उत्तराखंड विधानसभा का सत्र: गैरसैंण में मंगलवार से शुरू हो रहा सरकार का आखिरी सत्र, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी घमासान की पूरी तैयारी
उत्तराखंड विधानसभा का सत्र: गैरसैंण में मंगलवार से शुरू हो रहा सरकार का आखिरी सत्र, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी घमासान की पूरी तैयारी
चमोली जिले के गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में मंगलवार (27 अक्टूबर 2026) से मौजूदा सरकार का आखिरी विधानसभा सत्र शुरू होने जा रहा है। चुनाव से ठीक पहले हो रहे इस दो दिवसीय सत्र को लेकर उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ने ही सदन के भीतर और बाहर एक-दूसरे को घेरने की पुख्ता रणनीति तैयार कर ली है।
1. सत्ता पक्ष (भाजपा) की रणनीति: विपक्ष के हर वार का होगा पलटवार
चुनाव से पहले के इस अंतिम सत्र में भाजपा कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है। पार्टी की मुख्य कोशिश विपक्ष के हमलों की धार को कुंद करने और सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की होगी।
विधानमंडल दल की बैठक: सत्र से ठीक पहले सोमवार को गैरसैंण में भाजपा विधानमंडल दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई, जिसमें सभी विधायकों और मंत्रियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश तय किए गए।
संगठन का निर्देश: पार्टी ने सभी विधायकों को सदन में पूरी एकजुटता दिखाने, मंत्रियों को अपने विभागों से जुड़े हर आंकड़े और जवाब के साथ तैयार रहने तथा विपक्ष के हर आरोप का आक्रामक और मुखर होकर जवाब देने को कहा है।
महेंद्र भट्ट का बयान: प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का कहना है कि सरकार ने अपने कार्यकाल में कई ऐतिहासिक कार्य किए हैं, जबकि विपक्ष ने केवल नकारात्मक नैरेटिव सेट करने का काम किया है। भाजपा विधायक सदन में हर गलत आरोप का पूरी मजबूती से जवाब देंगे।
2. मुख्य विपक्षी दल (कांग्रेस) का आक्रामक रुख और मुद्दे:
कांग्रेस ने इस सत्र को भुनाने के लिए सड़क से लेकर सदन तक चौतरफा मोर्चा खोलने की योजना बनाई है।
विधानसभा घेराव (27 अक्टूबर): रणनीति के तहत कांग्रेस मंगलवार को गैरसैंण में एक विशाल विधानसभा घेराव करने जा रही है, जिसके जरिए सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।
प्रमुख मुद्दे:
अंकिता भंडारी प्रकरण: पीड़िता को इंसाफ दिलाने और मामले में कथित ‘VIP’ की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग को लेकर पार्टी सड़क और सदन दोनों जगह मुखर रहेगी।
कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा: हाल ही में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य से जुड़े विवाद को आधार बनाकर कांग्रेस प्रदेश में महिला सुरक्षा और गिरती कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा करेगी।
अन्य राजनीतिक व जनहित मुद्दे: ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत मतदाता सूची पुनरीक्षण और नागरिकों के वोट अधिकारों की रक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी कांग्रेस आक्रामक तेवर अपनाएगी।
गणेश गोदियाल का बयान: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने स्पष्ट किया है कि पार्टी विधायक जनहित के ज्वलंत मुद्दों पर सरकार से तीखे सवाल पूछेंगे, वहीं कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर सरकार की नींद उड़ाने का काम करेंगे।
राजनीतिक मायने:
मौजूदा सरकार के इस अंतिम विधानसभा सत्र में दोनों ही दल जनता के बीच एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की जुगत में हैं। जहां एक ओर सरकार अपनी साढ़े चार साल की विकास यात्रा और नीतियों को भुनाने का प्रयास करेगी, वहीं कांग्रेस चुनावी साल से ठीक पहले सरकार को कानून-व्यवस्था और अन्य संवेदनशील मामलों पर घेरकर सत्ता परिवर्तन का माहौल बनाने की कोशिश में है।

