इजरायल चुनाव 2026: अंतिम सर्वे में डेडलॉक के संकेत, नेतन्याहू की कुर्सी पर संकट; भारत-इजरायल रिश्ते पर क्या पड़ेगा असर?
इजरायल चुनाव 2026: अंतिम सर्वे में डेडलॉक के संकेत, नेतन्याहू की कुर्सी पर संकट; भारत-इजरायल रिश्ते पर क्या पड़ेगा असर?
तेल अवीव/नई दिल्ली। इजरायल में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को 26वीं नेसेट (संसद) के चुनाव हो रहे हैं। अंतिम जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार न तो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दक्षिणपंथी-धार्मिक गठबंधन को और न ही विपक्षी ‘चेंज ब्लॉक’ को स्पष्ट बहुमत (61 सीटें) मिलता दिख रहा है। इससे सरकार गठन का गणित जटिल होने और संभावित राजनीतिक अनिश्चितता के आसार हैं।
अंतिम सर्वे क्या कह रहे हैं?
गादी आइजेनकोट की पार्टी याशार ज्यादातर सर्वेक्षणों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है (औसतन 22-23 सीटें)।
नेतन्याहू की लिकुड 19-21 सीटों के आसपास है।
नेतन्याहू समर्थक ब्लॉक (लिकुड + ओत्ज्मा यहूदित + शास + यूनाइटेड तोराह यहूदाइज्म + रिलिजियस जियोनिज्म आदि) को ज्यादातर पोल में 48-53 सीटें मिलने का अनुमान है।
विपक्षी चेंज ब्लॉक (याशार + नफ्ताली बेनेट की टुगेदर + डेमोक्रेट्स आदि) को 52-56 सीटों के आसपास दिखाया जा रहा है।
अरब पार्टियों (जॉइंट लिस्ट और रा’अम) को 14-16 सीटें मिलने की संभावना है, जो किसी भी सरकार गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।
चैनल 12, चैनल 13, कान और मआरिव जैसे अंतिम सर्वेक्षणों में दोनों ब्लॉक 61 के जादुई आंकड़े से दूर हैं। इससे हंग पार्लियामेंट या लंबे गठबंधन वार्ता की स्थिति बन सकती है।
नेतन्याहू की कुर्सी बचाने की चुनौती
नेतन्याहू लंबे समय से सत्ता में हैं और गठबंधन बनाने में माहिर माने जाते हैं। लेकिन 7 अक्टूबर हमले की सुरक्षा चूक, गाजा युद्ध, हरेदी समुदाय के सैन्य सेवा से छूट और महंगाई जैसे मुद्दों ने उनके लिए चुनौती बढ़ा दी है। आइजेनकोट (पूर्व आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ) सीधे तौर पर नेतन्याहू के खिलाफ लड़ रहे हैं और उन्होंने साफ कहा है कि वे नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल नहीं होंगे।
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
विश्लेषकों का मानना है कि भारत-इजरायल रिश्ते चुनाव नतीजों से ज्यादा प्रभावित नहीं होंगे। दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि, साइबर सुरक्षा और नवाचार में मजबूत संस्थागत सहयोग है। फरवरी 2026 में दोनों देशों ने रिश्तों को ‘स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा दिया था।
नेतन्याहू की जीत से मौजूदा व्यक्तिगत रिश्ते और निरंतरता बनी रहेगी।
विपक्षी सरकार आने पर भी रक्षा और तकनीकी सहयोग जारी रहने की उम्मीद है, हालांकि नए नेतृत्व के साथ रिश्ते को फिर से स्थापित करने की जरूरत पड़ सकती है।
कुल मिलाकर, भारत-इजरायल साझेदारी व्यक्तिगत रिश्तों से आगे बढ़कर रणनीतिक जरूरतों पर आधारित हो चुकी है। इसलिए नेतृत्व परिवर्तन का बड़ा नकारात्मक असर पड़ने की संभावना कम है।
अपडेट: मतदान मंगलवार को होगा। मतदान केंद्र रात 10 बजे बंद होने के बाद एग्जिट पोल जारी किए जाएंगे। आधिकारिक नतीजे कुछ दिनों बाद आने की उम्मीद है।

