों (जिन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता होती है) तक सेवा पहुंचने में देरी का जोखिम बना रहता था।
2 साल का रिपोर्ट कार्ड: पिछले दो वर्षों में ब्लिंकिट एम्बुलेंस सेवा ने लगभग 42,000 मामलों में सहायता दी, जिनमें से करीब 20,000 मामले ही वास्तविक आपातकालीन स्थिति से जुड़े थे।
कैसे काम करेगी नई व्यवस्था?
इमरजेंसी बुकिंग: पूरी तरह निःशुल्क रहेगी।
नॉन-इमरजेंसी बुकिंग: प्रति यात्रा 2,500 रुपये का शुल्क लिया जाएगा, जिसका भुगतान यात्रा पूरी होने के बाद करना होगा। यह दर सामान्य निजी एम्बुलेंस सेवाओं के बराबर ही रखी गई है।
इटरनल फाउंडेशन को जाएगा फंड: इस सेवा से मिलने वाला शुल्क ‘इटरनल फाउंडेशन’ को दिया जाएगा, जो इन एम्बुलेंसों का संचालन करती है। इससे भविष्य में नेटवर्क के विस्तार में मदद मिलेगी।
कंपनी को उम्मीद है कि इस कदम से एम्बुलेंस सेवा के गैर-जरूरी इस्तेमाल पर रोक लगेगी और 10 मिनट की इमरजेंसी एम्बुलेंस सर्विस जरूरतमंद और गंभीर मरीजों के लिए हर समय तत्पर रह सकेगी।

