राजनीति

हरियाणा के करनाल में अमित शाह का राहुल गांधी पर तीखा प्रहार: ‘हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर न फोड़ें, चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार’

हरियाणा के करनाल में अमित शाह का राहुल गांधी पर तीखा प्रहार: ‘हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर न फोड़ें, चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार’

​हरियाणा के करनाल में गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी की 15 दिवसीय ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा (22 अक्टूबर से 5 नवंबर) के समापन समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर चौतरफा हमला बोला। अमित शाह ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद से हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली और असम जैसे राज्यों में जनता लगातार कांग्रेस को नकार चुकी है, लेकिन राहुल गांधी अपनी बौखलाहट में हार का ठीकरा चुनाव आयोग और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर फोड़ रहे हैं।

​भाषण की प्रमुख बातें और राजनीतिक हमले:

​चुनाव आयोग और SIR पर राहुल गांधी को चुनौती: अमित शाह ने सवाल उठाया कि 2014, 2019, 2024 के लोकसभा चुनावों और हरियाणा-महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में कोई SIR नहीं थी, फिर भी कांग्रेस बुरी तरह हारी। उन्होंने राहुल गांधी को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बहस करना चाहते हैं, तो बस एक पत्र लिख दें; सरकार SIR प्रक्रिया पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

​संसद का वॉकआउट बनाम सड़क की राजनीति: गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने संसद में बहस करने के बजाय हंगामा और वॉकआउट करने को कांग्रेस का कल्चर बना दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी को सड़क पर ही बहस करने का शौक है, तो हरियाणा के किसी भी चौराहे का नाम बता दें, भाजपा युवा मोर्चा का अध्यक्ष ही उनसे चर्चा करने आ जाएगा।

​घुसपैठियों और सिख दंगों पर प्रहार: शाह ने कहा कि भाजपा का संकल्प देश से घुसपैठियों को ढूंढकर मतदाता सूची से हटाने और देश से बाहर निकालने का है, जबकि कांग्रेस घुसपैठियों के वोट बचाने के लिए रैलियां कर रही है। उन्होंने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस ने 1984 के सिख दंगों और नरसंहार के काले दिन को ही रैली के लिए चुना।

​विधायकों के घटते आंकड़ों का ब्योरा: राहुल गांधी के राजनीतिक ट्रैक रिकॉर्ड पर तंज कसते हुए शाह ने आंकड़े गिनाए—2007 में राहुल के महासचिव बनने पर कांग्रेस के पास 1200 विधायक थे, जो उपाध्यक्ष बनने पर 900, अध्यक्ष बनने पर 700 और ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के बाद घटकर महज 600 रह गए।

​अमित शाह ने दावा किया कि 2014 के बाद से पीएम मोदी के नेतृत्व में भाजपा के सांसदों और विधायकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि देश की जनता कांग्रेस के किसी भी झांसे में आने वाली नहीं है।

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