CJP की विदेशी फंडिंग के आरोपों पर सियासी घमासान, जितेंद्र सिंह के दावों पर संगठन का पलटवार
CJP की विदेशी फंडिंग के आरोपों पर सियासी घमासान, जितेंद्र सिंह के दावों पर संगठन का पलटवार
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की कथित विदेशी फंडिंग और उसके नेताओं के विदेशी संपर्कों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संगठन पर भारत विरोधी ताकतों और पाकिस्तानी हैंडलर्स से आर्थिक मदद लेने के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, CJP ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए सरकार पर जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने का आरोप लगाया है।
संगठन के नेताओं का कहना है कि यदि उनके विदेशी संपर्क और फंडिंग को लेकर सरकार के पास ठोस जानकारी थी, तो सरकारी प्रतिनिधि उनके साथ बैठकें और बातचीत क्यों कर रहे थे? CJP ने जंतर-मंतर पर हुई पूछताछ को सामान्य प्रक्रिया बताते हुए जांच में सहयोग करने की बात भी कही है।
जितेंद्र सिंह का आरोप- भारत विरोधी ताकतों से मिल रही फंडिंग
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान CJP पर देश के भीतर और बाहर सक्रिय भारत विरोधी ताकतों के साथ सांठगांठ का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके को अमेरिकी डोनर्स से, जबकि सह-संस्थापक आशुतोष रांका को पाकिस्तानी राजनेताओं और वहां के हैंडलर्स से आर्थिक मदद मिल रही है।
जितेंद्र सिंह के मुताबिक, खुफिया इनपुट्स में विदेशी फंडिंग के जरिए भारत के खिलाफ कथित तौर पर झूठा नैरेटिव तैयार करने और जनमत को प्रभावित करने की बात सामने आई है। उन्होंने विदेशी आर्थिक मदद पर नियंत्रण के लिए फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) का भी समर्थन किया।
इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कर्नाटक विधान परिषद के बैलेट पेपर से हुए चुनाव में NDA की जीत का जिक्र किया। उन्होंने इसे विपक्ष के EVM को लेकर लगाए जाने वाले आरोपों का जवाब बताया।
‘अगर विदेशी फंडिंग थी तो सरकारी प्रतिनिधियों ने साथ बैठकर चाय क्यों पी?’
केंद्रीय मंत्री के आरोपों पर CJP नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संगठन के नेता सौरव दास ने सवाल उठाया कि यदि CJP को वास्तव में अवैध विदेशी फंडिंग मिल रही थी, तो सरकार के प्रतिनिधि उनके साथ बैठकें क्यों कर रहे थे और बैठकर चाय क्यों पी रहे थे?
CJP का आरोप है कि सरकार अपने एजेंडे और देश के अहम मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस तरह के आरोप लगा रही है। संगठन के नेताओं ने कहा कि इससे पहले भी उनके खातों को पाकिस्तान से जोड़कर बदनाम करने की कोशिश की गई थी, लेकिन आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत सामने नहीं रखे गए।
सरकारी विभागों के बीच तालमेल पर भी उठाए सवाल
CJP नेता सौरव दास ने केंद्रीय मंत्री के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए सरकार के अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल की कमी का मुद्दा उठाया। उनका दावा है कि एक तरफ गृह मंत्रालय और कुछ मंत्री विदेशी फंडिंग के आरोप लगा रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से इस मामले में विदेशी फंडिंग नहीं होने की बात कही जा चुकी है।
दास ने कहा कि सरकार को अपने दावों में स्पष्टता रखनी चाहिए। संगठन का कहना है कि आंदोलन शुरू होने के बाद से ही उसके खिलाफ इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।
जंतर-मंतर पर पूछताछ को आशुतोष रांका ने बताया रूटीन जांच
CJP के सह-संस्थापक और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने जंतर-मंतर पर हुई पूछताछ और 13 अक्टूबर की घटनाओं को लेकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वहां हुई कार्रवाई सामान्य पूछताछ और रूटीन जांच का हिस्सा थी।
रांका ने कहा कि संगठन जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर या देश के किसी अन्य स्थान पर तिरंगा फहराना कोई अपराध नहीं है और इसे गलत नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
हालांकि, मीडिया ने जब उनसे भविष्य में होने वाले प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों की अगली रणनीति को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
फिलहाल CJP की कथित विदेशी फंडिंग को लेकर केंद्रीय मंत्री के आरोपों और संगठन के जवाबी दावों के बीच विवाद जारी है। दोनों पक्षों के बयानों के बीच इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष अहम होंगे।

