मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया गठबंधन आक्रामक: राष्ट्रपति से मुलाकात की तैयारी, सबूतों का नया डोजियर होगा पेश
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया गठबंधन आक्रामक: राष्ट्रपति से मुलाकात की तैयारी, सबूतों का नया डोजियर होगा पेश
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के इंडिया (INDIA) गठबंधन का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नई दिल्ली स्थित आवास (10, राजाजी मार्ग) पर विपक्षी नेताओं की अहम बैठक के बाद दिवाली के उपरांत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलने का समय मांगने की रणनीति बनाई गई है।
राष्ट्रपति से मुलाकात और नए डोजियर की तैयारी:
सबूतों के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात: इंडिया गठबंधन के सांसद दिवाली का पर्व बीतने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से समय मांगेंगे। विपक्ष का दावा है कि इस बार राष्ट्रपति को ज्ञानेश कुमार की कथित अनियमितताओं और पक्षपातपूर्ण फैसलों के खिलाफ ठोस सबूतों का नया डोजियर सौंपा जाएगा।
विशेष गहन समीक्षा (SIR) पर आरोप: विपक्ष का गंभीर आरोप है कि आयोग ‘विशेष गहन समीक्षा (SIR)’ प्रक्रिया और डिजिटल तंत्र की आड़ में देश भर के करोड़ों वास्तविक और वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से अवैध तरीके से हटा रहा है।
जन महाभियोग और आगे के कड़े कदम:
’जन महाभियोग’ का आयोजन: रणनीतिक योजना के तहत शनिवार (31 अक्टूबर) को मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर इंडिया गठबंधन के प्रमुख नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ (Public Impeachment) कार्यक्रम का आयोजन किया।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में महाआयोजन: 1 नवंबर को कांग्रेस और सहयोगी दल दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ नाम से एक विशाल जन-रैली का आयोजन करेंगे, जिसमें संसद सत्र से पूर्व व्यापक विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा बनाई गई है।
क्या हैं विपक्ष के मुख्य आरोप?
मल्लिकार्जुन खड़गे और गठबंधन के अन्य प्रमुख नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुख्य रूप से 6 बड़े आरोप लगाए हैं:
मतदाता सूची से करोड़ों नाम अवैध रूप से हटाना।
संसद की बिना मंजूरी के ‘फॉर्म 6’ (Form 6) में मनमाने बदलाव करना।
आयोग की निर्णय प्रक्रिया में अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार करना।
ECINET और डिजिटल डेटा पर केंद्रीकृत नियंत्रण स्थापित करना।
निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास।
विपक्षी शिकायतों को नजरअंदाज करना।
विपक्ष ने स्पष्ट संकेत दिया है कि संसद के आगामी सत्र तक मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और पुरानी मतपत्र (Paper Ballot) व्यवस्था की मांगों को लेकर आंदोलन लगातार जारी रहेगा।

